सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल CM और ED के विवाद पर बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जांच में मुख्यमंत्री का दखल केवल राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि कानून के शासन का उल्लंघन है।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
पश्चिम बंगाल सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बीच चल रही कानूनी खींचतान में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद गंभीर रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से किसी केंद्रीय एजेंसी की जांच में बाधा उत्पन्न करता है, तो इसे केवल 'केंद्र बनाम राज्य' का राजनीतिक टकराव मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने इसे कानून के शासन और संवैधानिक मर्यादा पर सीधा प्रहार बताया है।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा घटनाक्रम को 'असामान्य और दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। अदालत ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि यदि उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति ही जांच प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे, तो भविष्य में इसके लिए क्या कानूनी समाधान अपनाए जाएंगे। कोर्ट ने संकेत दिया कि यह विषय सीधे तौर पर संविधान की गरिमा से जुड़ा है।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यदि केंद्रीय एजेंसियों के अभियानों को शारीरिक बल या प्रशासनिक शक्ति से रोका जाता है, तो एजेंसियों को बेबस नहीं छोड़ा जा सकता। ED ने इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) से जांच कराने और मुख्यमंत्री सहित राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने ED की याचिका को ही चुनौती दी है। राज्य सरकार का तर्क है कि ED एक सरकारी विभाग है, इसलिए वह मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला देकर अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकती। टीएमसी (TMC) ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को कमजोर करने के लिए ये छापे मारे जा रहे हैं।
इस कानूनी जंग के बीच, चुनावी रणनीतिकार संस्था I-PAC के सह-संस्थापक विनेश कुमार चंदेल की गिरफ्तारी ने मामले को और गरमा दिया है। कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चंदेल फिलहाल 23 अप्रैल तक ED की हिरासत में हैं। इस कार्रवाई के बाद I-PAC ने बंगाल में अपनी गतिविधियों को अस्थायी रूप से सीमित कर दिया है।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भवानीपुर चुनाव परिणाम को कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं, टीएमसी के 20 सांसदों के अन्य पार्टी में विलय से तृणमूल कांग्रेस भारी संकट में है।
सुप्रीम कोर्ट ने देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई समेत अन्य बैंकों की कार्यप्रणाली पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने एसबीआई की तरफ से पेश हुईं एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा कि वे कोर्ट की इस गंभीर चिंता को बैंक के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएं।
अभी नासिक और पुणे का केस सुरझा भी नहीं और अब महाराष्ट्र के नागपुर में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आ गया है। यहां एयर फोर्स के एक कर्मचारी की पत्नी ने अपने पुराने क्लासमेट और उसके साथियों पर रेप, ब्लैकमेल, काला जादू और जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया है।
देशभर में हो रही कफ सीरप की कालाबाजारी और बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। हालांकि इस तरह की कवायद भी पहले भी की जा चुकी है, लेकिन मनमानी पर रोक नहीं लग पाई है। जहां आज पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए केंद्र ने कड़ा और बड़ा कदम उठाया है।
भारत सरकार ने सेना को चेतावनी दी है कि सीमाओं पर मौजूद महत्वपूर्ण ठिकानों पर दुश्मन ड्रोन हमला कर सकता है। जहाज और जलमार्ग मंत्रालय के समुद्री सुरक्षा विंग ने जमीन और समुद्री सीमाओं के पास मौजूद महत्वपूर्ण संपत्तियों और ठिकानों पर ड्रोन अटैक को लेकर अलर्ट जारी किया है।
उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में एक बार फिर सामूहिक हत्याकांड की घटना ने सनसनी फैला दी है। यमुनानगर के मेजा थाना इलाके के कुकुरकटवा गांव में एक ही परिवार के तीन बुजुर्ग सदस्यों की देर रात नृशंस हत्या कर दी गई।
'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके की जयपुर में सरेआम पिटाई। वीडियो वायरल होने के बाद मचा हड़कंप, जानें कौन हैं अभिजीत और क्यों चर्चा में है उनकी पार्टी।
अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा हो चुकी है। 19 जून-2026 को स्विट्जरलैंड में इस पर हस्ताक्षर होंगे। इसका दुनिया भर के नेताओं ने स्वागत किया है। इसी क्रम में भारत के पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- संघर्ष खत्म करने के लिए बनी इस सहमति का मैं स्वागत करता हूं।
बिहार की राजधानी पटना स्थित ज्ञान बिंदु कोचिंग संस्थान के संचालक रौशन आनंद को बड़ी राहत मिली है। उन्हें जमानत मिल गई है, जिसके बाद वह आज सहरसा पहुंचकर अपने छोटे भाई प्रिंस यादव के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे। परिवार और समर्थकों के लिए यह राहत भरी खबर है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव इसी साल नवंबर-दिसंबर महीने में होने के आसार जताए जा रहे हैं। दरअसल, अगले साल फरवरी में प्रस्तावित जनगणना के दूसरे चरण में बाधा नहीं आने देने के लिए केंद्र सरकार इन राज्यों में फरवरी-मार्च से पहले चुनाव कराने पर विचार कर रही है।

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