सतना के नैना-सगमनिया गांव में वन विभाग ने डॉग स्क्वाड की मदद से संदिग्ध के घर से खून से सने हथियार, तराजू और वन्य प्राणी के बाल बरामद किए। वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में वन्यजीवों के अवैध शिकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच वन विभाग को मंगलवार को एक बड़ी सफलता मिली। मुखबिर से मिली सूचना पर की गई कार्रवाई में वन विभाग ने डॉग स्क्वाड की मदद से एक संदिग्ध के घर तक पहुंचकर ऐसे साक्ष्य बरामद किए हैं, जो किसी वन्यजीव के शिकार की ओर इशारा कर रहे हैं। बरामद सामग्री में खून से सने हथियार, तराजू और वन्य प्राणी के बाल शामिल हैं। मामले में वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार 2 जून को वन विभाग को सूचना मिली कि बीट खमरिया के राजस्व क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नैना-सगमनिया में किसी वन्यजीव का शिकार किया गया है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए वन परिक्षेत्र अधिकारी के नेतृत्व में वन अमला, डॉग स्क्वाड और अन्य कर्मचारियों की टीम तत्काल मौके पर पहुंची।
पानी की टंकी के पास मिले खून के निशान : वन विभाग की टीम ने सबसे पहले गांव के समीप स्थित पानी की टंकी और उसके आसपास के क्षेत्र की सघन तलाशी ली। तलाशी के दौरान टीम को जमीन पर खून के धब्बे और खून से संबंधित नमूने मिले। इससे अधिकारियों को शिकार की सूचना सही होने का संदेह मजबूत हुआ। मौके से नमूने संकलित कर आगे की जांच के लिए एकत्र किए गए।
सूंघ कर दिए संकेत
मौके से मिले खून के नमूनों के आधार पर डॉग स्क्वाड के प्रशिक्षित श्वान स्पार्टन को ट्रैकिंग के लिए लगाया गया। श्वान ने गंध पकड़ते हुए आसपास के इलाके में खोजबीन शुरू की और कुछ दूरी तय करने के बाद सीधे गांव निवासी रामाधार बंसल के घर पहुंच गया। अधिकारियों के अनुसार स्पार्टन ने घर के आसपास लगातार संकेत दिए, जिससे वहां शिकार से जुड़े साक्ष्य होने की आशंका और मजबूत हो गई।
सर्च वारंट लेकर हुई तलाशी
चूंकि मामला निजी आवास से जुड़ा था इसलिए वन विभाग ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उप वन मंडल अधिकारी सतना से सर्च वारंट प्राप्त किया। वारंट जारी होने के बाद वन विभाग की टीम ने घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान घर के अंदर से खून से सने हथियार, वजन करने का तराजू और वन्य प्राणी के बाल बरामद किए गए। वन अधिकारियों का मानना है कि बरामद सामग्री का इस्तेमाल शिकार के बाद वन्यजीव के मांस या अन्य अंगों के विभाजन और तौलने में किया गया हो सकता है। हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
किस वन्यजीव का हुआ शिकार, जांच से होगा खुलासा
वन विभाग ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि शिकार किस वन्यजीव का किया गया है? बरामद बालों और खून के नमूनों को परीक्षण के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। फॉरेंसिक और वन्य जीव विशेषज्ञों की रिपोर्ट के बाद ही यह तय हो सकेगा कि शिकार किए गए जीव की प्रजाति कौन सी थी?
वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
वन विभाग ने बरामद साक्ष्यों के आधार पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। मामले में संदिग्धों की भूमिका, शिकार में शामिल अन्य लोगों और संभावित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में शिकार की पुष्टि होती है तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिले में बढ़ाई गई निगरानी
वन अधिकारियों के अनुसार हाल ही के वर्षों में वन्यजीव अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए डॉग स्क्वाड, आधुनिक निगरानी तंत्र और मुखबिर नेटवर्क का उपयोग बढ़ाया गया है। नैना-सगमनिया में हुई कार्रवाई को इसी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। वन मंडल अधिकारी सतना के मार्गदर्शन में पूरी कार्रवाई संपन्न की गई।


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