मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रदेशभर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में बाइक और टैक्सी के इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निजी दो पहिया वाहनों और चार पहिया वाहनों का पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में व्यवसायिक उपयोग करना पूरी तरह से गैरकानूनी है।
By: Arvind Mishra
Feb 09, 20261:51 PM

इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने प्रदेशभर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में बाइक और टैक्सी के इस्तेमाल पर रोक लगाने के आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निजी दो पहिया वाहनों और चार पहिया वाहनों का पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में व्यवसायिक उपयोग करना पूरी तरह से गैरकानूनी है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने कहा कि ओला, उबर और रैपिडो जैसी कंपनियां निजी वाहनों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट की तरह इस्तेमाल कर रही हैं। कोर्ट का मानना है कि निजी नंबर प्लेट वाली गाड़ियां बिना कमर्शियल लाइसेंस और परमिट के यात्रियों को ढो रहे हैं, जो न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सुरक्षा के दृष्टि से खतरनाक भी हो सकता है।
निजी वाहनों का इस्तेमाल कर रही कंपनियां
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और परिवहन विभाग को आदेश जारी करते हुए कहा है कि वे कानून का सख्ती से पालन करें और अवैध रूप से चल रही बाइक-टैक्सी सेवाओं पर लगाम लगाएं। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 के तहत बिना वैध परमिट किसी भी वाहन का व्यवसायिक उपयोग दंडनीय है।
युवा पार्ट टाइम कमा रहे पैसा
दरअसल, मध्यप्रदेश के इंदौर, भोपाल जैसे बड़े शहरों में बड़ी संख्या में नौकरीपेशा, स्कूल, कॉलेज गोइंग यूथ हैं, जो आवागमन के लिए रैपिडो, ओला, उबर, जुगनू समेत अन्य सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों का सहारा ले रहे हैं। इन सेवाओं के लिए यह कंपनियां उन निजी बाइक और कार मालिकों की मदद ले रही है, जो व्यक्ति रूप से इस्तेमाल करने के लिए रजिस्टर्ड है। इन कंपनियों से जुड़कर अधिकांश युवा पार्ट टाइम के रूप में पैसा कमा रहे हैं।