सतना जिले में पेट्रोल-डीजल संकट गहराया। आधी सप्लाई और टैंकरों की कमी से शहर के बड़े पंप भी सूखने लगे। गांवों से लेकर परिवहन और कारोबार तक पर असर साफ दिखाई देने लगा है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में पेट्रोल-डीजल का संकट अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले तीन दिनों से लगातार बिगड़ रही स्थिति ने बुधवार शाम तक पूरे जिले की रफ्तार पर असर डालना शुरू कर दिया। गांवों और कस्बों के छोटे पेट्रोल पंप पहले ही बंद होने की कगार पर पहुंच चुके थे लेकिन अब शहर के बड़े पेट्रोल पंप संचालकों ने भी हाथ खड़े करना शुरू कर दिया है। कई पंपों पर स्टॉक खत्म होने की सूचना चस्पा कर दी गई जबकि कुछ ने सीमित बिक्री शुरू कर दी। जानकारी के मुताबिक तेल डिपो से मांग के मुकाबले केवल 50 प्रतिशत तक ही सप्लाई भेजी जा रही है। दूसरी ओर अधिकांश पेट्रोल पंप संचालकों को समय पर टैंकर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि जिलेभर में ईंधन का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया है।
गांवों में पहले खत्म हुआ तेल, अब शहर भी चपेट में
ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पेट्रोल पंपों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है। अमरपाटन, रामनगर, नागौद, उचेहरा, कोठी, जैतवारा और आसपास के कई इलाकों में छोटे पंपों पर पेट्रोल-डीजल का स्टॉक लगभग समाप्त हो चुका है। कई पंप संचालकों ने नए टैंकर आने तक बिक्री बंद कर दी है। गांवों में रहने वाले लोगों को अब पेट्रोल के लिए 20 से 30 किलोमीटर तक शहर की ओर आना पड़ रहा है। इसका असर खेती-किसानी से लेकर रोजमर्रा की आवाजाही तक पर दिखने लगा है। ट्रैक्टर, पिकअप और छोटे व्यवसायिक वाहन भी प्रभावित हो रहे हैं।
शहर के बड़े पंपों पर लंबी कतारें
बुधवार शाम तक हालात इस स्तर पर पहुंच गए कि सतना शहर के प्रमुख पेट्रोल पंपों पर भी भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों में तेल खत्म होने की आशंका के चलते अचानक मांग बढ़ गई। कई जगह बाइक और कारों की लंबी कतारें लग गईं। कुछ पंपों ने प्रति वाहन सीमित मात्रा में ही पेट्रोल देना शुरू कर दिया ताकि अधिक से अधिक ग्राहकों को राहत मिल सके। कई जगह ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच बहस की स्थिति भी बनी।
परिवहन और कारोबार पर असर शुरू
ईंधन संकट का असर अब परिवहन व्यवस्था और छोटे कारोबारों पर भी दिखाई देने लगा है। निजी बस, मालवाहक वाहन और टैक्सी संचालक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि अगले 24 से 48 घंटे में सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हो सकता है। वाहन संचालकों और दैनिक अप-डाउन करने वाले कर्मचारियों में भी चिंता बढ़ गई है। शहर में कई लोग एहतियात के तौर पर अतिरिक्त पेट्रोल भरवाने पहुंच रहे हैं, जिससे दबाव और बढ़ रहा है।
टैंकर ही नहीं मिल रहे
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि असली समस्या सप्लाई चेन में आई बाधा है। डिपो से पर्याप्त मात्रा में तेल नहीं मिल रहा और जो आवंटन हो रहा है, उसके लिए भी टैंकर उपलब्ध नहीं हो पा रहे। संचालकों के अनुसार सामान्य दिनों में जिस मात्रा में ईंधन की खपत होती है, उसके मुकाबले वर्तमान सप्लाई आधे से भी कम है। लगातार तीन दिनों से यही स्थिति बनी हुई है, जिससे स्टॉक तेजी से खत्म हो गया।
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी चिंता
हालांकि जिले में बढ़ते संकट के बीच प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक नहीं की गई है। लोगों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही कि सप्लाई कब तक सामान्य होगी और संकट का वास्तविक कारण क्या है। उधर, पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि यदि जल्द अतिरिक्त सप्लाई नहीं मिली तो जिले के और पंप भी पूरी तरह बंद हो सकते हैं। सतना जैसे बड़े जिले में ईंधन संकट ने अब आम जनजीवन पर सीधा असर डालना शुरू कर दिया है।


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