ग्वालियर के एडीजे कोर्ट में सिंधिया राजपरिवार की अरबों की संपत्ति के बंटवारे को लेकर सुनवाई हुई। त्रिपुरा राजघराने की प्रतिमा देवी की आपत्ति पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे ने जवाब दाखिल किया है। जानिए इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद की पूरी अपडेट।

ग्वालियर। स्टार समाचार वेब
ग्वालियर के सिंधिया राजपरिवार की अरबों रुपये की पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार किया गया समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर गंभीर कानूनी अड़चनों में उलझ गया है। अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद को लेकर सोमवार (17 अगस्त 2026) को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस मामले में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे की ओर से कोर्ट में अपने जवाब दाखिल कर दिए गए हैं।
इस संपत्ति विवाद के समझौते पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ, दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी और त्रिपुरा राजघराने से संबंधित प्रतिमा देवी राना ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान प्रतिमा देवी की जगह उनकी बेटी शिवांगी देवी अपने पति के साथ अदालत में उपस्थित हुईं।
प्रतिमा देवी की आपत्ति के जवाब में वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ से कोर्ट में जवाब आवेदन पेश किए गए। बुआओं (वसुंधरा और यशोधरा) ने अपने जवाब में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब पहले इस समझौते पर पूरी सहमति जताई जा चुकी थी, तो अब इस तरह की आपत्ति उठाने का क्या औचित्य है। उन्होंने कोर्ट में यहां तक कहा कि इस प्रकार की यू-टर्न और अड़ंगेबाजी के लिए प्रतिमा राजे के खिलाफ क्रिमिनल प्रोसिडिंग (आपराधिक कार्रवाई) चलाई जानी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 अगस्त 2026 की तारीख तय की है।
मूल रूप से वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ पैतृक संपत्ति में अपना न्यायसंगत हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी संघर्ष और विचार-विमर्श के बाद सभी मुख्य पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर अदालत में पेश किया था, जिससे यह उम्मीद जगी थी कि विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकल आएगा।
हालांकि, कानूनी पेंच तब फंसा जब मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों—कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना—को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व की सुनवाइयों के दौरान उनके उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था।
जैसे ही संपत्ति के इस समझौता प्रस्ताव पर सकारात्मक दिशा में बात आगे बढ़ी, वैसे ही प्रतिमा देवी ने अदालत में एक नया आवेदन दाखिल कर दिया। उन्होंने कानूनी प्रक्रिया में दोबारा शामिल किए जाने और इस समझौते में अपने हिस्से का अधिकार पाने की पुरजोर गुहार लगाई। चूंकि दिवंगत पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को शुरुआती दौर में कानूनी प्रक्रिया से बाहर रखने और अब उनके द्वारा हक मांगने से यह पूरा राजीनामा कानूनी रूप से काफी पेचीदा हो गया है, जिस पर अब अदालत में तीखी कानूनी बहस जारी है।

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