सतना जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं, जिससे 1500 दैनिक मरीजों की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। दूसरी ओर संत मोतीराम स्वास्थ्य केंद्र नि:शुल्क उपचार देकर राहत पहुंचा रहा है।
सतना में भीषण गर्मी के दौरान हार्ट अटैक और हृदय रोगियों की संख्या बढ़ी है। जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि मई 2026 में सर्वाधिक 58 मरीज भर्ती हुए, जिनमें युवा भी शामिल हैं।
सतना जिला अस्पताल में सात माह की गर्भवती महिला ने सामान्य प्रसव से तीन बेटियों को जन्म दिया। कम वजन और समय पूर्व जन्म के कारण तीनों नवजातों को एसएनसीयू में भर्ती कर विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया है।
सतना जिला अस्पताल में प्रसूता के गर्भस्थ शिशु की मौत पर परिजनों ने उपचार और सिजेरियन में देरी का आरोप लगाया है। घटना के बाद प्रसूति सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
सतना जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खुल गई। मैहर से रेफर गर्भवती महिला को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं मिली, जिससे उसे पैदल लेबर रूम तक जाना पड़ा। वार्ड बॉय की अनुपस्थिति भी उजागर हुई।
सतना जिला अस्पताल में यातायात और अतिक्रमण सुधार के लिए प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। एंबुलेंस पार्किंग, वाहन जांच और अनावश्यक हूटर पर कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं।
सतना जिला अस्पताल में भीषण गर्मी के बीच बंद पंखे, पेयजल संकट और लंबी कतारों ने मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दस दिनों में दस हजार से अधिक मरीज पहुंचे, जबकि सुविधाएं अपर्याप्त बनी हुई हैं।
सतना जिला अस्पताल की नई ओपीडी में दो छात्राएं ताला लगने से अंदर फंस गईं। शोर मचाने पर कर्मचारियों ने उन्हें बाहर निकाला। घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
सतना जिला अस्पताल में एक युवक बाइक लेकर प्रथम तल स्थित आइसोलेशन वार्ड तक पहुंच गया। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे और दो सुरक्षा गार्डों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
सतना जिला अस्पताल में उप संचालक स्वास्थ्य वैभव जैन ने पांच घंटे तक वार्डों, ब्लड बैंक, ड्रग स्टोर और सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। दवाओं की उपलब्धता, रिकॉर्ड और चिकित्सा सेवाओं की गहन समीक्षा की।






















