विधानसभा चुनाव 2028 की तैयारी में भाजपा ने विंध्य क्षेत्र में बूथ स्तर पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। कई सीटों पर पार्टी का वोट प्रतिशत अभी भी 40 प्रतिशत से कम है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
विधानसभा चुनाव को अभी भले ही दो साल से ज्यादा का समय बकाया हो लेकिन सत्तारूढ दल भाजपा ने इसकी तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं। पार्टी का सारा जोर बूथ मैनेजमेंट पर है, पार्टी का पहला टारगेट हर बूथ पर कम से कम 50 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल करना है। इसके लिए पार्टी ने वोटरों को तीन श्रेणी में बांट कर उन्हें अपने साथ जोड़ने का लक्ष्य बनाया है। पार्टी द्वारा हर बूथ में 50 फीसदी वोट के टारगेट को पिछले विधानसभा चुनाव के परिणामों से जोड़कर देखें तो विंध्य की 30 में 7 ऐसी सीटें हैं जिनमें पार्टी को 40 फीसदी से कम वोट मिले हैं। एक सीट में 35 फीसदी तो 6 में 35 से 40 फीसदी के बीच वोट मिले हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को जिन पांच सीटों पर पराजय का सामना करना पड़ा था, उनमें से एक सीट पर भाजपा को 40 फीसदी वोट मिले थे। मैहर जिले की अमरपाटन विधानसभा में प्रत्याशी को भले ही पराजय का सामना करना पड़ा हो लेकिन प्रत्याशी को 40 फीसदी वोट मिले थे।
नागौद - सिरमौर में लगातार जीत फिर भी नहीं बढ़ रहा वोट प्रतिशत
सतना जिले की नागौद और रीवा की सिरमौर विधानसभा सीट ऐसी हैं जहां भाजपा लगातार विधानसभा चुनाव तो जीत रही है, पर यहां पार्टी का वोट प्रतिशत पिछले तीन तीन चुनावों से 40 फीसदी के नीचे ही है। नागौद में दो चुनावों में तो पार्टी को 35 फीसदी से भी कम वोट मिले हैं जिसमें एक चुनाव में पार्टी को जीत और एक में हार का समाना करना पड़ा है। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 30.95 प्रतिशत वोट मिले थे और पार्टी को हार का समाना करना पड़ा था तो 2018 के चुनाव में यहां भाजपा उम्मीदवार को 32.52 फीसदी वोट पर ही संतोष करना पड़ा। इसी तरह सिरमौर विधानसभा सीट में भाजपा को पिछले तीन चुनावों से जीत मिल रही है पर वोट प्रतिशत की बात करें तो 2013 में भाजपा को 34.19 और 2018 में भाजपा को 38.95 फीसदी वोट मिले थे।
विंध्य से 4 मंत्री, 2 पर 55 फीसदी से ज्यादा लोगों का भरोसा
डॉ. मोहन यादव मंत्रिमंडल में विंध्य से चार विधायकों को मंत्री बनाया गया है। इनको 2023 के विधानसभा चुनाव में मिले मतों की बात करें तो इनमें से दो पर तो उनकी विधानसभा के 55 फीसदी से ज्यादा लोगों ने भरोसा जताया है। जिन दो मंत्रियों को पिछले चुनाव में 55 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं, उनमें चितरंगी विधायक राधा सिंह एवं कोतमा विधायक दिलीप जायसवाल शामिल हैं। जबकि डिप्टी सीएम व रीवा विधायक राजेन्द्र शुक्ल को 51 फीसदी वोट मिले हैं तो रैगांव विधायक प्रतिमा बागरी को लगभग 50 फीसदी वोट। कुल मिलाकर विंध्य से पार्टी के चारों मंत्रियों को 50 फीसदी के करीब व उससे ज्यादा मिले थे। आगामी चुनाव में इस वोट बैंक को बनाए रखना इनके सामने एक बड़ी चुनौती होगी।
इन्हें भी मिले 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट
भाजपा के जिन और विधायकों को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले हैं, यदि उनकी बात की जाए तो सीधी से पहली बार की विधायक और पूर्व सांसद रीति पाठक, मनगवां से पहली बार के विधायक नरेन्द्र प्रजापति, जैतपुर विधायक जय सिंह मरावी, जय सिंह नगर विधायक व पार्टी की प्रदेश उपाध्यक्ष मनीषा सिंह एवं अनूपपुर से पार्टी के वरिष्ठ विधायक बिसाहूलाल सिंह शामिल हैं। इन सबके अलावा 49 फीसदी वोट पाने वाले विधायकों की बात करें तो उनमें राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के अलावा बांधवगढ़ के विधायक शिव नारायण सिंह, ब्यौहारी से दूसरी बार के विधायक शरद कोल, सिहावल विधायक विश्वामित्र पाठक शामिल हैं।
8 में 40 से 45 तो 7 में 45 से 50 फीसदी वोट मिले
विंध्य की 30 में से 15 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा उम्मीदवारों को 40 से 50 फीसदी वोट मिले। इन 15 में से 8 सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों को 40 से 45 फीसदी तो सात सीटों पर 45 से 50 फीसदी के करीब वोट मिले हैं। जबकि 8 विधानसभा सीटें सीटें ऐसी हैं जिनमें भाजपा विधायकों को 50 से 60 फीसदी तक वोट मिले हैं, इन 8 में से 5 में 50 से 55 और तीन सीटों में 55 से 60 फीसदी के बीच वोट भाजपा विधायकों को मिले हैं।


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