सतना जिला कांग्रेस को 30 जुलाई से पहले नया जिलाध्यक्ष मिल सकता है। पीसीसी व एआईसीसी के पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट के आधार पर तीन नामों पर मंथन जारी है। शहर व ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए जातीय संतुलन भी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

कांग्रेस के पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर मंथन जारी, अब राजधानी की ओर दावेदारों की टकटकी
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण व शहर को नया जिला अध्यक्ष जल्द मिल सकता है। पार्टी सूत्रों की मानें तो 30 जुलाई के पहले जिला अध्यक्षों के नामों की घोषणा होने के आसार हैं। इसके लिए लिए दिल्ली में पीसीसी- एआईसीसी के पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर मंथन भी हो चुका है। माना जा रहा है कि इस मंथन से निकले तीन नामों में से एक नाम का चयन किया जाएगा। गौरतलब है कि एआईसीसी व पीसीसी के पर्यवेक्षकों ने संगठन सृजन अभियान के तहत जिला अध्यक्षों के 6-6 नामों का पैनल सौंपा है। इनमें से कॉमन तीन नामों का अंतिम पैनल बनाकर उनमें से एक नाम निकाला जाएगा। बताया जाता है कि पीसीसी के पर्यवेक्षकों ने बीते दिनों अपनी रिपोर्ट पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी व एआईसीसी के पर्यवेक्षक ने अपनी रिपोर्ट पार्टी के राष्टÑीय महासचिव के सी. वेणुगोपालन को सौंपी थी। सतना में एआईसीसी के पर्यवेक्षक 6 दिनों तक दो दौर की रायशुमारी जिला अध्यक्ष के लिए की थी। एक बार वे 17 को दूसरी बार 22 मई को सतना आए थे।
वर्तमान अध्यक्ष अब भी नहीं मान रहे
एआईसीसी व पीसीसी के पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में 6-6 दावेदारों के नाम भले ही दे दिए हों लेकिन जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण व शहर के वर्तमान जिला अध्यक्ष क्रमश: दिलीप मिश्रा व मकसूद अहमद अब भी हार मानने को तैयार नहीं हैं और इस जुगाड़ में लगातार भागदौड़ करने जुटे हैं कि शायद उन्हें एक और मौका मिल जाए।
ग्रामीण : क्षत्रिय या ब्राम्हण!
विशुद्ध जातीय समीकरण के हिसाब से चलने वाले विंध्य में पद चयन के दौरान यदि जातीय समीकरण साधा गया तो कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के जिला अध्यक्षी का ताज किसी क्षत्रिय या ब्राम्हण के सिर पर सज सकता है। वर्तमान में ब्राम्हण वर्ग से दिलीप मिश्रा अध्यक्ष हैं। पार्टी यदि इन्हें हटाकर किसी ब्राम्हण को अध्यक्ष बनाने पर विचार करती है तो एक बड़ा नाम पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र मिश्रा गोलहटा का हो सकता है। यदि क्षत्रिय के नाम पर विचार करती है तो पार्टी प्रदेश सचिव राजभान सिंह, पूर्व मंत्री डायरेक्टर गजेन्द्र सिंह परसवारा एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष कमलेन्द्र सिंह कमलू में से कोई एक बाजी मार सकता है। चुनाव के दौरान जिले की पांच विधानसभा सीटों में से कांग्रेस एक भी क्षत्रिय नेता को विधानसभा का टिकट नहीं दे सकी थी जबकि भाजपा ने तीन नेताओं को टिकट दी और वे तीनों विधायक हैं। ऐसे में क्षत्रिय वोटबैंक को साधने अध्यक्ष पद यदि क्षत्रिय वर्ग के दावेदार को सौंपा जाता है तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। जिला अध्यक्ष बनने के दो अहम दावेदार पूर्व विधायक कल्पना वर्मा और प्रदेश सचिव अजीत सिंह कोटर भी हैं। पर माना जा रहा है कि कल्पना को पार्टी ने विधानसभा का टिकट दिया था इसलिए शायद ही पार्टी उनके नाम पर विचार करे, जबकि दूसरे मजबूत दावेदार अजीत सिंह पटेल का नुकसान पार्टी के इकलौते विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा और नागौद विस से पार्टी की प्रत्याशी रही रश्मि सिंह की वजह से हो सकता है। ओबीसी वर्ग से आने वाले अजीत इसलिए पीछे रह सकते हैं कि पार्टी ने सतना से ओबीसी विभाग का प्रदेश अध्यक्ष दिया, युकां का प्रदेश उपाध्यक्ष भी सतना से ही है और विधानसभा में इसी वर्ग से दो प्रत्याशी भी उतारे। बहरहाल ताज किसके सिर में सजता है, यह तो वक्त के गर्भ में है लेकिन अध्यक्षी के लिए बीते कई दिनों से पसीना बहा रहे दावेदारों की टकटकी अब राजधानी दिल्ली की ओर लगी हुई है।
शहर : मुस्लिम या ब्राम्हण!
जिले का मुस्लिम मतदाता हमेशा ही कांग्रेस के साथ रहा है। मुस्लिम मतदाताओं के साथ जिले के बड़े मतदाता वर्ग को भी साधना कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में पार्टी यदि ग्रामीण जिला अध्यक्ष किसी ब्राम्हण को नहीं बनाती तो शहर में वह यह दांव खेल सकती है। बहरहाल शहर कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर किसी ब्राम्हण या मुस्लिम की ताजपोशी हो सकती है। इस कुर्सी पर फिलहाल मकसूद अहमद विराजमान हैं। माना जा रहा है कि शहर में मुस्लिम मतदाताओं की आबादी ज्यादा होने और इस वर्ग के हमेशा कांग्रेस के साथ खड़े रहने की प्रवृत्ति को देखते हुए पार्टी एक बार फिर से शहर अध्यक्ष के रूप में किसी मुस्लिम नेता की ताजपोशी कर सकती है। मुस्लिम वर्ग से आसिफ सिद्दीकी का नाम दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है।
पीसीसी पर्यवेक्षकों ने दी ये रिपोर्ट
इन नामों की चर्चा
ग्रामीण अध्यक्ष
शहर अध्यक्ष

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