रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में कई डॉक्टरों को दोहरी और तिहरी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अतिरिक्त प्रभार के कारण ओपीडी, वार्डों में उपस्थिति, मरीजों का इलाज और मेडिकल शिक्षा प्रभावित होने के आरोप सामने आए हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भरमार है लेकिन कुछ चुनिंदा लोगों के सिर पर ही दोहरी, तिहरी जिम्मेदारी लाद दी गई है। इस जिम्मेदारी के बोझ तले डॉक्टर इतने दबे हुए हैं कि वह विभागों तक नहीं पहुंच पाते। ओपीडी और डिपोर्टमेंट तक में नहीं रहते। कई डॉक्टर सिर्फ ड्यूटी से बचने के लिए प्रभार लिए हैं तो कईयों को अतिरिक्त आय का चस्का लगा हुआ है। इससे सिर्फ विभागीय कार्यों पर ही असर नहीं पड़ रहा है। मरीजों के इलाज और पठन पाठन व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।
आपको बता दें कि श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस, पीजी का पाठ्यक्रम तो संचालित ही है। इसके अलावा नर्सिंग कॉलेज, पैरामेडिकल कोर्स का भी संचालन हो रहा है। इसके अलावा जितने भी विभाग हैं, सभी के कार्यों को अलग अलग डॉक्टरों को सौंप दिया है। आयुष्मान से लेकर सीएम हेल्पलाइन, क्रय शाखा, एडमिशन, छात्र शाखा, स्थापना शाखा आदि की जिम्मेदारियों और कार्यों की जिम्मेदारी डॉक्टरों को ही सौंपी गई है। वैसे तो मेडिकल कॉलेज में कई डॉक्टर मौजूद हैं लेकिन इन जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए कुछ के ही कंधे सालों से उपयोग में आ रहे हैं। यही वजह है कि लंबे समय से विभागीय और अतिरिक्त जिम्मेदारी सम्हालते सम्हालते कई चिकित्सक मरीजों की सेवा करने का काम ही भूल गए हैं। अपने मूल कार्यों से भी दूरी बना ली है। इसके कारण अस्पताल से लेकर विभाग और मेडिकल कॉलेज तक का काम प्रभावित हो रहा है। जितने भी चिकित्सक अतिरिक्त प्रभार सम्हाल रहे हैं। उनमें से अधिकांश प्रैक्टिसनर डॉक्टर है। वहीं जो नान प्रैक्टिसनर हैं, उन्हें इन सभी से दूर रखा गया है।
विभाग और ड्यूटी पर नहीं मिलते, हमेशा गायब ही रहते हैं
जिन डॉक्टरों के पास ओपीडी, आईपीडी में मरीजों की सेवा का काम है। वह कभी वार्डों में नहीं जाते। हमेशा गायब ही रहते हैं। सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने अस्पताल पहुंचते हैं और फिर नजर नहीं आते। ऐसे में जब इनकी खोनबीन की जाती है तो वह दूसरे दूसरे कार्यों और प्रभार का हवाला देकर बच जाते हैं। डॉक्टरों पर एक नहीं कई कई कार्यों की जिम्मेदारी दी गई है। इसके कारण वह जिस कार्य के लिए नियुक्त किए गए हैं, वही नहीं कर पाते।
किस डॉक्टर के पास कौन कौन से हैं अतिरिक्त प्रभार
मेडिसिन विभाग के डॉ हरिओम गुप्ता के पास स्थापना राजपत्रित का प्रभार तो हैं ही साथ ही आयुष्मान के भी नोडल हैं। इनके पास एआरटी सेंटर का भी प्रभार है। इसके अलावा कार्यकारिणी समिति के भी सदस्य हैं। इसी तरह डॉ लोकेश त्रिाठी के पास पैरामेडिकल का प्रभार है। एमडीआरयू के प्रभार के साथ ही ब्लड बैंक की भी जिम्मेदारी है। इसी तरह डॉ जगन्नाथ जाटव के पास नर्सिंग स्टाफ का प्रभार है। मरीज के रेफल की जिम्मेदारी के साथ ही पैथॉलाजी डिपार्टमेंट के भी प्रोफेसर हैं। वेदिका राठौर प्रोफसर बायोकैमेस्ट्री हैं। इसके अलावा पीजी छात्र शाखा प्रभारी भी हैं। डॉ सुनील सिंह सेंगर डर्मेटोलॉजी विभाग के डॉक्टर हैं। इनके पास सीएम हेल्पलाइन की जिम्मेदारी है। इसी तरह डॉ सौरभ पटेल शिशु रोग विभाग में पदस्थ हंै। उन्हें सीएम हेल्पलाइन दे कर रखा गया है। डॉ सुशील वर्मा ब्लड बैंक आफीसर हैं। इनके पास सीएम हेल्पलाइन की जिम्मेदारी है। इसी तरह से डॉ बालेन्द्र शेखर प्रोफेसर मेडिसिन हैं। इनके पास स्थापना राजपत्रित अधिकारी का प्रभार है।

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