रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में शुल्क लेने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रहीं। वार्ड ब्वाय की अनुपलब्धता, दवाओं की कमी और स्ट्रेचर तक परिजनों से चलवाने जैसी व्यवस्थागत खामियां सवाल खड़े कर रही हैं।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पेड सेवा दी जा रही लेकिन सुविधाएं सरकारी से भी बदतर है। यहां मरीजों से इलाज के नाम पर शुल्क वसूला जाता है लेकिन सुविधाएं नहीं मिलती। मरीजों को ओटी से लेकर वार्ड तक खुद परिजन स्ट्रेचर में धक्का मार कर ले जाते हैं। कहीं भी ब्वार्ड ब्वाय नहीं है। दवाइयां तक नहीं मिलती। बाहर से खरीदना पड़ रहा। अस्पताल का हाल बुरा है।
150 करोड़ की लागत से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनाया गया। डिप्टी सीएम को उम्मीद थी कि इस अस्पताल के बनने से मरीजों को राहत मिलेगी। इलाज के लिए रीवा के लोगों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यहां सुविधाएं भी प्राइवेट अस्पताल की तर्ज पर रखी गर्इं। इलाज कराने पर शुल्क भी निर्धारित किया गया। सब कुछ प्राइवेट की तरह ही यहां चलता ै लेकिन हालात सरकारी अस्पताल से भी बदतर है। मरीजों को शुल्क के हिसाब से सुविधाएं नहीं मिल रही है। सिर्फ बेड पर डॉक्टर पहुंच कर इलाज और जांच कर रहे हैं। इसके अलावा सारा इंतजाम मरीजों ओर उनके परिजनों को ही करना पड़ रहा है।
दवाइयां तक नहीं है, बाहर से मंगाई जाती है
सुपर स्पेशलिटी की हालत बदतर हो गई है। यहां वार्डों में मरीजों की जान बचाने के लिए दवाइयां तक नहीं है। पैनटॉप का इंजेक्शन तक खत्म है। बाहर से मरीजों के परिजनों से इंजेक्शन मंगाया जा रहा है। इसके अलावा दिल के मरीजों को दी जाने वाली दर्द की दवा अल्ट्रासेट , दिल के दौरे को रोकने की दवा झायग्रेल जैसी दवाइयां तक यहां मौजूद नहीं है। इन्हें भी मरीजों से बाहर से ही मंगवाया जाता है। अब इस पेड अस्पताल की हालत खुद ही समझ सकते हैं।
ओटी से मरीज को परिजन स्ट्रेचर ढकेलकर ले गए
हालात यह है कि मरीजों को वार्ड तक ओटी तक परिजन ही लेकर जाते हैं। बुधवार को कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती मरीजों की पांचवे तल पर कैथलैब में एंजियोग्राफी और एंजियाप्लास्टी हो रही थी। यहां मरीज और उनके परिजनों की भीड़ लगी थी। आपरेशन थिएटर तक ले जाने और लाने के लिए कोई भी वार्ड ब्वाय मौजूद नहीं था। परिजन खुद ही स्ट्रेचर धकेलते ले जा रहे थे। आपरेशन के बाद मरीजों की सुरक्षा की भी जिम्मेदारी अस्पताल की होती है लेकिन यहां लापरवाही बरती गई। एक भी वार्ड ब्वाय मौके पर नजर नहीं आया। यह हालात सिर्फ कार्डियोलॉजी विभाग में ही देखने को नहीं मिला। न्यूरो, यूरो, नेफ्रालॉजी विभाग तक में महिलाएं, बच्चे तक स्ट्रेचर ढकेल रहे थे।
51 वार्ड ब्वाय हैं तैनात लेकिन सब गायब
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सिर्फ गिनती के ही विभाग संचालित है। यहां 51 वार्ड ब्वाय तैनात किए गए हंै। इन वार्ड ब्वाय की जिम्मेदारी मरीजों की देखभाल करना है। उन्हें वार्ड से ओटी और ओटी से वार्ड तक लाने ले जाने की है। हालांकि कहीं भी यह नजर नहीं आते। इन्हें डॉक्टरों की सहायता के लिए वार्डों में पदस्थ कर दिया गया है, जो कुछ भी करते नहीं दिखते। कई ओटी में तैनात है। यह सभी नान टेक्नीकल स्टाफ है। फिर भी इनसे टेक्नीकल काम लिया जाता है। कुल मिलाकर मरीजों की जान को भी खतरे में डालने का काम किया जा रहा है।
सुपर स्पेशलिटी में 51 वार्ड ब्वाय है। सभी वार्ड में एक-एक तैनात किए गए हंै। यह सभी वार्ड में मौजूद रहते हैं। वार्डों में काम करते हैं। मरीजों के साथ स्ट्रेचर के लिए जरूर उपलब्ध नहीं हो पाते। सभी ओटी में भी वार्ड ब्वाय लगे हुए हैं। वार्ड ब्वाय की समस्या तो है, इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहे हैं।
अखिलेश साहू, सुपरवाइजर, इजाइल सिक्योरिटी प्रा लि, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवा


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