जिला अस्पताल सतना में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण पिछले 9 दिनों से सामान्य सोनोग्राफी सेवा बंद है, जिससे दूर-दराज़ से आए मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एकमात्र रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश पर जाने से अस्पताल में जांच का संकट गहरा गया है और मरीज महंगे निजी क्लीनिकों में जांच करवाने को विवश हैं। अस्पताल में 4 पद रिक्त होने और मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद विशेषज्ञों की कमी मरीजों के इलाज में बड़ी बाधा बनी हुई है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चिकित्सकीय व्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है। जिला अस्पताल में एक तो वैसे भी यहां चिकित्सकीय स्टाफ का टोटा है और ऊपर से कोई पदस्थ स्टाफ अवकाश पर चला गया मानो तब तो मरीजों की आफत तय है। मिली जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल में सामान्य सोनोग्राफी जांच की सुविधा बीते 9 दिनों से बंद है। अस्पताल में संचालित जनरल सोनोग्राफी का दरवाजा दिसंबर माह में खोला ही नहीं गया है। बीते 9 दिन से यहां ताला लटक रहा है और आगामी 14 दिसंबर तक बंद रहेगा। बताया गया कि रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक डॉ. हर्षिका सिंह अवकाश पर हैं। रेडियोलॉजिस्ट के न होने से सोनोग्राफी कराने आने वाले मरीजों को कई कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ रहा है। यहां तक कि जनरल सोनोग्राफी बंद होने से कई दूर-दराज से आये मरीजों को निजी क्लीनिक का सहारा भी लेना पड़ रहा है। सोनोग्राफी कक्ष में ताला लटका देखकर मायूस लौटे मरीज निजी क्लीनिकों में सोनोग्राफी कराने 1000 से 1500 रुपए तक खर्च कर रहे हैं।
तीन माह बाद की दी जा रही तारीख
अस्पताल प्रबंधन जनरल सोनोग्राफी के बाहर सूचना बोर्ड टांगकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गया है। सूचना में लिखा है कि रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक डॉ. हर्षिका सिंह13 दिसंबर तक छुट्टी पर हैं तब तक सोनोग्राफी जांच बंद रहेगी। ये बात तो हो गई कि रेडियोलॉजिस्ट के अवकाश में जाने के कारण जनरल सोनोग्राफी बंद है, लेकिन आम दिनों में भी आने वाले मरीजों को भी केवल तारीख ही दी जाती है वो भी अगले तीन माह बाद की। अब बताइये कैसे भला कोई मरीज तीन माह तक सोनोग्राफी के आभाव में इलाज के बिना रह सकता है।
मेडिकल कॉलेज की इकलौती रेडियोलॉजिस्ट
मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में मेडिकल कॉलेज की डॉ. हर्षिका सिंह इकलौती रेडियोलॉजिस्ट हैं जिनके द्वारा ओपीडी और भर्ती मरीजों की जनरल सोनोग्राफी जांच की जा रही है। जिला अस्पताल में इकलौती रेडियोलॉजिस्ट होने के कारण मरीजों की समय पर सोनोग्राफी नहीं हो पा रही है बताया गया कि जिला अस्पताल में 5 पद रेडियोलॉजिस्ट के रिक्त हैं जिसमे से मेडिकल कॉलेज से एक चिकित्सक का अनुबंध जिला अस्पताल के लिए किया गया है। अभी भी 4 पद खाली पड़े हुए हैं। गौरतलब है कि हाल ही में सोनोग्राफी जांच में वेटिंग पीरियड कम करने के लिए कलेक्टर के निर्देश पर निजी चिकित्सकों की डियूटी भी जांच के लिए लगाई गई है, लेकिन समस्या का हल नहीं निकल। मरीजों को अब भी दो- दो माह के बाद की तारीख दी जारही है।
रेडियोलॉजिस्ट की कमी बनी बाधा
चार अल्ट्रासोनोग्राफी (यूएसजी) मशीनें होने के बावजूद डॉक्टरों की कमी के चलते मरीजों को दो-दो माह के बाद की तारीख दी जा रही है। रोजाना ओपीडी और आईपीडी के जरिए 100 से अधिक मरीज सोनोग्राफी के लिए पहुंचते हैं, लेकिन केवल 30-40 की जांच हो पाती है। अस्पताल में नई मशीनों पर आधुनिक सुविधाएं, जैसे कलर डॉपलर, उपलब्ध हैं। लेकिन, रेडियोलॉजिस्ट की कमी के चलते सामान्य के साथ आधुनिक सुविधाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं और मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटर का रुख करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो अस्पताल को कम से कम पांच और रेडियोलॉजिस्ट की आवश्यकता है, जिससे यह समस्या हल हो सके।
सर्जरी के मरीजों को सोनोग्राफी की सलाह
जिला अस्पताल में ठण्ड के चलते भले ही ओपीडी में मरीज कम आ रहे हैं लेकिन सर्जरी के मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक सर्जरी ओपीडी में रोजाना 200 के आसपास मरीज सर्जरी के लिए पहुंच रहे हैं । इसका कारण यह है कि गर्मी के मुकाबले ठंड में मरीज आॅपरेशन कराने में ज्यादा राहत महसूस करते हैं। जिला अस्पताल में सर्जरी विभाग में आने वाले मरीजों में पुरानी समस्या हर्निया, गॉलब्लैडर के आॅपरेशन, पथरी, अपेंडिक्स जैसी समस्याएं देखने को मिल रही है, इनमे से नियमित चार-पांच मरीजों का आॅपरेशन किया जा रहा है। इन मरीजों को सर्जरी के पहले ब्लड टेस्ट एवं सोनोग्राफी आदि कराने की सलाह दी जा रही है।
एक ही रेडियोलॉजिस्ट होने के चलते कुछ मरीजों को सोनोग्राफी जांच में समस्याएं हो रही हैं, हालांकि गंभीर मरीजों को गायनी में लगी सोनोग्राफी मशीनों से जांच करवाने के निर्देश दिए गए हैं। निजी रेडियोलॉजिस्ट को जिला अस्पताल में सोनोग्राफी सेवा देने के लिए व्यवस्था बनाई गई थी वे चिकित्सक कभी-कभार समय पाकर आकर सेवाएं देते हैं।
डॉ. मनोज शुक्ला, सीएमएचओ
पेट में कल रात से अचानक दर्द होने के कारण जिला अस्पताल आई। ओपीडी में चिकित्सकों द्वारा पेट की सोनोग्राफी कराने कि सलाह दी गई है,लेकिन यहां ताला लटका हुआ है। अब निजी क्लीनिक में पैसा खर्च करना पड़ेगा।
महिमा वर्मन, मरीज
अपेंडिक्स का आॅपरेशन होना है। पेट में रोज दर्द बना रहता है। चिकित्सकों ने सोनोग्राफी कराने के लिए कहा है। सोनोग्राफी के बाद ही सर्जरी की जाएगी। तीन दिन से चक्कर काट रहा हूं लेकिन ताला नहीं खुला। सूचना भी इतनी ऊपर लगी है कि दिखाई नहीं देती।
राजकुमार सिंह, मरीज


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