सतना जिले में इस वर्ष धान का रकबा लगभग 20% बढ़कर 2,05,460 हेक्टेयर तक पहुंच गया है। पराली प्रबंधन के लिए जिले में सुपर सीडर, बेलर, जीरो टीलेज जैसे उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं 50 हजार टन पराली की वार्षिक आवश्यकता को देखते हुए कलेक्शन सेंटर और हाइटेक हब स्थापित किए गए हैं। कलेक्टर ने पराली जलाने की घटनाएं रोकने के निर्देश दिए।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने कहा कि सतना जिले में इस वर्ष धान का रकबा लगभग 20 प्रतिशत बढा है। खरीफ फसल अवशेष धान की पराली के प्रबंधन के लिए किसानों की राय से इस प्रकार कार्य योजना बनाये ताकि अधिक से अधिक फसल अवशेष का प्रबंधन किया जा सके। बैठक में उप संचालक कृषि आशीष पाण्डेय ने बताया कि सतना जिले में गिरदावरी के अनुसार वर्ष 2024 में 1 लाख 80 हजार 239 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल ली गई थी। जबकि इस वर्ष 2025 में 2 लाख 5 हजार 460 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल ली जा रही है। इस प्रकार इस बार धान का रकबा लगभग 20 प्रतिशत बढा है। जिले में 30 अक्टूबर से 10 दिसम्बर तक धान की कटाई की जाती है।
सतना जिले में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की सेटेलाइट जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2023-24 में 329, रबी 2023-24 में 493 इस प्रकार कुल 822 घटनायें प्रकाश मे आई थी। जबकि वर्ष 2024-25 में खरीफ के फसल अवशेष जलाने की 565 और रबी की 724 मिलाकर कुल 1289 घटनायें दर्ज की गई है। सतना जिले में नरवाई प्रबंधन के लिए उपलब्ध यंत्र और उपकरणों की जानकारी में बताया गया कि जिले में 91 सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, 50 बेलर हे-रेक, 310 रीपर कम बाइंडर, 8 स्लेशन मंचर, 70 जीरो टीलेज, सीड कमफटीर्लाइजर ड्रील और 154 निजी कस्टम हायरिंग के केन्द्रों की सुविधायें उपलब्ध है।
इसके अलावा सोहावल विकासखण्ड के ग्राम खटोला और रामपुर बघेलान विकासखण्ड में 7500 मी. टन क्षमता के पराली बनाने के हाइटेग हब सेंटर भी स्थापित किये गये है। सीबीजी प्लांट संचालकों ने बताया कि उन्हें हर वर्ष 50 हजार टन पराली की आवश्यकता होगी। जिसके कलेक्शन के लिए शेरगंज, रामपुर बघेलान और नागौद में कलेक्शन सेंटर बनाये गये हैं। कलेक्शन सेंटर के चारों तरफ के 15 से 20 किमी की परिधि के गांवों में पराली एकत्र करने की व्यवस्था है। कलेक्टर ने कहा कि सतना जिले में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनायें कम हो। इसके लिए पराली से साइलेज बनाने और गौशालाओं में उपयोग करने सीईओ जिला पंचायत और उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग को निर्देशित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए शासकीय और निजी क्षेत्रों में उपलब्ध पराली प्रबंधन के उपकरणों का प्रचार-प्रसार भी किया जाये।


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