आरटीआई जवाब में स्पष्ट हुआ कि सार्थक ऐप के नियम नियमित कर्मचारियों तक सीमित हैं। बावजूद इसके एनएचएम संविदाकर्मियों पर ऐप अटेंडेंस का दबाव बना हुआ है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली, मानदेय विवाद और प्रशासनिक सख्ती पर बहस तेज हो गई।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और स्वास्थ्य विभाग में लागू किए जा रहे सार्थक ऐप को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी में अहम तथ्य सामने आए हैं। आवेदनकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में स्पष्ट किया गया है कि 31 अगस्त 2025 को जारी निर्देश के अनुसार सार्थक एप के नियम शासकीय चिकित्सकों और कर्मचारियों के लिए हैं, संविदा चिकित्सकों पर ये नियम लागू नहीं होते। बताया गया कि आरटीआई आवेदन में आवेदक ने एनएचएम से संबंधित आदेश, दिशा-निर्देश और विशेष रूप से संविदा चिकित्सकों पर इसके प्रभाव को लेकर जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में संचालनालय, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, मध्यप्रदेश द्वारा पत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट की गई। आरटीआई में बताया गया कि आवेदक द्वारा पूर्व में 6 सितंबर 2025 को जानकारी मांगी गई थी, लेकिन समय पर जवाब नहीं मिला। बाद में दिए गए उत्तर में बिंदुवार जानकारी उपलब्ध कराई गई।
इधर एनएचएम संविदा कर्मियों पर सख्ती
बताया गया कि फरवरी 2025 में एनएचएम की एमडी सलोनी सिडाना ने एनएचएम अंतर्गत कार्यरत सभी संविदाकर्मियों को सार्थक से जोड़ने के आदेश दिए थे। उन्होंने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थाओं और आयुषमान आरोग्य मंदिरों में कार्य करने वाले स्टाफ का रजिस्ट्रेशन सार्थक एप में करना अनिवार्य है। एनएचएम संविदा कर्मियों पर सख्ती से सार्थक ऐप में अटेंडेंस लगाने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इस खुलासे के बाद संविदाकर्मी भी अपने हक के लिए गोहार लगा सकते हैं।
मानदेय पर विवाद, 11 को बैठक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत संविदा अधिकारियों और कर्मचारियों के मानदेय में विसंगतियों को दूर करने के लिए राज्य स्तर पर पहल तेज हो गई है। इस संबंध में गठित समिति की अहम बैठक 11 मई को आयोजित की जाएगी। एनएचएम द्वारा संविदा कर्मचारियों के मानदेय में आ रही विसंगतियों के निराकरण के लिए समिति का गठन किया गया है। इसी क्रम में शेष बिंदुओं पर चर्चा के लिए 11 मई को शाम 4 बजे एनएचएम कार्यालय भोपाल में बैठक बुलाई गई है। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसमें प्रमुख रूप से वित्त और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे, साथ ही एनएचएम से जुड़े कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया है।
उप संचालक (आईटी) ने दिए जवाब
सार्थक ऐप संबंधी दिशा-निर्देश केवल नियमित (शासकीय) चिकित्सकों और कर्मचारियों के लिए हैं। संविदा चिकित्सकों को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है, इसलिए उन पर यह अनिवार्यता लागू नहीं होती। यदि संविदा कर्मियों के लिए अलग से कोई दिशा-निर्देश हैं, तो वे एनएचएम से संबंधित होंगे। यह जानकारी उप संचालक (आईटी) डॉ. योगेश सिंह कौरव द्वारा 20 जनवरी 2026 को डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी की गई।
मैदान में चल रही सख्ती पर उठेंगे सवाल
इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग में लागू सख्ती, खासकर संविदा चिकित्सकों पर की जा रही कार्रवाई और दबाव को लेकर सवाल उठ सकते हैं। क्योंकि जमीनी स्तर पर कई जगह संविदा कर्मचारियों से भी सार्थक ऐप के पालन की अपेक्षा की जा रही थी। अब आरटीआई के इस जवाब के बाद स्पष्टता आने के साथ ही विभागीय कार्यप्रणाली पर बहस तेज होने की संभावना है।
अब ऐप बताएगा डॉक्टर ड्यूटी पर हैं या नहीं
अब आयुष अस्पताल एवं औषधालयों में चिकित्सकों की लेटलतीफी व अनुपस्थिति नहीं चलेगी। कर्मचारियों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए आयुष विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बताया जाता है कि उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयुष चिकित्सा सुविधाओं के संचालन को बेहतर बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए।
जिले में पदस्थ आयुष चिकित्सकों (शासकीय, संविदा और एनआरएचएम) की उपस्थिति अब सार्थक ऐप के माध्यम से सुनिश्चित की जाएगी। निर्देश में आयुर्वेद, यूनानी एवं होम्योपैथी के कर्मचारी भी शामिल किए गए हैं जिन्हे आॅनलाइन उपस्थिति दर्ज करनी होगी।
सेवाओं का मिल सकेगा बेहतर लाभ
बताया जाता है कि एप से हाजरी लगने की व्यवस्था से चिकित्सकों की समयबद्ध उपस्थिति से सुदूर अंचलों सहित शहरों में सेवाएं मजबूत होंगी और आमजन को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभआसानी से मिलेगा। विभागीय संस्थाओं में अधिकतम उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जिला आयुष अधिकारियों, प्रधानाचार्यों और अधीक्षकों को निगरानी व दर्जीकरण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि रोगियों को समय पर उपचार मिल सके।


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