पश्चिम एशिया संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय शेयर बाजार धराशायी। जानें सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट के 5 बड़े कारण और निवेशकों पर इसका असर।
भारतीय शेयर बाजार में बीते छह दिनों से जारी बिकवाली ने निवेशकों को 17 लाख करोड़ का चपत लगाई है। जानें ट्रंप की टैरिफ नीति और FII की बिकवाली ने कैसे बिगाड़ा बाजार का मूड।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को उठा-पटक का दौर जारी है। लाल निशान पर खुलने के बाद बाजार हरे निशान पर आ गया। दरअसल, भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। जहां सेंसेक्स की ओनेपिंग 84022.09 पर हुई।
भारतीय शेयर मार्केट की चमक नए साल के दूसरे दिन भी बरकरार रही। इस दौरान भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में हल्की बढ़त देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने ही पॉजिटिव नोट पर कारोबार की शुरुआत की।
भारतीय बाजार सोमवार को बढ़त के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स ने लंबी छलांग लगाई। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी में भी उछाल देखी गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 22 पैसे बढ़कर 89.45 पर पहुंच गया। दरअसल, भारतीय शेयर मार्केट में सप्ताह के पहले कारोबारी सेशन सोमवार के कारोबारी दिन की शुरुआत पॉजिटिव रही।
सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 25 पैसे गिरकर ₹90.74 के नए सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। व्यापार अनिश्चितता और FIIs की बिकवाली से रुपये पर दबाव।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की मार्च 2026 तक होने की संभावना पर भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 54 पैसे गिरकर 90.48 के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। आयातकों की मजबूत मांग, मेक्सिको टैरिफ और FII बिकवाली ने रुपये पर दबाव डाला।
भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने गुरुवार को सकारात्मक शुरुआत की, लेकिन एशियाई बाजारों में कमजोर रुझानों और लगातार विदेशी निधि निकासी के बीच जल्द ही शुरुआती बढ़त खोकर नकारात्मक दायरे में कारोबार करने लगे।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के तीसरे कारोबारी सेशन बुधवार के कारोबारी दिन की शुरुआत फ्लैट रही। प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स लाल निशान और एनएसई निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए ओपन हुए। हालांकि, शुरुआती कारोबार में ही बीएसई हरे निशान पर कारोबार करने लगा।
बेन एंड कंपनी और Grow की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, 2035 तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM ₹300 लाख करोड़ से अधिक हो जाएगा। जानें कैसे खुदरा निवेशक और डिजिटल पहुंच इस ग्रोथ को प्रेरित करेंगे।






















