सतना जिला अस्पताल की सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट में चूहों की धमाचौकड़ी का वीडियो वायरल हुआ है, जिससे नवजात शिशुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं संक्रमित खून के मामले में ब्लड बैंक की जांच, अधिकारियों का निलंबन और नाको टीम की एंट्री से स्वास्थ्य व्यवस्था कटघरे में है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
पहले मासूमों को संक्रमण की खाई में झोंक दिया अब नवजातों की जान पर खतरा मंडराने लगा है। खतरा चूहों की चहलकदमी से पैदा हुआ है। यह बात उस वार्ड की है जहां नवजात सांसे गिनते हैं। इस वार्ड का हाल ऐसा है कि चूहे दिन-रात धमाचौकड़ी करते नजर आते हैं। विडंबना यह है कि व्यवस्था दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी जिन कंधों में है वह आखिर किस चश्मे से जिला के सबसे बड़े अस्पताल को देख रहे हैं।
चूहा कभी इधर...कभी उधर, न जीवन सहयोगी उपकरण बच पा रहे न अन्य सहयोगी वस्तुएं...दीवारों में छत चढ़ने को तैयारी सीलन....विद्युत प्रवाह के उखड़े उपकरण... जी, हां आप सही समझे यह सरकारी भवन ही है। यह अव्यवस्था जिला अस्पताल में संचालित सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट की है जहां नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। यहां उन शिशुओं का उपचार जिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई का एक वीडियो वायरल हुआ है। जिसमें चूहा कैबिन के अंदर धमाचौकड़ी मचाते दिख रहा है। वायरल वीडियो में चूहा कुछ पीले रंग का मुंह में दबाकर इधर-उधर उछल कूद करता नजर आ रहा है।
वह कई उपकरणों तक पहुंच रहा है। गौरतलब है कि इंदौर के अस्पताल में बच्चों को चूहा द्वारा कुतरे जाने की घटना हो चुकी है। इससे बच्चों की जान भी चली गई थी। यही नहीं जबलपुर में भी ऐसी घटना हो चुकी है। लिहाला जिला अस्पताल प्रबंधन नहीं जागा तो सतना में भी चूहों द्वारा नवजातों की कुतरने की घटना कभी भी हो सकती है।
परिजनों ने बनाया वीडियोज
चौकाने वाली बात तो यह है कि जिला अस्पताल में जहां इलाज और स्वच्छता पहली प्राथमिकता में होनी चाहिए वहीं के सबसे गंभीर वार्ड में चूहे खुलेआम धमा- चौकड़ी मचा रहे हैं। वार्ड में भर्ती नवजात तो मासूम हैं उन्हें किसी समस्या का पता नहीं है लेकिन उनके साथ आए हुए परिजनों में डर का माहौल बना हुआ है। वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों ने आरोप भी लगाया है कि यह कोई नई समस्या नहीं है,कई दिनों से इस वार्ड में चूहों के साथ चीटियों का भी आतंक बना हुआ है। इस गंभीर समस्या की नर्सिंग स्टाफ एवं डाक्टरों से कई बार शिकायत की गई है लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है। हालात जस के तस बने हुए हैं परिजनों ने बताया कि शिकायतों के बाद निराकरण पूछने पर चिकित्सकों ने कहा कि हम प्रबंधन से शिकायत कर चुके हैं कि वार्ड में नवजात बच्चे भर्ती हैं और वार्ड में चूहों ने डेरा डाल रखा है, इस समस्या को हल कराइए लेकिन प्रबंधन ने सुनकर भी अनसुना कर दिया, शायद प्रबंधन अभी भी किसी अनहोनी होने का इंतजार कर रहा है। अंतत: मजबूरी में परिजनों ने वीडियो बनाकर मामले को सार्वजनिक कर दिया है।
इंदौर में बच्चों को कुतर चुके हैं चूहे
किसी सरकारी अस्पताल में चूहों की धमा- चौकड़ी का यह कोई पहला मामला नहीं है,जब सरकारी अस्पताल में इस प्रकार की लापरवाही उजागर हुई हो, हाल ही में प्रदेश के इंदौर के एम वाय अस्पताल में नवजात बच्चों को चूहों ने कुतर दिया था जिसके चलते बच्चों की मौत हो गई थी। मौत की घटना के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए थे। इतना ही नहीं जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को भी चूहों द्वारा कुतरे जाने का मामला सामने आ चुका है अब सतना जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के सबसे गंभीर वार्ड से चूहों के आतंक का वीडियो सामने आया है। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के नाम पर प्रबंधन द्वारा साल भर में करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं इसके बावजूद सरकारी अस्पताल के स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो रहा है।
दो साल में ही बद् से बद्तर हो गई हालत
पूरे एसएनसीयू वार्ड का इन्फ्रास्ट्रेक्चर गुणवत्ता सही न होने के कारण दो साल में ही बद से बदत्तर हो गया है। वार्ड में इस समय 45 नवजातों का इलाज जारी है। वार्ड में इनबार्न एवं आउटबार्न के 12-12 बेड लगाए गए हैं। इसके अलावा 9 नए वार्मर बेड भी लगा दिए गए हैं। कुल मिलाकर इस समय एसएनसीयू वार्ड में 35 बेड पर 45 बच्चे इलाज के लिए भर्ती हैं। नवजात बच्चों में जरा सी चूक किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकती है।
आरकेएस के बजट से होता है पेस्ट कंट्रोल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोगी कल्याण समिति (आरकेएस) के बजट से जिला अस्पताल के सभी वार्डों में पेस्टी साइड कंट्रोल कराया जाता है। इसके अंतर्गत दीमक को भगाने के लिए दवा का छिड़काव किया जाता है। दीमक के लिए हर 6 महीने या साल भर में दवा का छिड़काव किया जाता है। पेस्ट कंट्रोल के लिए लोकल वेंडर को नियुक्त किया गया है। जबकि पेस्ट कंट्रोल से संबंधित दवा एवं अन्य सामान वेंडर को खरीद कर दिया जाता है। वहीं चूहों के लिए सभी वार्डों में रैट किलर, दवाईयां एवं पिंजड़ा भी रखाया जाता है। जिला अस्पताल के मीटिंग हाल में क्वालिटी टीम आफिस में चूहों एवं चीटियों से संबंधित दवाईयां एवं अन्य सामग्रियां रखी जाती हैं और सभी वार्ड प्रभारी को जरूरत पर यहां से ले जाने के निर्देश भी दिए जाते हैं।
सीलन से संक्रमण
गंभीर प्रकार के संक्रमणों से बचाने के लिए नवजातों को गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया जाता है लेकिन अंदर की दीवारों में सीलन छत छूने को बेताब है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इकाई के अंदर संक्रमण का खतरा कितना है। इसके अलावा शार्ट सर्किट का भी खतरा है। इकाई के अंदर बिजली के स्विच बोर्ड खुले नजर आ रहे हैं। यह सब वायरल बीडियो भी दिखाई दे रहा है।
टीम ने 72 घंटे की ब्लड बैंक की जांच
जिला अस्पताल में थैलीसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को संक्रमित खून चढ़ाने के मामले की प्राथमिक जांच के तौर पर भले ही तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया लेकिन जांच प्रक्रिया अभी भी चल रही है। जांच टीम के सामने 200 डोनरों को ट्रेस करना चुनौती भरा विषय बना हुआ है। शुक्रवार को भी राज्य स्तरीय टीम के चार सदस्यों द्वारा ब्लड बैंक के रिकार्डो की जांच एवं अधिकारियों के बयान लिए गए। राज्य स्तर से आई ब्लड सेल एसबीटीसी की उप संचालक डा. रूबी खान द्वारा शुक्रवार की देर रात तक ब्लड बैंक के रिकार्डों एवं फार्मो में दर्ज होने वाले नार्म्स की जांच- पड़ताल की गई। बताया गया कि राज्य स्तरीय टीम ब्लड बैंक के रिकार्ड एवं चिकित्सकों के बयान संग्रहित कर देर रात भोपाल के लिए रवाना हो गई। जांच टीम को सात दिन के अंदर तथ्यात्मक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए थे। अब देखना यह बाकी है कि तीन अधिकारियों के निलंबन होने के बाद आगे क्या जांच रिपोर्ट सामने आती है?
24 घंटे बाद भी निलंबित कर्मियों को नहीं मिला आदेश
गुरुवार की देर रात आयुष्मान भारत के सीईओ योगेश भरसट की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डा. देवेन्द्र सिंह पटेल, लैब टेक्नीशियन रामभाई त्रिपाठी एवं नंदलाल पांडेय को निलंबित किया गया था लेकिन 24 घंटे बीतने के बाद भी इन अधिकारियों को निलंबन का आदेश नहीं मिला। जांच अधिकारियों के सामने ये अधिकारी और कर्मी रोजाना की तरह ही कार्य करते नजर आए। हालांकि गुरुवार की देर रात स्वास्थ्य आयुक्त द्वारा सभी निलंबित कर्मियों के निलंबन के आदेश और जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भेज दी गई थी।
मरीज के परिजन से ली फार्म के बारे में जानकारी
सूत्रों ने बताया कि डा. रूबी खान द्वारा दिनभर रिकार्डों को जांचने के साथ तथ्यों को भी लिखा जा रहा था। ब्लड बैंक प्रभारी के चेम्बर से बाहर निकलते ही चिकित्सक ने मरीज के परिजन को अंदर बुलाया और ब्लड बैंक द्वारा भरे जाने वाले फार्म के बारे में पूछा। जिसकी जानकारी परिजनों को नहीं थी। पर्चे में ब्लड डोनर का नाम मणिशंकर साकेत एवं ब्लड ग्रुप ओ पॉजटिव लिखा था। उप संचालक द्वारा ब्लड डोनर वाले फार्म के बारे में भी जानकारी ली गई। उन्होंने पूछा क्या कभी आपने इस फार्म को भरा है, इस पर जवाब न मिला। जवाब न मिलते ही इस चीज का उल्लेख भी डाक्टर द्वारा जांच रिपोर्ट में किया गया। बताया गया कि राज्य स्तरीय टीम के साथ रीवा मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डा. लोकेश त्रिपाठी भी मौजूद थे।
निलंबन अधिकारियों के खिलाफ ये मिली गड़बड़ियां
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तरुण राठी द्वारा आयुष्मान भारत के सीईओ योगेश भरसट की प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला अस्पताल के ब्लड बंैक प्रभारी और दो लैब टेक्नीशियनों को निलंबित करने का आदेश दिया गया था। वहीं पूर्व सिविल सर्जन डा. मनोज शुक्ला को कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी। जांच रिपोर्टो के आधार पर यह पाया गया कि डा. मनोज शुक्ला जिला सतना में 18 मई 2024 से 17 दिसम्बर 2025 की अवधि दौरान जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के पद पर पदस्थ थे। आपकी पदस्थ उपस्थिति के दौरान थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के ब्लड ट्रांसफ्यूजन से एचआईवी संक्रमण की पुष्टि हुई थी लेकिन आपके द्वारा कार्य के प्रति लापरवाही बरती गई। सिविल सर्जन के पद पर रहते हुए डा. शुक्ला द्वारा ब्लड बैंक का निरीक्षण नहीं किया गया। ब्लड बैंक का संचालन ड्रग एंड कास्मेटिक रूल्स, 1945 अन्तर्गत शेड्यूल एफ के प्रावधान तथा डीजीएचएस के मैन्यूअल के दिशा- निर्देशों के विपरीत किया गया। सिविल सर्जन द्वारा डोनरों के रक्त का उचित परीक्षण और रिकार्डो का संधारण नहीं किया गया। कर्तव्यों के घोर उल्लंघन के चलते सिविल सर्जन को यह नोटिस जारी की गई है। जवाब -तलब के लिए पांच दिन का समय दिया गया है, वहीं ब्लड बैंक प्रभारी डा. देवेन्द्र पटेल, लैब टेक्नीशियन रामभाई त्रिपाठी एवं नंदलाल पांडेय के खिलाफ ब्लड सेंटर में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रारम्भिक रिपोर्ट अनुसार इन तीनों कर्मियों के द्वारा ब्लड बैंक में ब्लड डोनरों का उचित रिकार्ड संधारित नहीं करना, ब्लड टेस्ट हेतु उपयोग में लाई गई किट का कम्पनी विवरण, बैच नम्बर संधारित नहीं करना, बच्चों को रक्त चढ़ाने के पूर्व ब्लड का एचआईवी या अन्य टेस्ट नहीं करना पाया गया है। तीनों कर्मियों को इन लापरवाहियों के चलते सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) अन्तर्गत निलंबन की कार्रवाई की गई है। निलंबन के दौरान डा. देवेन्द्र पटेल का मुख्यालय कार्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं जबलपुर संभाग, जबलपुर के अधीन किया गया है। वहीं रामभाई त्रिपाठी एवं नंदलाल पांडेय लैब टेक्नीशियनों को कार्यालय क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रीवा संभाग रीवा के अधीन नियत किया गया है। निलंबन के दौरान कर्मियों को जीवन निर्वाह भत्ता ही दिया जाएगा।
नाको की टीम आईसीटीसी सेंटर की आज करेगी जांच
सूत्रों ने बताया कि ब्लड बैंक एवं आईसीटीसी सेंटर की जांच करने केन्द्र से नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) की टीम शनिवार को सुबह दस बजे से जांच करेगी। शुक्रवार की देर रात जांच टीम सतना पहुंच गई है। सीएमएचओ डा. मनोज शुक्ला द्वारा नाको की टीम की जांच के चलते आईसीटीसी सेंटर, एआरटी सेंटर और एचआईवी विभाग में काम करने वाले प्रभारी एवं कर्मियों को आवश्यक रूप से कार्य स्थल में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। सभी कर्मियों की इसके अलावा साप्ताहिक अवकाश की छुटटी भी रद्द कर दी गई है।
बड़ा सवाल कै से होगा ब्लड बैंक का संचालन
मामले की जानकारी जब प्रभारी सिविल सर्जन डा. अमर सिंह से ली गई तो उन्होंने बताया कि तीन अधिकारियों एवं कर्मियों के निलंबन आदेश मिल गए हैं हालांकि जांच टीम का सहयोग करने के लिए और तथ्यों की जानकारी देने के लिए अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी थी। डा. सिंह ने बताया कि ब्लड बैंक प्रभारी और लैब टेक्नीशियन को निलंबित कर देने के कारण ब्लड बैंक का संचालन करना बड़ा परेशानियों भरा रहेगा। दोनों लैब टेक्नीशियनों के जिम्मे ही इस बडेÞ अस्पताल का ब्लड बैंक संचालित किया जा रहा था। हालांकि कहने को तो मेडिकल कॉलेज के पचासों लैब टेक्नीशियन स्टाफ काम करने के लिए जिला अस्पताल को दिया गया है लेकिन मेडिकल कॉलेज के स्टाफ द्वारा जिला अस्पताल के स्टाफ के बीच समन्वय नहीं बैठ पा रहा है। शनिवार को एमडी पैथालॉजी डा. अंकित पांडेय को ब्लड बैंक प्रभारी का प्रभार दिया जाएगा।
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