रीवा जिले के गुढ़ क्षेत्र में जंगली हाथी भरत अपनी हथनी के साथ पहुंच गया है। मोहनिया टनल के ऊपर पहाड़ी पर दोनों का मूवमेंट बना हुआ है। वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
हाथी का जोड़ा जंगल की तरफ लौटने को तैयार नहीं है। पहले मऊगंज में दहशत फैलाई। अब वह भटकते हुए रीवा जिला पहुंच गए हैं। गुढ़ सोलर पॉवर प्लांट के पास तक पहुंच गए हैं। मोहनिया टनल के ऊपर पहाड़ी पर इनका मूव्हमेंट बना हुआ है। वन विभाग की टीम मौके पर डटी हुई है। हाथी किधर जाएंगे, इस पर सभी की नजरें गड़ी हुई हैं।
जंगल से भटक कर दो जंगली हाथी पहले मऊगंज पहुंचे। मऊगंज में अलग-अलग गांव में करीब 4 दिनों तक रहे। पूरा अमला उन्हें भगाने में लगा हुआ था। चार दिन बाद हाथियों ने सीधी की तरफ रुख किया। वन विभाग ने राहत की सांस ली ही थी कि हाथियों ने रास्ता बदल दिया। सीधी का पहाड़ पार करने की जगह वह सीधे गुढ़ की तरफ रुख कर बैठे। पहाड़ के किनारे किनारे जंगल से होते हुए वह गुढ़ के तमरा दुआरी पहुंच गए। वर्तमान समय में हाथियों का जोड़ा मेहना बीट के जंगल में मौजूद है। गुढ़ पहुंचने की जैसे ही वन विभाग की टीम को सूचना मिली, वैसे ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। वन विभाग की टीम सुबह से ही मौके पर डेरा डाले हुए हैं। रात में इनके टीकर और गोविंदगढ़ की तरफ आगे बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बहेरा डाबर से सीधे गुढ़ पहुंचे
हनुमना से मऊगंज और फिर हाथियों का जोड़ा गुढ़ पहुंच गया। गुढ़ में फिलहाल हाथी डटे हुए हैं। यह रात में ही यहां पहुंच गए थे। इन हाथियों ने मोहनिया टनल के ऊपर ही डेरा जमाया हुआ है। हाथियों का जोड़ा मऊगंज से पहाड़ियों के किनारे किनारे चलते चलते यहां पहुंचा। पहाड़ में इन्हें पानी और खाना मिलता रहा और वह आगे बढ़ते गए। अब इसी पहाड़ी के सहारे वह आगे बढ़ रहे हैं।
कुछ ऐसी है इन हाथियों की कहानी
इन दो हाथियों के जोड़े में एक नर हाथी भरत भी है। इसके कॉलर आईडी लगी हुई है। भरत वैसे तो झारखंड के जंगलों में रहता था। झारखंड में इस भरत ने कई लोगों की जान ली थी। इसके बाद इसका रेस्क्यू किया गया। रेस्क्यू करने के बाद बांधवगढ़ लाया गया। बांधवगढ़ में ही इसे जंजीरों में बांध कर रखा गया। यहां उसकी दोस्ती एक हथनी से हुई। फिर दोनों एक दूसरे का साथ पाए और दुनिया नापने आगे बढ़ चले। बांधवगढ़ से भरत और उसके मादा साथी ने चलना शुरू किया। उन्होंने ब्यौहारी से होते हुए अपना सफर मैहर, पन्ना, सतना से होते हुए यूपी और फिर हनुमना तक तय किया। हनुमना से हाथियों का जोड़ा मऊगंज पहुंचा। अब गुढ़ तक पहुंच गया है। यह आगे टीकर गोविंदगढ़ या फिर चुरहट की तरफ मूव्ह कर सकते हैं। सबकी नजर इनके रात के सफर पर ही टिकी हुई है।
दिन में करते हैं आराम, रात में चलते हैं
हाथी दिन में आराम करते हैं। वन विभाग के स्टाफ की मानें तो हाथी रात में ही चलते हैं। एक रात में यह 15 से 20 किमी का सफर तय कर लेते हैं। दिन में जहां भी पेड़ पौधे और खाना मिलता है। वहीं पर रुक जाते हैं। आराम करते हैं, खाना खाते हैं। इसके बाद रात होते ही आगे बढ़ जाते हैं।

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