रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों की मनमानी और लापरवाही चरम पर है। सुबह OPD समय पर नहीं पहुंचते डॉक्टर, मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। करोड़ों की लागत से बना अस्पताल और लाखों की सैलरी पाने वाले डॉक्टर अनुबंध के बावजूद निजी प्रैक्टिस में व्यस्त। डीन और अधीक्षक की लापरवाही से बिगड़ी व्यवस्था। जानिए पूरी रिपोर्ट।

सुबह 9.30 बजे दो डॉक्टरों का चेम्बर था खाली
रीवा, स्टार समाचार वेब
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में डॉक्टरों की लेटलतीफी हावी है। डॉक्टर सुबह समय पर ओपीडी में पहुंचते ही नहीं। सुबह 9.30 बजे तक दो डॉक्टरों का चेम्बर खाली रहा। मरीज डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे। यह सिर्फ दो डॉक्टरों की कहानी नहीं है। यहां अधिकांश के यही हालात हैं। इस लेटलतीफी पर अंकुश नहीं लग पा रहा।
ज्ञात हो कि मरीजों की सुविधाओं के लिए डिप्टी सीएम के प्रयास से सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खुला। 150 करोड़ की बिल्डिंग बनी और यहां वह सारे उपकरण उपलब्ध कराए गए जिनकी कमी से मरीजों को बाहर जाना पड़ता था। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की गई। भारी भरकम वेतन दिया जा रहा है। हर साल 10 फीसदी बेसिक का इंक्रीमेंट लग रहा है। इसके बाद भी नियमों को डॉक्टर धता बता रहे हैं। मरीजों को समय देने की जगह प्राइवेट पै्रक्टिस को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसके कारण सुपर स्पेशलिटी अस्पताल आने वाले मरीज परेशान होते हैं। बुधवार को जब स्टार समाचार की टीम सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहुंची तो सुबह के 9.30 बजे थे। ओपीडी में दो डॉक्टरों के चेम्बर खाली थी। यहां उनके ओपीडी का दिन तो लिखा था लेकिन डॉक्टर सीट पर बैठे नहीं थे। मरीज उनके आने का इंतजार करते नजर आए। 9.30 बजे के एक डॉक्टर तो पहुंच गए लेकिन दूसरे फिर भी गायब रहे।
यह चिकित्सक रहे नदारद
बुधवार को सुबह 9.30 बजे न्यूरो सर्जन डॉ ऋषि कुमार गर्ग का दिन था। उन्हें 8.30 बजे पहुंचना चाहिए था लेकिन वह 9.30 बजे तक चेम्बर में बैठे ही नहीं थे। हालांकि कुछ देर बाद वह ओपीडी में पहुंच गए थे। मरीजों का पर्चा वार्ड ब्वाय ने जमा कर लिया था। इसके अलावा ठीक बगल में ही सीवीटीएस सर्जन डॉ इमरान खान मंसूरी भी गायब थे। सीवीटीएस सर्जन का ओपीडी समय बुधवार को था। वह भी मौके पर मौजूद नहीं थे। काफी देर तक वह मौके पर पहुंचे भी नहीं थे।
प्राइवेट प्रैक्टिस पर है प्रतिबंध, अनुबंध भी हुआ
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में जितने भी डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। सभी ने अनुबंध साइन किया है। अनुबंध के तहत कोई भी चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर सकता लेकिन इस अनुबंध का कोई भी पालन नहीं कर रहा है। अधिकांश चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। बंगले मे या फिर बाहर क्लीनिक खोल कर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। इसके कारण ही सुबह समय पर अस्पताल आने में डॉक्टरों को देरी होती है। कुछ डॉक्टर समय को लेकर पाबंद हैं लेकिन कई लेट से आते हैं। पहले प्राइवेट अस्पताल और निजी क्लीनिक में मरीजों को सेवाएं देते हैंं।
डीन और अधीक्षक नहीं देते हैं ध्यान, राउंड तक नहीं करते
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर किसी का ध्यान नहीं है। यह अस्पताल और यहां की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे ही चल रही हैं। डीन और अधीक्षक अस्पताल का राउंड तक नहीं करते। यही वजह है कि अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरों की मनमानी नहीं रुक पा रही है।


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