सतना में 95 प्रतिशत किताबें जिला स्तर तक पहुंचीं, लेकिन स्कूलों में केवल 70 प्रतिशत वितरण हुआ। हजारों विद्यार्थी अब भी पाठ्यपुस्तकों के इंतजार में हैं, जिससे नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सरकारी स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई दिन बीत चुके हैं। स्कूलों में नियमित पढ़ाई चल रही है लेकिन जिले के हजारों विद्यार्थियों के हाथों में अब तक पूरी पाठ्यपुस्तकें नहीं पहुंची हैं। शिक्षा विभाग के विमर्श पोर्टल पर उपलब्ध रिपोर्ट बताती है कि जिले में किताबों की उपलब्धता से ज्यादा समस्या उनके स्कूलों तक पहुंचने की है। आंकड़ों के मुताबिक जिला स्तर तक 95 प्रतिशत किताबें पहुंच चुकी हैं लेकिन स्कूलों तक केवल 70 प्रतिशत का ही वितरण दर्ज हुआ है। यानी हर तीन में से एक छात्र अब भी पूरी पाठ्यपुस्तकों का इंतजार कर रहा है। जिले में इस वर्ष 8 लाख 26 हजार 457 पाठ्यपुस्तकों की मांग दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार 8 लाख 3 हजार 362 (97 प्रतिशत) किताबें ट्रांसपोर्ट बुक सेंटर (टीबीसी) से भेजी जा चुकी हैं। इनमें से 7 लाख 83 हजार 314 (95 प्रतिशत) किताबें जिला स्तर तक भी पहुंच गईं। लेकिन स्कूलों तक पहुंची पुस्तकों की संख्या 5 लाख 76 हजार 151 (70 प्रतिशत) ही दर्ज है। यानी जिला स्तर पर उपलब्ध करीब दो लाख से अधिक किताबें अब भी विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच सकी हैं। इसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ रहा है जिनकी पढ़ाई अभी भी साझा किताबों, पुरानी पुस्तकों या शिक्षकों द्वारा ब्लैकबोर्ड पर लिखाए जा रहे नोट्स के भरोसे चल रही है।
कागजों में तेज रफ्तार जमीन पर धीमी चाल
विमर्श पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि किताबों की आपूर्ति जिला स्तर तक लगभग पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद स्कूलों तक वितरण में 25 प्रतिशत का अंतर दिखाई देता है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किताबें जिला गोदामों से स्कूलों तक पहुंचने में क्यों अटक गईं। यदि किताबें उपलब्ध हैं तो क्या ब्लॉक स्तर पर वितरण धीमा है? क्या परिवहन व्यवस्था में देरी हुई? क्या स्कूलों ने किताबें प्राप्त करने के बाद पोर्टल पर समय पर एंट्री नहीं की? या फिर वितरण व्यवस्था की निगरानी कमजोर रही? इन सवालों का जवाब शिक्षा विभाग को देना होगा।
संभाग में भी अलग-अलग तस्वीर
रीवा संभाग के आंकड़े बताते हैं कि सभी जिलों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं है। सिंगरौली ने स्कूलों तक 100 प्रतिशत पाठ्यपुस्तकें पहुंचाकर सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। सीधी में स्कूल स्तर पर 85 प्रतिशत और रीवा में 79 प्रतिशत वितरण दर्ज हुआ है। इसके मुकाबले सतना 70 प्रतिशत के साथ सबसे पीछे रहने वाले जिलों में शामिल है। यह तुलना बताती है कि समस्या केवल किताबों की उपलब्धता की नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर वितरण व्यवस्था की भी है।
शुरूआती पढ़ाई पर असर
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार शैक्षणिक सत्र के शुरूआती सप्ताह सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान नए पाठ्यक्रम की नींव रखी जाती है। यदि विद्यार्थियों को समय पर किताबें नहीं मिलतीं तो उनकी पढ़ाई की गति प्रभावित होती है। कमजोर और ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र इसका सबसे अधिक नुकसान उठाते हैं, क्योंकि उनके पास निजी किताबें खरीदने का विकल्प भी नहीं होता।
विवरण संख्या प्रतिशत
कुल मांग 826457 100%
टीबीसी 803362 97%
जिला स्तर 783314 95%
स्कूलों को प्राप्त 576151 70%
नहीं पहुंचीं 2,50,306 30%
(9 जुलाई तक )


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