दुनिया भर के शेयर बाजारों में मचे हाहाकार के बीच भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी छलांग लगाई, जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की हो। अमेरिकी बाजार में 19 महीनों की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट दर्ज की गई।

विदेशी निवेशकों ने की छह साल की सबसे बड़ी खरीदारी
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
दुनिया भर के शेयर बाजारों में मचे हाहाकार के बीच भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी छलांग लगाई, जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की हो। अमेरिकी बाजार में 19 महीनों की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजार भी बिकवाली के दबाव में रहे और इधर भारतीय बाजार ने भी गिरावट के साथ कारोबार की शुरुआत की। लेकिन कुछ ही घंटों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। घरेलू और विदेशी निवेशकों ने जमकर खरीदारी शुरू कर दी। सेंसेक्स 81,028 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 25,000 का अहम स्तर छू लिया। इस तेजी से निवेशकों की संपत्ति में एक ही कारोबारी सत्र के दौरान करीब 1 लाख करोड़ रुपए का इजाफा हुआ।
अमेरिकी बाजार में एआई की चिंता
भारतीय और अमेरिकी शेयर बाजारों के प्रदर्शन में इस बार सबसे बड़ा अंतर एआई से जुड़ी कंपनियों में निवेश का रहा। अमेरिका में पिछले कुछ समय से अक कारोबार और इससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश हो रहा है। चिप बनाने वाली कंपनियों से लेकर सर्वर, डेटा सेंटर और बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनियों तक में निवेशकों ने बड़ी रकम लगाई है। लेकिन अब इस तेजी को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों के बाद बाजार में जो उत्साह दिखाई दिया था, वह जल्द ही कमजोर पड़ गया। निवेशकों को आशंका है कि डेमोक्रेट्स एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सेंटर और बिजली की खपत को लेकर सख्त नियमों की मांग कर सकते हैं। इससे अक कंपनियों के विस्तार और निवेश की रफ्तार प्रभावित होने का खतरा है। इसी चिंता ने अमेरिकी टेक शेयरों में भारी बिकवाली कराई।
नैस्डैक में 19 महीने की सबसे बड़ी गिरावट
एआई से जुड़ी चिंताओं का असर अमेरिकी बाजारों में दिखा। नैस्डैक में 19 महीनों की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट दर्ज की गई। इस बिकवाली के कारण नैस्डैक 100 की कुल मार्केट वैल्यू से 2.5 ट्रिलियन डॉलर साफ हो गए। दरअसल, अक कारोबार में कंपनियां भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं। लेकिन अगर नियमन सख्त होता है या इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ती है, तो इस पूरी निवेश श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। भारत के लिए राहत की बात यह रही कि घरेलू शेयर बाजार की सीधी निर्भरता अमेरिकी अक इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर उतनी अधिक नहीं है।
विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी खरीदारी
भारतीय बाजार में आई तेजी के पीछे सबसे अहम वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की वापसी मानी जा रही है। पिछले कई महीनों से भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली करने वाले विदेशी निवेशकों ने अब खरीदारी का रुख अपना लिया है। विदेशी निवेशकों का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक भारतीय बाजार से पैसा निकालने के बाद अब वे फिर से घरेलू शेयरों में निवेश कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर अक से जुड़े निवेश को लेकर अनिश्चितता बढ़ने के बीच कुछ विदेशी पूंजी भारतीय बाजार की तरफ आती दिखाई दे रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतें हमेशा से एक बड़ा फैक्टर रही हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होता है, तो देश का आयात बिल बढ़ता है। इससे महंगाई, चालू खाते के घाटे और रुपए पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि इस साल महंगे कच्चे तेल को लेकर निवेशक चिंतित थे। लेकिन हाल ही में क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जिससे बाजार का सेंटिमेंट सुधरा। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म करने की दिशा में राजनीतिक घटनाक्रम आगे बढ़ सकते हैं।

दुनिया भर के शेयर बाजारों में मचे हाहाकार के बीच भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी छलांग लगाई, जिसकी शायद ही किसी ने उम्मीद की हो। अमेरिकी बाजार में 19 महीनों की सबसे बड़ी एक दिनी गिरावट दर्ज की गई।
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वैश्विक गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार में तूफानी तेजी। सेंसेक्स 1718 अंक चढ़कर 81,028 और निफ्टी 25,030 पर बंद। FII निवेश और कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों से बाजार 8 महीने बाद 80 हजार के पार निकला।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में तेजी दर्ज की गई। सुबह सेंसेक्स 168.03 अंक बढ़कर 74,319.07 के स्तर पर पहुंच गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 44.55 अंकों की बढ़त के साथ 22,981.30 पर कारोबार कर रहा था।
सोने और चांदी के बाजार में इस समय जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। त्योहारी सीजन के बीच वैश्विक और घरेलू बाजारों में कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे खरीदारों के लिए यह एक बड़ा मौका बनता जा रहा है।
दुनिया का सबसे बड़ा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस हैक हो गया है। इसे इतिहास की सबसे बड़ी क्रिप्टो हैकिंग माना जा रहा है। कंपनी ने डिपॉजिट और विड्रॉल पर अस्थायी रोक लगा दी है। क्रिप्टो एक्सपर्ट्स और एनालिटिक्स फर्म्स का अनुमान है कि इस हैकिंग में 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा यानी करीब 50 हजार करोड़ रुपए की क्रिप्टो चोरी हुई है।
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आज लंबे समय के बाद भारतीय शेयर बाजार में बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें स्थिर रखीं, जिससे बाजार को समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा।

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