भारत अब तेजी से बढ़ते देश में सुमार हो हो गया है। वहीं मध्यप्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर तेजी से बढ़ता शहर रोजगार के बडे केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। यह देश के साथ-साथ मप्र के लिए भी बड़ी उपलिब्ध मानी जा रही है। दरअसल, भारत में लगभग 70 प्रतिशत नौकरियां गैर-मेट्रो यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों में उपलब्ध हैं।
By: Arvind Mishra
Feb 26, 20261:42 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
भारत अब तेजी से बढ़ते देश में शुमार हो हो गया है। वहीं मध्यप्रदेश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर तेजी से बढ़ता शहर रोजगार के बडेÞ केंद्र के रूप में उभरकर सामने आया है। यह देश के साथ-साथ मप्र के लिए भी बड़ी उपलिब्ध मानी जा रही है। दरअसल, भारत में लगभग 70 प्रतिशत नौकरियां गैर-मेट्रो यानी टियर-2 और टियर-3 शहरों में उपलब्ध हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, अकेले टियर-3 शहरों में 40 प्रतिशत रोजगार है, जबकि टियर-2 शहरों में 29 प्रतिशत रोजगार मिलता है। इसके मुकाबले टियर-1 शहरों की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत है। स्टाफिंग फर्म क्वेस कॉर्प ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि बीएफएसआई और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर मिलकर टियर-3 शहरों के 45 प्रतिशत से अधिक कार्यबल को रोजगार दे रहे हैं, जबकि रिटेल सेक्टर की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत है।
श्रम बाजार को मिल रहा नया रूप
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कोयंबटूर, इंदौर, सूरत, वडोदरा, नोएडा और लखनऊ जैसे तेजी से बढ़ते शहर रोजगार के बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं। बढ़ती खपत और औद्योगिक कॉरिडोर इन शहरों के श्रम बाजार को नया रूप दे रहे हैं। क्वेस कॉर्प के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लोहित भाटिया ने कहा, यह आंकड़े दिखाते हैं कि रिटेल विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर और सेवाओं के विकेंद्रीकरण के कारण रोजगार के अवसर अब बड़े शहरों से बाहर फैल रहे हैं।
भारत में रोजगार तेजी से बढ़ रहा
रिटेल, बीएफएसआई, ईएमपीआई/मैन्युफैक्चरिंग, टेलीकॉम, एफएमसीजी/एफएमसीडी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर मिलकर अधिकांश नौकरियां प्रदान कर रहे हैं। यही सेक्टर टियर-2 और टियर-3 बाजारों में रोजगार वृद्धि के प्रमुख इंजन बने हुए हैं। इन क्षेत्रों में स्टोर आॅपरेशंस, सेल्स, प्लांट संचालन और सप्लाई चेन जैसे विभिन्न प्रकार के पद शामिल हैं। यह दर्शाता है कि टियर-2 और टियर-3 भारत में औपचारिक रोजगार तेजी से बढ़ रहा है।
55 फीसदी कर्मचारी कार्यरत
4.83 लाख कर्मचारियों पर आधारित इस अध्ययन में पाया गया कि 64 प्रतिशत कर्मचारी 30 वर्ष से कम आयु के हैं। साथ ही, 55 प्रतिशत कर्मचारी अपनी वर्तमान नौकरी में एक वर्ष से कम समय से कार्यरत हैं। यह दर्शाता है कि प्रोजेक्ट आधारित काम और मौसमी मांग के कारण रोजगार में तेजी से बदलाव हो रहा है।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज भी मजबूत
वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के दौरान 26,000 से अधिक नए यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) बनाए गए, जिससे पहले अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ), ईएसआई, बीमा और अन्य वैधानिक लाभों तक पहुंच मिली। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे देश में यूएएन बनाए जा रहे हैं, लेकिन साथ ही कार्यबल का बड़ा हिस्सा टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर स्थानांतरित हो रहा है। इससे यह साफ है कि गैर-मेट्रो क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने के साथ सामाजिक सुरक्षा कवरेज भी मजबूत हो रहा है।