सतना जिले में 99 प्रतिशत पुस्तकें पहुंचने के बावजूद विद्यार्थियों तक केवल 86 प्रतिशत पाठ्यपुस्तकों का वितरण हो सका। एक लाख से अधिक किताबें अब भी लंबित हैं, जिस पर डीपीआई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में समीक्षा होगी।
सतना जिले में जून माह के आंगनवाड़ी खाद्यान्न का केवल 27 प्रतिशत उठाव दर्ज हुआ। जुलाई के तीन सप्ताह बाद भी 73 प्रतिशत आवंटन लंबित है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं।
सतना-मैहर में खरीफ सीजन के लिए खाद का पर्याप्त भंडारण होने के सरकारी दावों के बावजूद बिक्री केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें लगी हैं। आंकड़ों में उपलब्धता और वास्तविक वितरण के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
इंदौर के बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से संवाद किया। उन्होंने गौवंश संरक्षण, उर्वरक वितरण के डिजिटल फॉर्मूले और नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया।
सतना जिले में जुलाई के 14 दिन बीतने के बाद केवल 33.17 प्रतिशत राशन कार्डधारकों तक खाद्यान्न पहुंचा। जैतवारा सबसे आगे रहा, जबकि चित्रकूट में वितरण महज 3.75 प्रतिशत दर्ज होने से व्यवस्था पर सवाल उठे।
सतना में 95 प्रतिशत किताबें जिला स्तर तक पहुंचीं, लेकिन स्कूलों में केवल 70 प्रतिशत वितरण हुआ। हजारों विद्यार्थी अब भी पाठ्यपुस्तकों के इंतजार में हैं, जिससे नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
रीवा के सरकारी स्कूलों में नए सत्र के तीन महीने बाद भी विद्यार्थियों को पूरी किताबें नहीं मिलीं। हिंदी माध्यम की पुस्तकें अधूरी पहुंचीं, जबकि अंग्रेजी माध्यम के छात्र अब भी पुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं।
सतना के नागौद क्षेत्र में अज्ञात चोर 7.20 किलोमीटर बिजली तार और 17 पोल क्षतिग्रस्त कर गए। आठ ट्रांसफार्मरों की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कई गांवों और 60 से अधिक किसानों की बिजली बाधित हो गई।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (संशोधन) विधेयक 2026 का मसौदा जारी किया है। अब अंत्योदय अन्न योजना के तहत राशन का वितरण परिवार के बजाय प्रति व्यक्ति के आधार पर होगा। 13 जुलाई तक सुझाव आमंत्रित।
संभाग की 77 प्रतिशत उचित मूल्य दुकानों ने 90 प्रतिशत से अधिक राशन वितरण किया है, लेकिन 602 दुकानें लक्ष्य से पीछे हैं। सतना और रीवा में कई दुकानों पर वितरण 30 प्रतिशत से भी कम दर्ज हुआ।






















