सतना-मैहर में पंचायतों की लापरवाही से 750 छात्रों की समग्र आईडी नहीं बनी, सरकारी योजनाओं का लाभ अटका, शिक्षा विभाग परेशान।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सरकारी सिस्टम में लापरवाही और मनमानी इस कदर हावी है कि सब कुछ मन मुताबिक चला जा रहा है। जनता के किन्तु-परन्तु से इस सिस्टम को जैसे कोई मतलब ही नहीं है। मामला थोड़ा तकनीकी है लेकिन इससे नुकसान आम जन का ही हो रहा है। बात ऐसी है कि पहले पंचायत ने समग्र आईडी नहीं बनाई दूसरा बिना समग्र आई डी के विद्यालयों ने दाखिला दे दिया। अब जब हितग्राही मूलक योजनाओं की बारी आई तो विद्यालय से लेकर शिक्षा विभाग के जिले के जिम्मेदार तक हक्के-बक्के हैं।
दोनों जिलों के साढ़े सात सौ विद्यार्थियों के पढ़ाई का सत्र समाप्ति की ओर है लेकिन उनकी समग्र आई डी नहीं तैयार हो सकी है। यही नहीं पात्र विद्यार्थियों को तमाम तरह की योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल सका है। इस बात को लेकर विभागीय जिम्मेदारों को अब पसीना आने लगा है कि सत्र समाप्ति के बाद हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ कैसे मिल पाएगा। बड़ी बात तो यह है कि समग्र आई डी बनाने का काम पंचायतों का है लेकिन उनकी मनमानी शिक्षा विभाग के लिए सिरदर्द बनी हुई है। इसमें केवल कक्षा एक में नवप्रवेश पाने वाले विद्यार्थी शामिल हैं।
सबसे ज्यादा सतना के विद्यार्थी
जानकारी के मुताबिक सतना जिले के करीब 4 सौ और मैहर जिले के करीब साढ़े तीन सौ विद्यार्थियों को बिना समग्र आईडी के दाखिला दिया गया था। यह दाखिला अनिवार्य देने की शर्त के कारण दिया गया था। जबकि पंचायतों को अब तक समग्र आई डी बना देना चाहिए था लेकिन उन्होने यह काम नहीं किया। इस कारण इन विद्यार्थियों को पात्रता अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ब्लाकों में मझगवां के वंचित
दोनों जिलों के आठों में ब्लाक में सर्वाधिक प्रभावित मझगवां है। यहां के 173 विद्यार्थियों की समग्र आईडी नहीं है जिसके चलते हितग्राही मूलक योजना लाभ नहीं मिल पा रहा हे। इसी क्रम में मैहर ब्लाक के 171, नागौद के 128, सोहावल के 101, अमरपाटन के 85, रामनगर के 72, उचेहरा के 61 और रामपुर बाघेलान के 38 विद्यार्थी शामिल हैं जो पंचायत के मनमानियों का शिकार हैं।
जन्म प्रमाण पत्र ने फंसाई पेंच
असल में समग्र आई डी के मामले में जितनी दोषी पंचायतें हैं उतने ही दोषी प्रभावित विद्यार्थियों के अभिभावक भी हैं। इन विद्यार्थियों के अभिभावकों ने जन्म प्रमाण पत्र नहीं बनवाया है लेकिन नियमानुसार दाखिला बिना दस्तावेज के दे दिया गया। अब जब हितग्राही मूलक योजनाओं की बारी आई तब भी अभिभावक तैयार नहीं। यही कारण है कि जन्म प्रमाण पत्र न होने के कारणइन विद्यार्थियों का आधार नहीं बना और बिना आधार समग्र आईडी जनरेट नहीं हुई।
हां, इस तरह की समस्या है। जिसके लिए सभी संस्थाओं के लिए पत्राचार किया गया है। कुछ के तो बनाए जा चुके हैं। इसके लिए पुन: समीक्षा करूंगा।
विष्णु कुमार त्रिपाठी, डीपीसी


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