US Senate: अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला प्रस्ताव 50-47 से पास हो गया है। अब ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी। जानें पूरा मामला।

वाशिंगटन। स्टार समाचार वेब
अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला एक बड़ा प्रस्ताव पास हो गया है। इस ऐतिहासिक वोटिंग में विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट्स को सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी का भी साथ मिला, जहाँ 4 रिपब्लिकन सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जबकि 3 सांसद वोटिंग से नदारद रहे।
यह प्रस्ताव 50-47 के अंतर से पास हुआ है। हालांकि, इसे पूरी तरह कानून का रूप लेने के लिए अभी कई और कानूनी प्रक्रियाओं और चरणों से गुजरना होगा। अगर यह प्रस्ताव अंतिम रूप से कानून बन जाता है, तो ट्रम्प सरकार को ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या युद्ध को जारी रखने के लिए अमेरिकी कांग्रेस (संसद) से अनिवार्य मंजूरी लेनी होगी।
इस प्रस्ताव के पास होने के बावजूद इसके कानून बनने की राह इतनी आसान नहीं है। अभी अमेरिकी संसद के उच्च सदन (सीनेट) में इस पर अंतिम वोटिंग होनी बाकी है। इसके बाद इसे रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत वाले निचले सदन 'हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स' से मंजूरी दिलानी होगी।
इन सब प्रक्रियाओं के बाद भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के पास इस प्रस्ताव के खिलाफ वीटो (Veto) करने का अधिकार सुरक्षित है। यदि राष्ट्रपति वीटो का इस्तेमाल करते हैं, तो उस वीटो को रद्द करने के लिए सीनेट और हाउस दोनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत की आवश्यकता होगी, जिसे मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी मुश्किल माना जा रहा है।
अमेरिकी संसद के सीनेट में मंगलवार शाम को ईरान युद्ध रोकने के मुद्दे पर एक अहम बैठक हुई। इस वोटिंग को विपक्ष के लिए एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है। विपक्षी नेताओं का साफ कहना है कि अमेरिका में युद्ध शुरू करने या सेना को किसी मिशन पर भेजने का संप्रभु अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि संसद के पास होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिकी संविधान में भी इसी व्यवस्था का प्रावधान है।
इस प्रस्ताव को वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन लेकर आए हैं। सीनेट में बहस के दौरान उन्होंने सख्त लहजे में कहा अभी जब चारों तरफ युद्धविराम (Ceasefire) की बात हो रही है, तब राष्ट्रपति ट्रम्प को संसद के सामने आकर देश को अपनी आगामी रणनीति बतानी चाहिए। युद्ध शुरू करने का अधिकार संसद के पास है, सिर्फ अकेले राष्ट्रपति के पास नहीं।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति का बचाव किया है। व्हाइट हाउस का कहना है कि ट्रम्प ने अमेरिकी सुरक्षा और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत ही यह कार्रवाई की है।
अमेरिकी कानून के मुताबिक, देश का कोई भी राष्ट्रपति बिना संसद (कांग्रेस) की पूर्व मंजूरी के अधिकतम 60 दिनों तक ही किसी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का संचालन कर सकता है। इस तय समय-सीमा के बीत जाने के बाद राष्ट्रपति के पास तीन ही रास्ते बचते हैं। पहला ट्रंप चल रहे युद्ध को तुरंत समाप्त करें, फिर आगे की कार्रवाई के लिए कांग्रेस से औपचारिक अनुमति लें या सेना की सुरक्षित वापसी के लिए संसद से 30 दिनों की अतिरिक्त मोहलत की मांग करें।

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