राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में सहयोग न मिलने पर इटली, स्पेन और जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की चेतावनी दी है। जानें मेलोनी और मर्ज से विवाद का पूरा कारण।

यूरोप में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की व्यापक समीक्षा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे समीक्षा
इटली और स्पेन पर क्यों बरसे डोनाल्ड ट्रंप
वाशिंंगटन । स्टार समाचार वेब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। इस समीक्षा के केंद्र में अब इटली और स्पेन जैसे देश भी आ गए हैं, जिन्हें ट्रंप ने स्पष्ट रूप से सैन्य वापसी की धमकी दी है। इस तनाव की मुख्य वजह ईरान में जारी अमेरिकी सैन्य अभियान पर इन देशों का रुख है।
एक हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने संकेत दिया कि वह "शायद" इन देशों से सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार करेंगे। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "मैं ऐसा क्यों न करूं? इटली ने हमारी कोई मदद नहीं की है और स्पेन का रवैया तो बेहद खराब रहा है।" ट्रंप इन देशों द्वारा ईरान अभियान की आलोचना किए जाने से बेहद खफा हैं।
कभी ट्रंप की करीबी सहयोगी रहीं इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी के साथ अब रिश्तों में कड़वाहट आ गई है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
ईरान संघर्ष से दूरी: मेलोनी ने इस युद्ध में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया, जिसे ट्रंप ने "साहस की कमी" बताया।
पोप लियो पर टिप्पणी: ट्रंप द्वारा पोप लियो के खिलाफ की गई "अस्वीकार्य" टिप्पणियों की मेलोनी ने खुलकर आलोचना की।
हवाई अड्डे के उपयोग पर रोक: मेलोनी सरकार ने ईरान युद्ध के लिए हथियार ले जा रहे अमेरिकी विमानों को सिसिली के हवाई अड्डे का उपयोग करने से रोक दिया, क्योंकि अमेरिका ने आवश्यक आधिकारिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया था।
सिर्फ इटली और स्पेन ही नहीं, ट्रंप के निशाने पर जर्मनी भी है। 29 अप्रैल को ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिका जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों की संख्या कम करने की समीक्षा कर रहा है और इस पर जल्द ही फैसला लिया जाएगा।
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ भी ट्रंप का विवाद ईरान युद्ध को लेकर ही है। जर्मनी ने भी इस युद्ध में अमेरिका की मदद करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं, जिससे ट्रंप नाराज हैं।
कंग्रेशनल रिसर्च सर्विस के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 तक जर्मनी में 35,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात थे। हालांकि, हालिया जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि वर्तमान में यह संख्या बढ़कर लगभग 50,000 के आसपास पहुंच चुकी है। अब ट्रंप की इस नई घोषणा के बाद इन सैनिकों की वापसी पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

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