सतना जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में गंभीर कमी, केवल 8 यूनिट शेष, मरीजों के लिए निजी अस्पताल से ब्लड मंगवाना पड़ा।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
वर्ष 1996 में जिला अस्पताल को ब्लड बैंक की सौगात मिली थी, तब से लेकर आज तक इस ब्लड बैंक ने कई मरीजों को नया जीवन दान दिया है। लेकिन संचालन में गड़बड़ी के चलते आज इस ब्लड बैंक के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। रोजाना ब्लड बैंक से ब्लड का स्टॉक निल होता जा रहा है। शुक्रवार को रात 8 बजे की स्थिति में केवल 8 यूनिट ब्लड स्टॉक में था। जिसे देखते हुए बिड़ला अस्पताल से ब्लड मंगाना पड़ा। ब्लड बैंक के तीन दशक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब जिला अस्पताल को किसी निजी अस्पताल से ब्लड मंगाना पड़ा है।
परेशान होते रहे मरीज
शुक्रवार को जिला अस्पताल के वार्डों में भर्ती करीब 20 गंभीर मरीजों के परिजन ब्लड फॉर्म लेकर ब्लड बैंक के बाहर खड़े नजर आए, लेकिन स्टॉक की संख्या में कोई बढ़त दर्ज नहीं की गई। यहां तक कि थैलीसीमिया और गर्भवती मरीज के परिजन भी लाइन में खड़े परेशान दिखे। कई मरीज ऐसे थे जो साथ में डोनर लेकर भी पहुंचे थे।
आगे नहीं आ रहे डोनर
यहां तक कि ब्लड डोनेट करने रक्तदाता भी आगे नहीं आ रहा है। रक्तदाता भी रक्तदान करने से परहेज कर रहे हैं। उन्हें यह डर है कि कहीं हमारे साथ भी कोई बड़ी घटना घटित न हो जाए। हालांकि इस मुसीबत की संकट में ब्लड बैंक के स्टाफ फ्रंट वर्कर के रूप में आगे आये हैं। रोजाना ब्लड बैंक के स्टाफ द्वारा ब्लड डोनेट किया जा रहा है जो किसी गंभीर मरीज को उपलब्ध कराया जा रहा है। गौरतलब है कि चार बच्चों में संक्रमित खून चढाने के मामले के बाद ब्लड बैंक सुर्खियों में आया था। ब्लड बैंक के तीन स्टाफ को निलंबित भी किया गया था। इसके बाद से ब्लड डोनरों को ट्रेस करने की कार्रवाई शुरू की गई थी लेकिन अभी तक संक्रमित बोल्ड डोनर अभी तक नहीं मिला है।
गर्भवती के लिए निजी अस्पताल से आया खून
ब्लड बैंक के हालात रोजाना बद से बदतर होते जा रहे हैं। जिला अस्पताल में शुक्रवार को एक गंभीर मरीज को ब्लड चढाने के लिए सिविल सर्जन को हस्तक्षेप करना पड़ा। सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि दोपहर में गर्भवती महिला की तबियत ज्यादा बिगड़ गई थी उसे तत्काल में एबी पॉजिटिव ब्लड की जरूरत थी, लेकिन जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में इस ग्रुप का स्टॉक निल था। ऐसी स्थिति में बिड़ला अस्पताल के संचालक से बात करके एबी पॉजिटिव ब्लड मरीज को मुहैया कराया गया।
ब्लड बैंक प्रभारी ने किया रक्तदान
बताया गया कि दोपहर में एक समय ब्लड बैंक से बी पॉजिटिव ब्लड पूर्ण रूप से खत्म हो गया था जबकि मरीज को इस ब्लड की आवश्यकता थी। ऐसी स्थिति में ब्लड बैंक की प्रभारी डॉ. अंकिता पांडेय द्वारा बी पॉजिटिव ब्लड डोनेट किया गया। हालांकि ब्लड की अभी टेस्टिंग और फिल्टर किया जायेगा उसके बाद ही किसी मरीज को दिया जायेगा।
बच्ची थैलीसीमिया से पीड़ित है, उसे ए पॉजिटिव ब्लड की जरूरत है। लेकिन सुबह से यह ब्लड स्टॉक में नहीं है। बीते 10 साल से बच्ची को यहाँ से नि:शुल्क ब्लड उपलब्ध कराया जा रहा है।
ममता
एबी पॉजिटिव ब्लड की जरूरत है, जो कि स्टॉक में नहीं है। डोनर भी लेकर आया हूं लेकिन डोनर का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव है। ऐसे में अब दूसरा डोनर अरेंज करना पड़ेगा।
शुभम विश्वकर्मा, घूरडांग
बच्ची की तबियत बिगत रात से खराब है। उसे भर्ती करना पड़ा है। चिकित्सकों ने ब्लड की कमी बताई है लेकिन यहां ब्लड ही नहीं उपलब्ध है।
राजा कोल, मानिकपुर
ये सच है कि इस समय ब्लड बैंक संकट के दौर से गुजर रहा है। गंभीर मरीजों को नया जीवन दान देने ब्लड बैंक के स्टाफ द्वारा रक्तदान किया जा रहा है। संकट के इस दौर में जिले के रक्तवीरों को आगे आकर रक्तदान करना होगा ताकि मरीजों की जान बचाई जा सके।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

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