राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। चीन, भारत और यूएई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

वॉशिंगटन. स्टार समाचार वेब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वैश्विक व्यापार जगत में एक बड़ा धमाका करते हुए उन सभी देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जो ईरान के साथ किसी भी प्रकार का कारोबार कर रहे हैं। ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' के जरिए स्पष्ट किया कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान आंतरिक रूप से गंभीर संकट से गुजर रहा है। वहां जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, वहीं आर्थिक मोर्चे पर ईरानी मुद्रा 'रियाल' का मूल्य लगभग शून्य के करीब पहुंच गया है।
अमेरिका के इस नए फैसले का सबसे बड़ा असर भारत, चीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं। भारत के संदर्भ में स्थितियां अधिक चिंताजनक हैं। अमेरिका पहले ही भारत पर रूस से तेल आयात और रेसिप्रोकल पॉलिसी के तहत 50% टैरिफ लगा चुका है। यदि ईरान के साथ व्यापार को लेकर यह नया 25% टैरिफ भी जुड़ जाता है, तो अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले भारतीय सामानों पर कुल टैरिफ का बोझ बढ़कर 75% हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में टिकना लगभग नामुमकिन हो सकता है।
एक तरफ टैरिफ का दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत और अमेरिका के बीच आज ही एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील पर चर्चा होनी है। भारत की कोशिश है कि उस पर लगे मौजूदा 50% टैरिफ को घटाकर 15% के स्तर पर लाया जाए। साथ ही, रूस से कच्चा तेल खरीदने पर लगने वाली 25% पेनल्टी को भी पूरी तरह खत्म करने की मांग की जा रही है। भारतीय अधिकारियों की नजर इस बात पर है कि क्या ईरान से जुड़े इस नए फैसले का असर आज होने वाली वार्ता पर पड़ेगा।
राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ लगाने के विशेषाधिकार को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट कल अपना महत्वपूर्ण फैसला सुना सकता है। ट्रम्प ने इस संबंध में अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि यदि कोर्ट उनकी शक्तियों को सीमित करता है, तो अमेरिका के लिए पूर्व में वसूले गए टैरिफ को लौटाना एक प्रशासनिक और आर्थिक दुःस्वप्न जैसा होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि टैरिफ की वापसी में सालों लग सकते हैं, जो देश को आर्थिक अस्थिरता की ओर धकेल सकता है।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिबंधों के बावजूद ईरान का वैश्विक व्यापार करीब 140 अरब डॉलर का है। वह मुख्य रूप से कच्चा तेल, पेट्रोकेमिकल्स और स्टील का निर्यात चीन, यूएई और भारत जैसे देशों को करता है। अमेरिकी प्रशासन का ताजा रुख इन आपूर्ति श्रृंखलाओं को पूरी तरह से बाधित करने और ईरान पर आर्थिक दबाव को चरम तक ले जाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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