सतना नगर निगम परिषद की बैठक में धवारी क्रिकेट स्टेडियम के नामकरण पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे। 23 सूत्रीय एजेंडे के बीच सीवर, सड़क, जाम, प्रकाश और पेयजल की समस्याओं पर ठोस फैसलों की जरूरत बनी रही।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर की सड़कें सीवर परियोजना की खुदाई और अधूरे निर्माण से बेहाल हैं। जाम रोजमर्रा की मुसीबत है, कई मार्ग गड्ढों में तब्दील हैं और अनेक बस्तियों की गलियां रात में अंधेरे में डूबी रहती हैं। ऐसे में नगर निगम परिषद की सामान्य सभा में विकास के सवालों से ज्यादा नामकरण पर गर्मागर्मी दिखी। बुधवार को दोपहर 12 बजे से शाम 5.50 बजे तक चली बैठक में धवारी क्रिकेट स्टेडियम के नामकरण पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहे। सीवर, सड़क, जाम, प्रकाश और पेयजल जैसे बुनियादी मुद्दे राजनीतिक शोर के बीच पीछे छूटते नजर आए। महापौर योगेश ताम्रकार, नगर निगम अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी पालन, निगमायुक्त डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा , पार्षदों, एल्डरमैन और अधिकारियों की मौजूदगी में 23 सूत्रीय एजेंडे पर चर्चा हुई। विकास और निगम के राजस्व से जुड़े विषयों के बावजूद नामकरण की बहस बैठक का केंद्र बनी रही।
विषयसूची में था रेमकी से लेकर मेमा बैठकी तक के मुद्दे
23 सूत्रीय एजेंडे में राधापुरम मार्ग, पुराने पावर हाउस चौक का नाम श्री हुकुमचंद जैन चौक करने, अटल नगर पतेरी के सामुदायिक भवन का नाम स्व. शंकरलाल तिवारी के नाम पर रखने, सहस्त्रबाहु महाराज चौक, परशुराम सरोवर और नरसिंह सरोवर सहित कई नामकरण प्रस्ताव शामिल थे। महदेवा धवारी की गली नंबर चार का नाम श्री रामप्रताप सिंह मार्ग, सिंधी कैंप गेट से गेलानी हार्डवेयर तक का मार्ग श्री रामानंद सिंह मार्ग, राजेंद्र नगर का प्रवेश द्वार चंद्रशेखर आजाद द्वार और टपरिया बस्ती का नाम भगवान बिरसा मुंडा बस्ती करने के प्रस्ताव भी रखे गए। शहर के 11 तालाबों के आधिकारिक नामकरण पर भी विचार प्रस्तावित था। इसके अलावा व्यवसायों के लाइसेंस शुल्क में वृद्धि, सिंधी कैंप सब्जी मंडी की दुकानों का पुन: आवंटन, मकर संक्रांति और दीपावली मेलों में बैठकी शुल्क, विद्यासागर यानी पुष्कर्णी पार्क का पांच वर्ष तक विकास व संचालन, 20 नए विज्ञापन गेंट्री लगाने, रेउरा में आवारा पशु आश्रय स्थल तथा नमो हरित नगर योजना के तहत निगम सीमा के बाहर कार्य कराने के प्रस्ताव थे। अंतिम प्रस्ताव में वार्ड विकास, संपत्ति कर, विद्युत पोल, अतिक्रमण, सीवर लाइन, रेमकी के कार्य और शुद्ध पेयजल पर चर्चा की मांग एजेंडे में शामिल रही।
नामकरण से लेकर टेंडर तक उठे सवाल
स्व. रामानंद सिंह और नर्मदा आंदोलन से जुड़े स्व. रामप्रताप सिंह के नाम पर केवल गलियों का नामकरण करने पर कांग्रेस नेता मोनू सिंह ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इन व्यक्तित्वों का कद बड़ा रहा है और उनके सम्मान में व्यापक पहल होनी चाहिए। स्व. शंकरलाल तिवारी के नाम पर भी कुछ बड़ा करने की मांग उठाई। इसका पार्षद नम्रता सिंह ने भी समर्थन किया। पार्षद मीना माधव ने महिला पार्षदों के पतियों की मौजूदगी पर सवाल किया तो निगमायुक्त ने कहा कि आम नागरिक भी बैठक में आ सकते हैं। नेता प्रतिपक्ष रवींद्र सिंह मिथलेश ने निविदाओं को लेकर सवाल उठाए, तो होर्डिंग ठेके का मसला भी चर्चा में रहा।
स्व. शंकरलाल तिवारी की प्रतिमा और स्टेडियम निर्माण की मांग
धवारी स्टेडियम के नामकरण के बीच पूर्व विधायक स्व. शंकरलाल तिवारी की स्मृति में स्थायी सम्मान देने की मांग भी सामने आई है। उनके परिजनों की सहमति और समर्थकों के अनुरोध पर राजनारायण तिवारी राजा ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को हस्ताक्षरयुक्त मांग पत्र सौंपा है। महापौर, कलेक्टर, नगर निगम प्रशासन और एल्डरमैन को दिए गए पत्र में शहर के प्रमुख स्थल अथवा पार्क में स्व. शंकरलाल तिवारी की प्रतिमा स्थापित करने तथा सोनौरा में नवनिर्मित स्टेडियम का नाम उनके नाम पर करने का आग्रह किया गया है। लगातार तीन बार सतना से विधायक रहे शंकरलाल तिवारी को उनके समर्थक गरीबों का मसीहा, जन-जन का नेता और लोकतंत्र सेनानी बताते हैं। निधन के एक वर्ष बाद भी किसी प्रमुख स्थल का नामकरण या प्रतिमा स्थापना नहीं होने पर समर्थकों ने यह मांग उठाई है। राजनारायण तिवारी के अलावा कई समाजसेवियों और शहरवासियों ने भी पहल का समर्थन किया है। मांग पत्र में जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
धवारी स्टेडियम पर नामकरण, मतदान को लेकर विवाद
करीब 8.39 करोड़ रुपये की लागत से बने धवारी क्रिकेट स्टेडियम का नाम स्व. शंकर प्रसाद ताम्रकार क्रिकेट स्टेडियम किए जाने का भाजपा पार्षदों का प्रस्ताव परिषद में पूर्ण बहुमत से पारित हो गया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 27 दिसंबर 2025 को स्टेडियम का लोकार्पण किया था। स्थानीय क्रिकेट प्रतिभाओं को अवसर देने के उद्देश्य से बने इस परिसर तक खिलाड़ियों की पहुंच और उपयोग को लेकर शिकायतें उठती रही हैं, लेकिन बैठक में खिलाड़ियों की सुविधाओं से ज्यादा नामकरण का विवाद हावी रहा। कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने कटाक्ष किया कि नगर निगम में नामकरण का काउंटर भी खोल देना चाहिए। कांग्रेस पार्षदों ने प्रत्यक्ष मतदान की मांग की। प्रस्ताव पर महापौर योगेश ताम्रकार से राय मांगी गई तो उन्होंने कहा कि मामला उनके पिता स्व. शंकर प्रसाद ताम्रकार से जुड़ा है, इसलिए वे व्यक्तिगत मत नहीं देंगे और निर्णय परिषद पर छोड़ते हैं। प्रस्ताव के समर्थन में 28 पार्षदों के पूर्वलिखित पत्रों का हवाला देते हुए इसे अनुमोदित किया गया। प्रत्यक्ष मतदान की मांग पर विपक्ष अड़ा रहा, लेकिन निर्णय समर्थन पत्रों के आधार पर हुआ। अंतत: राष्ट्रगान के साथ बैठक समाप्त कराई गई।
विधायक पत्र लेकर पहुंचे, शहर के सवाल पीछे
बैठक में सिद्धार्थ कुशवाहा वर्ष 2024, 2025 और 2026 में नगर निगम प्रशासन को लिखे पत्र लेकर पहुंचे। यह महापौर योगेश ताम्रकार के उस प्रसारित वीडियो के संदर्भ में था, जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि विधायक ने निगम को कभी पत्र नहीं लिखा। कुशवाहा ने पत्रों के जरिए इस दावे को चुनौती दी, लेकिन दूसरी बैठक में जाने की बात कहकर सदन से चले गए। राजनीतिक आरोप का जवाब देने के लिए दस्तावेज सामने आए, मगर सीवर, सड़क, जाम और पेयजल की समस्याओं पर जवाबदेही तय कराने का सवाल अनुत्तरित रहा।
शहर पूछ रहा: नाम बदलेंगे या हालात?
सतना में सीवर परियोजना वर्षों से अधूरी है। खुदाई के बाद सड़कें-गलियां बदहाल हैं, जाम लोगों की दिनचर्या बिगाड़ रहा है और कई बस्तियों में रात का अंधेरा परेशानी बढ़ाता है। ऐसे में जनमानस को उम्मीद थी कि इस मर्तबा परिषद की बैठक विकासव रूकी हुई परियाजनाओं पर होगी लेकिन समूची बैठक नामकरण के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रह गई। परिषद का मूल्यांकन नामकरण के प्रस्तावों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से होना चाहिए कि कितने लंबित कामों की समयसीमा तय हुई, सीवर परियोजना के लिए जवाबदेही किसकी निर्धारित हुई और सड़क, प्रकाश तथा पेयजल पर कौन से ठोस निर्णय लिए गए। नामकरण सम्मान का माध्यम हो सकता है, विकास का विकल्प नहीं। सत्ता पक्ष नामकरण का प्रस्ताव लेकर आया और विपक्ष भी उसी बहस में उलझा रहा। धवारी स्टेडियम के नाम पर समर्थन पत्रों का आधार सामने आया, प्रत्यक्ष मतदान की मांग पर विवाद हुआ और प्रस्ताव पारित हो गया। लेकिन शहर के अधूरे सीवर, टूटी सड़कों और अंधेरी गलियों के लिए समयबद्ध प्रतिबद्धता कहां है? विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा महापौर के दावे का जवाब देने तीन वर्षों के पत्र लेकर पहुंचे। इससे उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि नगर निगम को पत्र लिखे गए थे। मगर राजनीतिक सफाई देने के बाद शहर के मुद्दों पर उन्होंने कौन सी जवाबदेही तय कराई? पत्रों की फाइल राजनीतिक आरोप का जवाब दे सकती है, सड़क के गड्ढे नहीं भर सकती और सीवर का अधूरा काम पूरा नहीं करा सकती। शहर की जनता का यह सवाल सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से है कि नागरिकों की परेशानियों के समाधान के लिए उनकी ठोस पहल क्या है। सतना को नामों की नई सूची से ज्यादा ऐसी सड़कों की जरूरत है, जिन पर बिना जाम और गड्ढों के चला जा सके। ऐसी गलियों की जरूरत है, जहां रात में रोशनी हो और ऐसी सीवर व्यवस्था की जरूरत है, जिसका काम तय समय में पूरा हो। शहर को नामकरण की सियासत नहीं, दिखाई देने वाला विकास चाहिए।

उज्जैन के प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर की मूर्ति हटाने के विवाद में नया मोड़ आया है। प्रशासन द्वारा विशेष मशीनों से प्रतिमा की स्कैनिंग और रात की कार्रवाई पर स्थानीय पार्षदों ने सवाल उठाए हैं।
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पन्ना में सागर लोकायुक्त पुलिस ने जल संसाधन विभाग के डिविजनल एकाउंटेंट दीपक परिहार और लिपिक अरविंद पाठक को 45 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा। ठेकेदार ने 25 लाख रुपये का लंबित बिल पास कराने के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत की थी।
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रीवा के करीब 10 करोड़ रुपये से बने स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में नियमित अधिकारी का पद खाली है। सतना के अधिकारी को प्रभार सौंपा गया है। आठ आउटसोर्स कर्मचारी पांच महीने से वेतन नहीं मिलने से परेशान हैं।
रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में कई डॉक्टरों को दोहरी और तिहरी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। अतिरिक्त प्रभार के कारण ओपीडी, वार्डों में उपस्थिति, मरीजों का इलाज और मेडिकल शिक्षा प्रभावित होने के आरोप सामने आए हैं।
सतना के हाटी मोड़ पर दुर्घटनाओं की आशंका के चलते प्रशासन ने न्यायालय के आदेश पर अतिक्रमण हटाया। कार्रवाई के दौरान हंगामा हुआ। मां-बेटी पर शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज हुआ, बिजली चोरी पर भी कार्रवाई जारी है।

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