चितरंगी के सुखारा टोला में बारिश के बीच करीब 100 बच्चे उफनती नदी पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं। वहीं झखरावल में नदी में बहे युवक पवन कोल का शव दो किलोमीटर दूर मिला।
सीधी जिले में स्कूल खुलने के बावजूद स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है। ओवरलोड ऑटो, अनफिट बसें और बिना सुरक्षा सुविधाओं वाले वाहन बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
सीधी के रामपुर नैकिन में आंगनबाड़ी केंद्र के पास लगी आग में अफरा-तफरी मच गई, कार्यकर्ता ने सात बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, फायर ब्रिगेड और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाया गया।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के कई सरकारी स्कूल खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। बरसात के दिनों में बच्चों की जान खतरे में है, लेकिन ना मरम्मत हुई और ना ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई। दीवारों की दरारें, टपकती छत और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण तक नहीं कर रहे।
सतना जिले के पीएम श्री स्कूलों की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। सरकारी नामकरण से भले ही स्कूलों को नया नाम मिला हो, लेकिन हालात वही पुराने हैं- जर्जर भवन, गिरता प्लास्टर, टपकती छतें और लबालब पानी। जानिए कैसे 1547 स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा खतरे में है और प्रशासन अब तक आंखें मूंदे बैठा है।
सतना जिले में स्कूली बच्चों को ई-रिक्शा से ढोया जा रहा है, जिसमें न तो कोई सुरक्षा व्यवस्था है, न मानक। ओवरलोडिंग और खराब सड़कों के चलते बच्चों की जान खतरे में है, लेकिन प्रशासन अब तक चुप है। भोपाल और जबलपुर में प्रतिबंध के बावजूद सतना में कार्रवाई न होना गंभीर सवाल खड़े करता है।


















