एनआईए ने सोमवार को कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और कुलगाम जिलों में दस स्थानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई एक व्हाइट-कॉलर आतंक मॉड्यूल से जुड़े मामले में की गई, जिसके तार दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट से जुड़े हुए हैं।
एनआईए ने दिल्ली में लाल किले के बाहर 10 नवंबर को हुए कार बम ब्लास्ट केस में फरीदाबाद के धौज निवासी एक और आतंकी गतिविधियों में शामिल शोएब को गिरफ्तार किया है। शोएब इस केस का सातवां आरोपी है। विस्फोट में 15 लोगों की मौत हुई थी और दो दर्जन घायल हुए थे।
लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को अमेरिका से भारत लाया गया है। बाबा सिद्दीकी की हत्या के मुख्य साजिशकर्ता अनमोल को एयरपोर्ट पर पहुंचते ही एनआईए और दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद उसे सीधे पटियाला हाउस कोर्ट ले जाया गया।
अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में ईडी की टीम दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों में छापेमारी कर रही है। अल फलाह वि पर एक मामला मनी लांड्रिंग का भी दर्ज किया गया था। महू में यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद के पुराने आवास और फरीदाबाद में अल फलाह के परिसर, ओखला में ट्रस्ट के दफ्तर सहित 30 ठिकानों पर छापेमारी जारी है।
एनआईए समेत अन्य जांच एजेंसियां और क्राइम ब्रांच की टीमें लगातार मस्जिद, किराएदारों के कमरे, खाद-बीज की दुकानें, कारों की बिक्री करने वाले डीलर, गेस्ट हाउस, धर्मशालाओं की चेकिंग कर रही है।
दिल्ली में लाल किला मेट्रो के पास हुए कार ब्लास्ट को लेकर एनआईए की ओर से एक और खुलासा हुआ है। ब्लास्ट से पहले डॉ उमर मोहम्मद ने सिग्नल ऐप एक ग्रुप बनाया था और इसमें चार लोगों को जोड़ा था। आतंकी डॉ. मुजम्मिल, डॉ. अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर 20 लाख नकद जुटाए थे।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को 2008 के मालेगांव विस्फोट के पीड़ित परिजनों की याचिका पर एनआईए और इस मामले में बरी किए गए सातों लोगों को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड़ की पीठ ने अभियोजन पक्ष एनआईए और महाराष्ट्र सरकार को भी नोटिस जारी किए।
मालेगांव ब्लास्ट मामले में एनआईए कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया। जानें 17 साल बाद आए इस फैसले के मायने, 'भगवा आतंकवाद' का विवाद और न्याय प्रणाली पर उठते सवाल।
महाराष्ट्र के मालेगांव ब्लास्ट मामले में फैसला 17 साल बाद आया। जज एके लाहोटी ने कहा कि ये साबित नहीं हुआ कि जिस बाइक में ब्लास्ट हुआ वो साध्वी प्रज्ञा के नाम थी। ये भी साबित नहीं हो सका कि कर्नल प्रसाद पुरोहित ने बम बनाया।





















