सतना जिला अस्पताल में गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही और घूस मांगने के आरोप लगाए। चिकित्सक ने आरोपों से अलग पक्ष रखते हुए समय पर ऑपरेशन की सलाह देने का दावा किया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और कर्मचारियों की घोर लापरवाही का एक बेहद दुखद मामला सामने आया है। आरोप है कि गर्भवती महिला के इलाज में लापरवाही के कारण गर्भ के अंदर ही नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर जिला अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को कटघरे में लेकर खड़ा कर दिया है। इस सम्बंध में बताया गया है कि नागौद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजापुर गांव की निवासी पूनम पांडे को डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल लाया गया था जहां उन्हें समय से और उचित देखभाल न मिलने से यह घटना हुई। परिजनों का आरोप तो यहां तक है कि अस्पताल में उनसे पैसे मांगे गए।
क्या है मामला
अस्पताल में मौजूद मरीज की परिजन संगीता पांडेय ने बताया कि राजापुर (नागौद) निवासी पूनम पांडे को डिलीवरी के लिए 28 जुलाई की दोपहर जिला अस्पताल लाया गया था। शुरूआत में लेबर रूम की स्टाफ नर्स पूजा रानी की देखरेख में केस लिया गया था और आश्वासन दिया गया था कि पूरा ध्यान रखा जाएगा। 29 जुलाई की सुबह लगभग 10 बजे डॉक्टर समीष गुप्ता द्वारा गर्भवती को देखा और सब कुछ सामान्य (नॉर्मल) होने की बात कही गई। परिजनों ने आरोप लगते हुए कहा कि दूसरी बार परीक्षण में चिकित्सकों ने बताया कि लेबर पेन के चलते प्रसूता का दर्द बढ़ने पर और बच्चे का सिर दिखने के बावजूद स्टाफ ने ध्यान नहीं दिया। परिजनों का आरोप है कि बार-बार बुलाने और पैसे (घूस) देने के बावजूद भी कर्मचारियों ने समय पर सही देखभाल नहीं की।
लंच टाइम में तड़फती रही प्रसूता
परिजनों ने बताया कि 29 जुलाई की दोपहर 2 बजे लंच टाइम का हवाला देकर संबंधित स्टाफ मरीज को तड़पता छोड़कर चला गया और दूसरी चिकित्सक के आने की बात कही गई। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ ज्योति तिवारी के द्वारा देखा गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें पहले से इस केस के बारे में कोई जानकारी या हैंडओवर ही नहीं दिया गया था। परिजनों का कहना है कि यदि दूसरी मैडम समय पर न पहुंचतीं, तो नवजात के साथ-साथ प्रसूता (पूनम पांडे) की जान भी चली जाती। समय पर चिकित्सा सहायता न मिलने के कारण बच्चे की पेट के अंदर ही मौत हो गई। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब केस हाथ में लिया था तो पूरी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। अगर स्थिति संभाली नहीं जा रही थी तो समय रहते मना कर देते। घूस लेने के बाद भी मरीज पर ध्यान नहीं दिया गया और लंच के नाम पर मरीज को छोड़ दिया गया। घटना के बाद से पीड़ित परिवार सदमे में है और उन्होंने लापरवाही बरतने वाले चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।
मरीज के परिजन सामान्य प्रसव पर अड़े थे जबकि उन्हें बताया गया था कि गर्भस्थ शिशु की धड़कन नहीं चल रही है। परिजनों को तत्काल आॅपरेशन की सलाह दी गई थी। शाम की डियूटी डॉक्टर को भी जानकारी दी गई थी।
- डॉ. समीष गुप्ता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल


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