सतना जिला अस्पताल में 9 जुलाई को भर्ती कराए गए जुड़वा नवजातों की इलाज के दौरान भूख और कुपोषण से मौत हो गई। मां अंचल शुक्ला अस्पताल में भर्ती के बाद रहस्यमय तरीके से लापता रही, जिससे बच्चों को मां का दूध भी नहीं मिल सका। दो दिन तक शव बिना परिजनों के मर्चुरी में रखे रहे।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
9 जुलाई को जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए दोनो जुड़वा बच्चों की मौत हो गई है। एक मासूम रविवार की रात तो दूसरे मासूम की मौत सोमवार की देर रात हुई। दोनों जुड़वा बच्चों की मौत थे जिन्हें मां का दूध भी नसीब नहीं हो सका। दुधमुहे जुड़वा बच्चों की जब मां की तलाश की गई तो हैरान कर देने वाली जानकारी सामने आई कि जुड़वा बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद मां अंचल शुक्ला गायब है। परिजनों के अभाव में दो दिनों तक बच्चों का शव मर्चुरी (पीएम हाउस )में रखा रहा। पुलिस की तत्परता से मंगलवार की शाम को बच्चों के परिजनों को ढूढ़कर परिजनों को शव सौपा गया।
क्या है मामला
बताया जाता है कि रामनगर थानांतर्गत ककरा गांव निवासी शेषमणि शुक्ला की 30 वर्षीया पत्नी अंचल शुक्ला को प्रसव पीड़ा हुई जिसके बाद घर में ही उसका प्रसव हुआ और उसने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया, लेकिन प्रसूता को अधिक ब्लीडिंग होने के चलते उसे व उसके जुड़वा पास के पीएचसी रामनगर ले जाया गया। 9 जुलाई को रामनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़वां नवजातों व प्रसूता को सतना जिला अस्पताल रेफर किया गया था। जुड़वा बच्चों की प्रारंभिक जांच में 900 ग्राम से एक किलो का वजन कम पाए जाने पर उन्हे एसएनसीयू वार्ड में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। जुड़वा बच्चों को जिस महिला ने भर्ती कराया था उसने अस्पताल प्रबंधन को नवजातों की मौसी होना बताया था।
इलाज के दौरान तोड़ा दम
एसएनसीयू में भर्ती किए गए दोनो मासूमों का इलाज चल ही रहा था कि रविवार की देर रात जुड़वा बच्चे में से एक की मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मां की तलाश की लेकिन लेकिन दी गई जानकारी व मोबाइल नंबरों से संपर्क न होने के कारण सुराग नहीं लग सका। 20 जुलाई को इलाज के दौरान एक नवजात की मौत होने के बाद प्रबंधन ने फिर से परिजनों को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन कोई पता नहीं चला। तब जाकर एसएनसीयू में पदस्थ चिकित्सक डॉ. योगेश मिश्रा ने पुलिस को सूचना दी। अंतत: पुलिस हरकत में आई और मंगलवार 22 जुलाई को बच्चों के जैविक माता-पिता को रामनगर से खोजकर अस्पताल लाया गया और कोल्ड बाक्स में रखे गए शवों को परिजनों को सौंपा गया।
घर में प्रसव, जिला अस्पताल में काटा गया नाड़ा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रसूता का प्रसव घर में ही हुआ था, लेकिन प्रसूता को अधिक ब्लीडिंग होने के चलते उसे पास के पीएचसी रामनगर ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने प्रसूता में खून की कमी के चलते उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में प्रसूता के कॉर्ड काटकर बच्चों को अलग किया गया। प्रसूता को मेटरनिटी वार्ड में शिफ्ट किया गया। वार्ड में बच्चों की प्रारंभिक जांच में बच्चों का वजन कम होना पाया गया जिन्हे एसएनसीयू वार्ड में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। बताया गया कि प्रसूता के साथ कोई आशा भी नहीं आई थी जिससे जानकारी जुटाने में समस्या आ रही थी।
अंचल को मैटरनिटी वार्ड में जबकि जुड़वा बच्चों के गंभीर कुपोषित होने के कारण एसएनसीयू वार्ड में भर्ती कराया गया था। दोनो की 24 घंटे में हुई मौत के बाद मंगलवार को परिजन पहुंचे जिनके सुपुर्द दुधमुहे बच्चे किए गए हैं।
डॉ. विजेता राजपूत, एसएनसीयू प्रभारी

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