कभी-कभी सरकारी लापरवाही उन परिवारों को भी नहीं बख्शती जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी हो। इसका एक उदाहरण शौर्य चक्र से सम्मानित मोहन सिंह की विधवा का दशकों लंबा संघर्ष है, जिन्हें अपनी हक की स्पेशल फैमिली पेंशन पाने के लिए 26 साल तक इंतजार करना पड़ा और वह भी तब जब सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया।
सुबह से ही श्रद्धालुओं का उत्साह देखते बन रहा था। ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर में प्रवेश किया। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग और बच्चे हाथों में मां सरस्वती के चित्र और धार्मिक ध्वज लिए पहुंचे।
मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट है। लेकिन दुर्भाग्य से यहां बाघों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इससे पशु प्रेमी दावा कर रहे हैं कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए तो टाइगर स्टेट का दर्जा छिन जाएगा। यहां सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डेढ़ साल में 64 बाघों की मौत दर्ज की गई है।















