मध्यप्रदेश में माननीय का रुतबा बरकरार रहेगा। अब ये शिकायत नहीं आएगी कि अफसर दफ्तरों के चक्कर कटवा रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन कर दिया है।

राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन कर दिया है।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में माननीय का रुतबा बरकरार रहेगा। अब ये शिकायत नहीं आएगी कि अफसर दफ्तरों के चक्कर कटवा रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन कर दिया है। दरअसल, अब मंत्रियों और विधायकों की सिफारिशों पर होने वाले तबादलों में अधिकारी टालमटोल नहीं कर पाएंगे। सीएमओ से जारी होने वाली ए-प्लस श्रेणी की नोटशीट पर विभाग के एसीएस और पीएस को समय सीमा के भीतर आदेश जारी करने होंगे। आदेश नहीं निकालने पर अधिकारियों को तीन दिन में सीएम कार्यालय को लिखित स्पष्टीकरण देना होगा। इस दौरान तबादला नीति के सभी प्रावधान शिथिल माने जाएंगे।
आदेश जारी करना अनिवार्य
मध्यप्रदेश में अब मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी होने वाली ए-प्लस नोटशीट की फाइलें विभागों में धूल नहीं फांकेंगी। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि तबादलों के लिए जारी होने वाली इन विशेष नोटशीट पर अपर मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव को तीन कार्यदिवस के भीतर आदेश जारी करना अनिवार्य होगा। साथ ही विधानसभा प्रश्नों और विभागीय बैठकों के समय को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
अफसरों की जवाबदेही तय
यदि कोई अधिकारी तबादला आदेश जारी नहीं करता है, तो उसे 3 दिन के भीतर इसका सही कारण सीएमओ को बताना होगा। साथ ही, उसे वैकल्पिक प्रस्ताव या अपनी टीप सीधे सीएमओ को भेजनी होगी। इससे साफ जाहिर है कि तबादले वाली नोटशीट को समय पर पूरा कराने की जिम्मेदारी अब सीधे एसीएस और पीएस की होगी।
माननीन ने बयां किया था दर्ज
यह कदम मंत्रियों और विधायकों की उन शिकायतों के बाद उठाया गया है, जिनमें उन्होंने तबादलों में हो रही भारी देरी का मुद्दा उठाया था। माननीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बताया था कि सीएमओ से ए-प्लस की नोटशीट जारी होने के बाद भी विभागों के जिम्मेदार अफार फाइलों को अटका कर रखते हैं और समय पर तबादला आदेश जारी नहीं करते।
अधिकारियों का बनेगा रिपोर्ट कार्ड
मंत्रालय से लेकर मैदानी स्तर तक के अधिकारियों का रिपोर्ट कार्ड मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग तैयार कर रहा है। एक जनवरी को कई अधिकारी पदोन्नत किए गए लेकिन इनकी पदस्थापना यथावत रखी गई है। 15 जनवरी को मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर, कमिश्नर, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत और स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की कांफ्रेंस बुलाई है। इसमें मैदानी अधिकारियों के कामकाज का आकलन होगा। इसके बाद तबादलों का सिलसिला प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि, कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी 21 फरवरी तक नहीं बदले जाएंगे, क्योंकि प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का काम चल रहा है।


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