सतना जिले में 99 प्रतिशत पुस्तकें पहुंचने के बावजूद विद्यार्थियों तक केवल 86 प्रतिशत पाठ्यपुस्तकों का वितरण हो सका। एक लाख से अधिक किताबें अब भी लंबित हैं, जिस पर डीपीआई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में समीक्षा होगी।
सतना में 95 प्रतिशत किताबें जिला स्तर तक पहुंचीं, लेकिन स्कूलों में केवल 70 प्रतिशत वितरण हुआ। हजारों विद्यार्थी अब भी पाठ्यपुस्तकों के इंतजार में हैं, जिससे नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
रीवा के सरकारी स्कूलों में नए सत्र के तीन महीने बाद भी विद्यार्थियों को पूरी किताबें नहीं मिलीं। हिंदी माध्यम की पुस्तकें अधूरी पहुंचीं, जबकि अंग्रेजी माध्यम के छात्र अब भी पुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं।
NCERT ने पाठ्यपुस्तकों पर मिले फीडबैक की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। जानें क्यों यह कदम उठाया गया है और कक्षा 8 की नई इतिहास की किताब में मुगलों के बारे में क्या नया लिखा गया है।
छात्रों की पढ़ाई पर संकट! सतना समेत कई जिलों में एनसीईआरटी की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। नई शिक्षा नीति के अनुरूप किताबें अब तक बाजार में नहीं आईं, जिससे कक्षा 5वीं और 8वीं के विद्यार्थी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। जानिए कारण और इसके दुष्परिणाम।

















