सतना नगर निगम में बजट को लेकर महापौर और कमिश्नर के बीच टकराव गहराया है। समयसीमा नजदीक होने के बावजूद बजट पास नहीं हो सका, जिससे विकास कार्य प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
नगर निगम इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बना हुआ है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने को महज 8 दिनों का समय बचा है। बावजूद इसके अभी तक बजट एमआईसी से पास नहीं हो पाया है। नगर निगम के प्रशासनिक सूत्रों का दावा है कि बजट तैयार कर इसी माह के दूसरे सप्ताह एमआईसी को भेज दिया गया है जबकि महापौर ने कमिश्नर को एक पत्र लिखकर बजट के संबंध में विभागों से चर्चा एवं प्रस्तावों को अंतिम रूप देने को कहा है। बहरहाल, मामला कुछ भी हो लेकिन अभी निगम का बजट अधर में अटका हुआ है और बजट के प्रावधानों पर चर्चा और प्रस्तावों को अंतिम रूप देने को लेकर निगम में चिट्ठी- पत्री चल रही है।
13 दिन बाद भी मेयर के निर्देशों को तवज्जो नहीं
सोशल मीडिया में सोमवार को एक पत्र दिनभर चर्चा में रहा, यह पत्र महापौर योगेश ताम्रकार ने नगर निगम आयुक्त को लिखा है। महापौर के इस पत्र की माने तो बजट पर चर्चा को लेकर 13 दिनों पूर्व उनके द्वारा 10 मार्च को कुछ निर्देश दिए गए थे जिन निर्देशों को कोई तवज्जो अब तक नहीं दिया गया है। लिहाजा उन्हें 23 मार्च को पत्र लिखना पड़ा। कमिश्नर को लिखे पत्र में महापौर ने कहा है कि बजट के संंबंध में चर्चा और उसके प्रस्तावों को अंतिम रूप देते हुए अवगत कराने को कहा गया था लेकिन अब तक इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया गया और न ही कोई चर्चा की गई। यह अत्यन्त ही चिंताजनक और खेदजनक है।
विकास कार्यों में आएंगी बाधाएं
बजट को लेकर आयुक्त को लिखे पत्र में महापौर ने साफ कहा है कि यह विषय शहर के समग्र विकास से जुड़ा है। यदि बजट संबंधी प्रक्रिया में विलम्ब होता है अथवा पर्याप्त विचार -विमर्श के बिना निर्णय लिए जाते हैं तो इससे भविष्य में विभिन्न विकास कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। बजट पर चर्चा न होने के कारण महापौर ने एमआईसी की बैठक नहीं बुला पाने का हवाला देते हुए पत्र के माध्यम से आयुक्त को निर्देशित किया है कि विषय को गंभीरता से लेते हुए अतिशीघ्र सभी संंबंधित विभागों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा सुनिश्चित करें तथा उसकी प्रगति से मुझे तत्काल अवगत कराएं, साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि बजट प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी होती है तो उसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी नगर निगम कमिश्नर की होगी।
निगम के इतिहास में पहली बार
नगर निगम के साढ़े चार दशक के इतिहास में शायद यह पहला अवसर होगा जब बजट पर सभी विभागों से समुचित चर्चा एवं प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए महापौर को नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखना पड़ा हो। नगरीय निकाय के जानकारों की माने तो बजट तैयार करने और उसे पास कराने को लेकर एक पूरी प्रक्रिया है और उसकी एक तय समय-सीमा है। बावजूद इसके बजट पर चर्चा के लिए और उसे एमआईसी में पेश करने के लिए महापौर को पत्र लिखना अपने आप में यह साबित करता है कि निगम में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है।
बजट से जुड़ी एक फाइल आई थी जिसे 10 मार्च को बजट के प्रावधानों और प्रस्तावों पर चर्चा और उन्हें अंतिम रूप देने की टीप के साथ कमिश्नर को वापस भेज दिया गया था लेकिन अभी तक इस संबंध में कमिश्नर द्वारा कोई चर्चा नहीं की गई है। इससे बजट में जनहित से जुड़े कई प्रावधान नहीं जुड़ पाए हैं। कमिश्नर की मनमानी की वजह से एमआईसी की बैठक नहीं बुलाई जा रही। बिना चर्चा के बजट पास होने से आम जनता के हितों का नुकसान होगा।
योगेश ताम्रकार, महापौर
परिषद की बैठक बुलाने के लिए मुझे हर बार पत्राचार करना पड़ता है। हर दो माह में परिषद की बैठक होनी चाहिए लेकिन 4-4 माह तक बैठक नहीं होती। 13 मार्च को परिषद की बैठक के लिए एजेंडा जारी करने कमिश्नर को पत्र लिखा गया था लेकिन अब तक एजेंडा जारी नहीं हुआ। 24 को दोबारा एजेंडा जारी करने के लिए पत्र लिखा जाएगा। परिषद की बैठक बुलाने के लिए कम से कम सात दिन और विशेष सम्मिलन बुलाने के लिए कम से कम तीन दिनों का समय चाहिए।
राजेश चतुर्वेदी, ‘पालन’ स्पीकर नगर निगम
31 मार्च के पहले बजट की पूरी कार्यवाई पूर्ण हो जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो जो बजट अधिकारी तैयार करते हैं वह मान्य हो जाता है लेकिन अधिकारियों द्वारा तैयार बजट से आम जनता को नुकसान होता है। निर्धारित समय के अंदर बजट एमआईसी और परिषद में जाए यह कमिश्नर की जवाबदेही है। समय से बजट को पास कराने की प्रक्रिया पूर्ण न करना लापरवाही है।
राजाराम त्रिपाठी, पूर्व महापौर
कमिश्नर की जिम्मेदारी है कि समय से बजट पेश हो, बजट के लिए एमआईसी, परिषद और कमिश्नर के लिए एक समय सीमा निर्धारित है और उसी समय सीमा के अंदर बजट तैयार करना और उसे पास कराने की प्रक्रिया पूर्ण करना होता है। बजट के लिए महापौर को पत्र लिखना शर्मनाक है। वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों को इस पूरे मामले में स्वयं संज्ञान लेना चाहिए। दो लोगों के टकराव से पूरे शहर का नुकसान क्यों हो?
पुष्कर सिंह तोमर, पूर्व महापौर


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