गुजरात की अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट ने पारिवारिक विवाद और संपत्ति के अधिकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सास-ससुर की स्व-अर्जित संपत्ति को बहू के लिए साझा घर नहीं माना जा सकता।

अहमदाबाद सिविल कोर्ट ने 80 के दशक की संपत्ति पर पिता के मालिकाना हक को माना सही
अदालत ने दंपती को घर खाली करने के लिए दिए 90 दिन, पोती पर लागू नहीं होगा आदेश
अहमदाबाद। स्टार समाचार वेब
गुजरात की अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट ने पारिवारिक विवाद और संपत्ति के अधिकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सास-ससुर की स्व-अर्जित संपत्ति को बहू के लिए साझा घर नहीं माना जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने एक बुजुर्ग के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके बेटे और बहू को घर से बेदखल करने का आदेश जारी किया है। दरअसल, बुजुर्ग पिता ने बेटे और बहू के लगातार होते झगड़ों से परेशान होकर साल 2013 में अदालत का दरवाजा खटखटाया था। 13 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार फैसला बुजुर्ग के पक्ष में आया। सिटी सिविल जज वीए धाधल ने बेटे-बहू को तीन माह में घर खाली करने का निर्देश दिया है।
एक नजर में जान लें पूरा मामला
बुजुर्ग के बेटे और बहू की शादी 2002 में हुई थी। मकान के ग्राउंड फ्लोर पर बेटा, बहू और उनकी बेटी रहते हैं, जबकि बुजुर्ग पहली मंजिल पर रहते हैं। पति-पत्नी के आपसी विवाद के कारण दोनों अलग-अलग कमरों में रहने लगे थे और बाद में बेटे ने तलाक की अर्जी भी दाखिल कर दी थी। रोज-रोज के क्लेश से तंग आकर बुजुर्ग ने अपने स्व-अर्जित मकान से बेटे-बहू को बेदखल करने की याचिका दायर की। बुजुर्ग का तर्क था कि यह संपत्ति उन्होंने 1980 के दशक में अपनी मेहनत की कमाई से खरीदी थी और इसके एकमात्र मालिक वही हैं। बार-बार कहने के बावजूद बेटा और बहू घर खाली करने को तैयार नहीं थे।
बहू का आरोप और कोर्ट का रुख
बुजुर्ग के बेटे ने तो मुकदमे का विरोध नहीं किया, लेकिन बहू ने आरोप लगाया कि यह याचिका उसके पति और ससुर की मिलीभगत से दायर की गई है ताकि वैवाहिक विवाद में उस पर दबाव बनाया जा सके। बहू का कहना था कि यह उसका ससुराल वैवाहिक घर है और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत उसे अपनी बेटी के साथ यहां रहने का अधिकार है। हालांकि, अदालत ने दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर माना कि संपत्ति का पूरा मालिकाना हक बुजुर्ग का ही है। इसे खरीदने में बेटे-बहू का कोई आर्थिक योगदान नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
सिटी सिविल कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के नजीर का हवाला देते हुए साफ किया कि बुजुर्ग सास-ससुर की निजी संपत्ति पर घरेलू हिंसा कानून के तहत बहू का साझा घर का अधिकार दावा मान्य नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि बेदखली का यह आदेश बेटा-बहू की बालिग हो चुकी बेटी (पोती) पर लागू नहीं होगा, क्योंकि दादा ने अपनी पोती के खिलाफ बेदखली की कोई मांग या राहत नहीं मांगी थी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य के पूर्व पर्यटन मंत्री और प्रसिद्ध गायक-नेता इंद्रनील सेन से जुड़े परिसरों पर छापामार कार्रवाई की। ईडी की टीमों ने पूरे शहर में एक साथ कार्रवाई करते हुए कुल 15 परिसरों और 10 प्रमुख ठिकानों की गहन तलाशी ली।
गुजरात की अहमदाबाद सिटी सिविल कोर्ट ने पारिवारिक विवाद और संपत्ति के अधिकार से जुड़े एक महत्वपूर्ण केस में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सास-ससुर की स्व-अर्जित संपत्ति को बहू के लिए साझा घर नहीं माना जा सकता।
न्याय के इतिहास में संवेदनशीलता और मानवीय चेतना की एक अनूठी मिसाल सामने आई है। दिल्ली की ट्रायल कोर्ट की विशेष जज रजनी रंगा ने 10 साल की यौन शोषण पीड़िता बच्ची के केस में फैसला सुनाने के बाद उसके नाम एक बेहद भावुक और खास पत्र लिखा।
एक दशक की प्रशासनिक सेवा छोड़ चुकीं पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल अब राजनीति के मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। उनके ताजा वीडियो संदेश ने संकेत दिए हैं कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय अपनी अलग राजनीतिक राह बनाने का फैसला किया है।
आगामी त्योहारों और शादियों के सीजन की तैयारी कर रहे आम परिवारों के लिए बाजार से एक बेहद राहत भरी खबर आई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, आज यानी सोमवार को सोने और चांदी दोनों के दामों में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर (MDR) शुल्क लगाने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई।
TRAI के नए टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन, 2026 से प्रीपेड यूजर्स को बड़ी राहत मिली है। अब 28 की जगह 30 दिन की वैलिडिटी वाले प्लान्स मिलेंगे। जानिए राघव चड्ढा की इस पर क्या प्रतिक्रिया है।
देश में वर्ष 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों और विधायकों ने अपनी राजनीतिक पार्टी बदली है। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं। चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच की नवीनतम रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
केरलम के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बड़ा दावा किया है। थॉमसन का कहना है कि जब ज्ञानेश कुमार आईएएस अधिकारी थे, तब उन्होंने उन्हें भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था।
उत्तर और मध्य भारत में मौसम के बिगड़े मिजाज और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से केदारनाथ यात्रा रोकनी पड़ी है। वहीं उत्तर प्रदेश में आंधी-बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बिहार में कोसी और गंडक नदियों के उफान से बाढ़ के हालात गंभीर बने हुए हैं।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह