सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए चल रहे एचपीवी टीकाकरण अभियान में सतना जिले की रफ्तार धीमी है। 24 हजार से अधिक लक्ष्य के मुकाबले 13 दिनों में सिर्फ 854 किशोरियों को ही वैक्सीन लग सकी।
By: Yogesh Patel
Mar 13, 20264:07 PM
हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
14 से 15 साल के बीच की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाने एचपीवी (हृयूमन पैपीलोमा वायरस) वैक्सीन लगाने की रफ्तार सतना में सुस्त दिखाई दे रही है। फील्ड वर्कर किशोरियों को टीका लगवाने रुचि नहीं दिखा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में सतना जिला 45वें पायदान पर है। जिले में 24 हजार 184 किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान के तहत बीते 13 दिनों में 854 किशोरियों को ही एचपीवी वैक्सीन लगाया गया है। यह प्रगति बताती है कि जिले में वैक्सीन की रफ्तार लक्ष्य से कम है। ऐसे में 3 माह में इस लक्ष्य को कैसे पूरा किया जाएगा?
रेडी रेकनर के हिसाब से होगा टीकाकरण
जिला अस्पताल के टीकाकरण कक्ष में किशोरियों के टीकाकरण के लिए रेडी रेकनर टेबिल बनाई गई है। 13 मार्च 2026 को उसी किशोरी का वैक्सीनेशन होगा जो 13 दिसम्बर 2010 से 12 मार्च 2012 के बीच पैदा हुई होगी। इसी प्रकार अगर अन्य तारीखों के लिए रेडी रेकनर लिस्ट बनाई गई है। अगर बच्ची 14 साल के नीचे रहती है तो उसे कुछ दिन बाद टीका लगाने की सलाह दी जाती है।
आशाएं नहीं कर रहीं प्रोत्साहित
वैक्सीनेशन की रफ्तार के लिए सीएचओ और आशाओं को जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक आशा को 5 किशोरियों को रोजाना टीकाकरण केन्द्र ले जाने के निर्देश हैं। जबकि सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी) को लाइन लिस्ट बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। शहरी क्षेत्र में आशाओं द्वारा वैक्सीनेशन के प्रति रुचि नहीं दिखाई जा रही है जबकि ब्लाकों में औसतन वैक्सीनेशन हो रहा है। जिम्मेदारों द्वारा आशाओं को रोजाना मोबालाइजेशन के निर्देश जारी किए जाने चाहिए।
आमने-सामने: डॉ. सुचित्रा अग्रवाल, जिला टीकाकरण अधिकारी
सवाल: क्या है यह वैक्सीन
जवाब: 14 से 15 साल की किशोरियों को गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल कैंसर) से बचाने के लिए एचपीवी (हृयूमन पैपीलोमा वायरस) वैक्सीन लगाई जा रही है। जिले में जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल एवं सीएचसी में यह नि:शुल्क उपलब्ध है। बाजार में इसकी कीमत 4 हजार रुपए है। 28 फरवरी से अभियान की शुरूआत हुई है।
सवाल: क्या है सर्वाइकल कैंसर
जवाब: महिलाओं में होने वाला यह दूसरा सबसे आम कैंसर है, लगभग 99.7 फीसदी सर्वाइकल कैंसर मामले का कारण हृयूमन पैपीलोमा वायरस होता है। लम्बे समय तक अगर यह वायरस शरीर में बना रहता है तो सर्वाइकल कैंसर के चांस बढ़ जाते हैं। मई 2015 तक 147 देश ने अपनी राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रमों में एचपीवी वैक्सीन को शामिल किया है।
सवाल: क्या यह सुरक्षित है
जवाब: जी हां, यह बिल्कुल सुरक्षित है, इस वैक्सीन को लाइसेंस मिलने के बाद से निगरानी में रखा गया है। अब तक कोई गंभीर समस्या सामने नहीं आई है।
सवाल: क्या यह महंगी है?
जवाब: हां, एचपीवी वैक्सीन महंगी है, वर्तमान में निजी बाजार में एक डोज की कीमत लगभग 4 हजार रुपए है, किशोरियों को सिंगल डोज दिया जा रहा है जो कि ताउम्र तक सर्वाइकल कैंसर से बचाएगा। वैक्सीन बर्बाद न हो इसके लिए सिंगल डोज ब्वायल उपलब्ध है।
सवाल: क्या है रणनीति?
जवाब: एचपीवी वैक्सीनेशन के लिए चिन्हित स्वास्थ्य केन्द्रों में 3 महीने अभियान के रूप में आयोजित किया जा रहा है। जिले के बीपीएम, एएनएम, आशा और सीएचओ को जागरुकता अभियान, लाइन लिस्टिंग एवं अभिभावकों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिन चिन्हित स्वास्थ्य केन्द्रों में कोल्ड चेन की सुविधा उपलब्ध है वहां वैक्सीन का स्टाक रखवाया गया है। किशोरियों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित करने मेरे द्वारा हास्टल, छात्रावास एवं स्कूलों का भ्रमण भी किया जा रहा है। भ्रमण के दौरान किशोरियों को वैक्सीन से संंबंधित सभी जानकारियां दी जा रही हैं।