मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के यूट्यूबर उवेश खान के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज कर दिया है। जस्टिस हिमांशु जोशी की कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता के तहत वास्तविक हिंसा की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करना सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना नहीं है।

जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्रकारिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने रायसेन जिले के यूट्यूबर उवेश खान के खिलाफ पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा है कि किसी भी वास्तविक घटना या हिंसा की निष्पक्ष और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग करना कानूनन अपराध नहीं माना जा सकता।
यह फैसला हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकल पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पत्रकार घटित हो चुकी घटना का सच जनता के सामने लाता है, तो उसे सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
यह पूरा विवाद 6 सितंबर 2025 का है। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के अंतर्गत आने वाले सिलवानी कस्बे में गणेश विसर्जन जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान अचानक उपद्रव और हिंसक झड़प हो गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए थे।
उवेश खान, जो एक लोकल यूट्यूब न्यूज चैनल का संचालन करते हैं, उन्होंने इस हिंसक घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग की और उसका वीडियो अपने चैनल पर प्रसारित किया। रिपोर्ट सामने आने के बाद एक शिकायतकर्ता ने उन पर आरोप लगाया कि यह खबर भ्रामक है और इससे हिंदू समुदाय में भय, भ्रम तथा सांप्रदायिक तनाव फैल सकता है।
शिकायत के आधार पर सिलवानी थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए यूट्यूबर उवेश खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत मामला दर्ज कर लिया। यह धारा विभिन्न धर्मों, जातियों या समुदायों के बीच वैमनस्य, नफरत या शत्रुता बढ़ाने वाले कृत्यों से संबंधित है।
पुलिस की इस कार्रवाई को उवेश खान ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी और एफआईआर को रद्द करने की याचिका दायर की।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने मामले के सभी पहलुओं पर विचार किया। अदालत ने पाया कि जिस हिंसक घटना की रिपोर्टिंग उवेश खान ने की थी, वह वास्तव में घटित हुई थी और उस हिंसा के संबंध में पुलिस खुद पहले ही एक अलग एफआईआर दर्ज कर चुकी थी।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा पहले से स्वीकार की गई घटना की रिपोर्टिंग को सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का प्रयास नहीं माना जा सकता। स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकार का हवाला देते हुए अदालत ने उवेश खान के खिलाफ दर्ज एफआईआर को सिरे से खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में जहाँ एक तरफ पत्रकारों की स्वतंत्रता का बचाव किया, वहीं दूसरी तरफ उसकी सीमाओं को भी रेखांकित किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि:
तथ्यात्मक रिपोर्टिंग को संरक्षण: प्रेस की स्वतंत्रता के तहत पत्रकारों को वास्तविक और सटीक घटनाओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने का पूरा अधिकार है।
पूर्ण छूट (Absolute Immunity) नहीं: अदालत ने यह भी साफ किया कि यह सुरक्षा केवल प्रामाणिक और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग तक ही सीमित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि पत्रकारों को हर तरह के मामलों या गलत बयानी पर कानूनी कार्रवाई से पूर्ण छूट मिल जाएगी।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रायसेन के यूट्यूबर उवेश खान के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज कर दिया है। जस्टिस हिमांशु जोशी की कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्रकारिता के तहत वास्तविक हिंसा की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करना सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना नहीं है।
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