सतना में लगातार अग्नि हादसों के बावजूद होटल, अस्पताल और व्यावसायिक संस्थान फायर एनओसी व सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं ले रहे। प्रशासन के संसाधन मौजूद हैं, लेकिन लापरवाही बड़े हादसे की आशंका बढ़ा रही।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
लगातार हो रहे अग्नि हादसे के बाद भी लोग सबक लेने के लिए तैयार नहीं हैं। पिछले पांच माह में ही शहरीय क्षेत्र में आठ से ज्यादा अग्नि हादसे हो चुके हैं। इसके बावजूद फायर एनओसी के प्रति लोग गंभीर नहीं हैं। अभी हाल में दिल्ली के एक होटल और मुजफ्फरपुर के एक अस्पताल में लगी आग के बाद यह सवाल उठ रहा है कि सतना शहर ऐसी अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने में कितना तैयार है? यहां प्रशासनिक व्यवस्थाएं तो हैं, पर लोग और संस्थान अपनी तरफ से सुरक्षा इंतजामों को लेकर पूरी तरह से लापरवाह बने हुए हैं। वे अपने संस्थाओं में अग्नि दुर्घटनाओं से निपटने के इंतजाम करने व फायर एनओसी लेने के प्रति कतई गंभीर नहीं हैं। इसके पीछे कई कारण हैं। बहरहाल कारण जो भी हो पर शहर के होटलों, अस्पताल व नर्सिंग होम, टाल के जो हालात हैं उनके चलते शहर बारूद की ढेर पर है और यहां कभी भी गंभीर अग्नि हादसे हो सकते हैं।
यह भी समस्या
नगर निगम के साथ यह भी एक समस्या है कि फायर कंसल्टेंटों ने किन-किन संस्थानों की जांच की है या नहीं, इसकी कोई आॅडिट रिपोर्ट नगर निगम को नहीं देते हैं जिससे भी समस्या खड़ी होती है।
पचास बेड से ऊपर तो फायर एनओसी अनिवार्य
फायर एनओसी किसके लिए आवश्यक है, किसके लिए नहीं, यदि इसकी बात की जाए तो 50 बेड से ऊपर के अस्पताल हों या होटल, दोनों पर यह नियम लागू होता है। ऐसे में अस्पताल और होटल दोनों में यदि 50 बेड से ज्यादा हैं तो फायर एनओसी अनिवार्य है। यदि इससे कम हैं तो फायर सेफ्टी आॅडिट भर करवानी होती है। यह फायर आॅडिट फायर कंसल्टेंट करता है, वह यह देखता हे कि फायर एक्यूपमेंट लगे हैं, यदि लगे हैं तो क्या वे ठीक ढंग से काम करते हैं या नहीं।
आग से निपटने के पर्याप्त संसाधन
शहर में कितनी ऊंची बिल्डिंग
आखिर क्यों नहीं लेते फायर एनओसी

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