मध्यप्रदेश शिक्षा मंडल परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए इस बार निगरानी व्यवस्था को और पुख्ता किया जा रहा है। प्रदेश में सीसीटीवी कैमरों की तीसरी आंख के जरिए परीक्षा केंद्रों पर हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में 200 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

इस साल परीक्षाओं में रिकॉर्ड संख्या में छात्र शामिल होंगे।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश शिक्षा मंडल परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए इस बार निगरानी व्यवस्था को और पुख्ता किया जा रहा है। प्रदेश में सीसीटीवी कैमरों की तीसरी आंख के जरिए परीक्षा केंद्रों पर हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में 200 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनमें राजधानी भोपाल के 8 केंद्र भी शामिल हैं। बोर्ड परीक्षाओं की शुरुआत 13 फरवरी से होने जा रही है। इस साल परीक्षाओं में रिकॉर्ड संख्या में छात्र शामिल होंगे। बोर्ड के मुताबिक 10वीं-12वीं मिलाकर 16.60 लाख विद्यार्थी परीक्षा देंगे। इनमें 9.53 लाख छात्र हाईस्कूल और 7.06 लाख छात्र हायर सेकेंडरी परीक्षा में बैठेंगे।
पेपर लीक से लिया सबक
माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से यह कदम पिछले वर्षों में सामने आए पेपर लीक और नकल के मामलों को देखते हुए उठाया गया है। जिन केंद्रों पर पहले अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सीसीटीवी कवरेज में लाया गया है। योजना के अनुसार 25 जनवरी तक कैमरे लगाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा, ताकि फरवरी से शुरू हो रही परीक्षाओं में इसका पूरा लाभ मिल सके।
कंट्रोल रूम से होगी निगरानी
परीक्षा केंद्रों की लाइव निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। परीक्षा सामग्री के स्ट्रॉन्ग रूम से लेकर परीक्षा कक्ष तक की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। जिला कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी और मंडल के अधिकारी जरूरत पड़ने पर किसी भी केंद्र की स्थिति तुरंत देख सकेंगे।
कम होंगे परीक्षा केंद्र, बढ़ेगा अनुशासन
इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में करीब 50 हजार विद्यार्थी कम शामिल होंगे, जिसके चलते परीक्षा केंद्रों की संख्या भी घटाई गई है। अधिकारियों का मानना है कि कम केंद्र और सीसीटीवी निगरानी से परीक्षा व्यवस्था ज्यादा अनुशासित और सुरक्षित बनेगी।
नकल रोकने के साथ जवाबदेही भी
सीसीटीवी कैमरों का उद्देश्य केवल नकल रोकना नहीं, बल्कि परीक्षा ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना भी है। किसी भी लापरवाही या गड़बड़ी की स्थिति में रिकॉर्डिंग के आधार पर कार्रवाई की जा सकेगी। शिक्षा विभाग का दावा है कि यह व्यवस्था भविष्य में सभी परीक्षा केंद्रों पर लागू की जाएगी।


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