सतना में एलपीजी गैस की अनियमित सप्लाई से लोग परेशान हैं। दो दिन पुरानी बुकिंग पर ही सिलेंडर मिल रहा है, जिससे घरों, अस्पतालों और दुकानों में चूल्हे जलाने की नौबत आ गई।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर और गांवों में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर की अनियमित सप्लाई ने लोगों की रसोई का संतुलन बिगाड़ दिया है। गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ बढ़ रही है और बुकिंग के बाद भी समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। हालात यह हैं कि कई घरों में गैस खत्म होने के बाद लोग मजबूरी में फिर से पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं।
सुबह करीब साढ़े नौ बजे शहर की एक गैस एजेंसी के बाहर करीब 30 से अधिक लोग खाली सिलेंडर लेकर खड़े थे। कुछ लोग तीन दिन से सिलेंडर का इंतजार कर रहे थे तो कुछ को एक सप्ताह से ज्यादा हो गया था। एजेंसी के बाहर खड़े उपभोक्ताओं की चिंता साफ दिखाई दे रही थी, क्योंकि घरों में रसोई का काम प्रभावित होने लगा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसियों ने वितरण का समय भी बदल दिया है। जहां पहले एजेंसियां सुबह ही खुल जाती थीं, वहीं अब सिलेंडर वितरण सुबह 10 बजे के बाद शुरू किया जा रहा है।
इसके साथ ही कई जगह एजेंसी कर्मचारी उपभोक्ताओं से कह रहे हैं कि जिन लोगों की बुकिंग दो दिन पहले हुई है, वही सिलेंडर लेने आएं। इससे कई लोगों को बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। स्थानीय निवासी रामकुमार पटेल बताते हैं कि उन्होंने चार दिन पहले गैस बुक कराई थी, लेकिन अभी तक सिलेंडर नहीं मिला। उनका कहना है कि पहले बुकिंग के एक-दो दिन के भीतर डिलीवरी हो जाती थी, लेकिन अब कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। महिलाओं के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल बन गई है। शहर के ही एक मोहल्ले की गृहिणी संगीता मिश्रा बताती हैं कि गैस खत्म होने के बाद उन्हें पड़ोसियों से मदद लेनी पड़ी। वह कहती हैं कि दो दिन तक हमने लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया, क्योंकि नया सिलेंडर नहीं मिला।
वैकल्पिक ईधन सहारा
गैस की किल्लत का असर छोटे कारोबारों पर भी दिखाई दे रहा है। शहर के कई होटल, ढाबे और चाय दुकानों में कमर्शियल सिलेंडर की कमी महसूस की जा रही है। कुछ संचालकों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उन्हें वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ेगा।
अनियमित सप्लाई वजह
गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि सप्लाई में अनियमितता के कारण डिलीवरी प्रभावित हो रही है। जैसे ही पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर उपलब्ध होंगे, स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल उपभोक्ताओं को गैस के लिए इंतजार करना पड़ रहा है और लोग जल्द राहत मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
गांव में जला चूल्हा
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर बताई जा रही है। कई गांवों में गैस की सप्लाई देर से पहुंच रही है, जिससे लोग फिर से लकड़ी और उपलों पर खाना बनाने को मजबूर हैं। इससे धुआं और प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है और महिलाओं के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
समस्या ऐसी-ऐसी
केस-01: कोटर में गैस वितरण को लेकर स्थिति गंभीर हो गई। संभालने के लिए पुलिस तैनात करने पड़ी। परेशान उपभोक्ताओं ने कहा कि गैस सिलेंडर 10 दिन बाद आए हैं।
केस-02: बिरसिंहपुर के हालात कमोवेश कोटर जैसे ही थे। एजेंसी पहुंचे लोग अराजक हो गए। इस स्थिति को संभालने पुलिस बुलानी पड़ी। जैसे तैसे काम बना।
फैक्ट फाइल
(आंकड़े 15 मार्च के)
जिला अस्पताल में चूल्हे पर बन रहा मरीजों का भोजन
शहर में घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत अब आम घरों से निकलकर सरकारी संस्थानों तक पहुंच गई है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय की रसोई में भर्ती मरीजों का भोजन अब गैस पर नहीं, बल्कि लकड़ी के चूल्हे पर पकाया जा रहा है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि उस स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनशीलता को भी कठघरे में खड़ा करती है, जो खुद को मरीजों की सेवा का सबसे बड़ा केंद्र बताता है। अस्पताल की रसोई में रोजाना तीन सैकड़ा से अधिक मरीजों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। सामान्य दिनों में यह भोजन गैस सिलेंडरों के सहारे समय पर बन जाता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस आपूर्ति बाधित होने के कारण रसोई का पूरा सिस्टम लड़खड़ा गया है। जिला अस्पताल के रसोइया धीरज मिश्रा ने बताया कि रसोई में गैस सिलेंडर खत्म हो जाने के बाद नए सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। मजबूरन कर्मचारियों ने अस्थायी चूल्हा बनाकर लकड़ियां जलाकर खाना बनाना शुरू किया है। लकड़ी के चूल्हे पर भोजन पकाने की प्रक्रिया धीमी होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हो रही है, जो पहले ही बीमारी और दर्द से जूझ रहे हैं। कई बार भोजन तैयार होने में ज्यादा समय लग जाता है, जिससे मरीजों को देर तक इंतजार करना पड़ता है।


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