रीवा जिले की खदानें बारिश के मौसम में जानलेवा बन चुकी हैं। सुरक्षा मानकों की अनदेखी और बिना फेंसिंग के गहरी खदानें अब मौत के कुएं में तब्दील हो रही हैं। खनिज विभाग की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल।

रीवा, स्टार समाचार वेब
बारिश होने के साथ ही अधिकतर स्टोन क्रेशरों में संचालन का काम बंद कर दिया गया है लेकिन जिन खदानों से पत्थर निकालने का सिलसिला अभी शुरू है वह अब जानलेवा साबित हो रहे हैं। जिले में वैध एवं अवैध तरीके से खोदी जा रही तकरीबन 2सौ खदानों में खनिज विभाग की शर्तों का पालन नहीं किया जा रहा है। ज्यादातर खदानों में फेंसिंग नहीं की गई है ऐसी स्थिति में बारिश से लबालब खदानें अब मौत के कुएं में तब्दील हो गई हैं। यहां पर यह बता दें कि इन खदानों में जहां ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के डूबने का खतरा बना रहता है, वहीं बेजुबान जानवर भी घूमते फिरते पानी से लबालब खदानों में गिर सकते हैं। ऐसी स्थिति में खदान संचालक नियमों को ताक पर रखकर खदानों से पत्थर निकालने का कार्य कर रहे हैं। खास बात यह है कि खनिज अधिकारियों को इस बात की जानकारी भी है लिहाजा वह कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
खदानों को पाटकर पेड़ लगाने का है नियम
स्टोन क्रेशर के लिए लीज पर ली गई खदानें जिनसे बोल्डर निकालकर स्टोन क्रेशर में लाए जाते हैं उन खदानों को स्वीकृत घनमीटर से ज्यादा गहरा किया गया है। यह कोई एक खदान का मामला नहीं है जांच की जाए तो एक सैकड़ा से ज्यादा ऐसी खदानें मिलेंगी जिन पर स्वीकृत लीज एवं घन मीटर से ज्यादा पर उत्खनन का कार्य किया गया है। शासन द्वारा जो गाइड लाइन है उसमें स्पष्ट किया गया है कि जिन खदानों से बोल्डर निकालने का काम बंद किया जा चुका है और वह गहरी हो गई हैं उनको लीजधारक पाटकर उनमें वृक्षारोपण करें। यहां पर यह बता दें कि गत वर्ष दिखावे के लिए कई खदानों में खनिज विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में संचालकों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया है परंतु जो पेड़ लगाए गए वह अब गायब हो गए हैं। इतना ही नहीं कई खदानें ऐसी हैं जो मौत के कुओं में तब्दील हो गई हैं। आने वाले समय में किसी भी तरह की अनहोनी होने का अंदेशा है।

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