बोत्सवाना से आज यानी शनिवार को विशेष विमान के जरिए चीते ग्वालियर एयरबेस पहुंचे। यहां से तीन वायुसेना के हेलीकॉप्टर के माध्यम से उन्हें कूनो के लिए रवाना किया गया। बोत्सवाना से पहले 8 चीते (6 मादा, 2 नर) आने थे, जबकि अब 9 चीते (6 मादा, 3 नर) भारत लाएग गए हैं।

बोत्सवाना से 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद 9 नए चीते भारत पहुंचे

ग्वालियर। स्टार समाचार वेब
बोत्सवाना से आज यानी शनिवार को विशेष विमान के जरिए चीते ग्वालियर एयरबेस पहुंचे। यहां से तीन वायुसेना के हेलीकॉप्टर के माध्यम से उन्हें कूनो के लिए रवाना किया गया। बोत्सवाना से पहले 8 चीते (6 मादा, 2 नर) आने थे, जबकि अब 9 चीते (6 मादा, 3 नर) भारत लाएग गए हैं। दरअसल, कूनो नेशनल पार्क में इतिहास के एक और पन्ने पर चीते के पंजों के निशान दर्ज हो गए। बोत्सवाना से 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद 9 नए चीते भारत पहुंचे और हेलीकॉप्टर से कूनो लाकर सीधे क्वारंटीन बाड़ों में शिफ्ट कर दिए गए। इसके साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई। नई खेप में 6 मादा और 3 नर चीते हैं। यही खेप सबसे बड़ी ताकत है। क्योंकि अब तक कूनो में नर चीतों का पलड़ा भारी था, लेकिन इस खेप ने संतुलन की तस्वीर बदल दी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे आने वाले महीनों में प्रजनन की रफ्तार तेज हो सकती है।

केंद्रीय मंत्री ने किया स्वागत
चीतों के स्वागत के मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव खुद कूनो पहुंचे। यादव ने क्रेट का हैंडल घुमाकर दो चीतों को क्वारंटीन बाड़े में रिलीज किया। बाकी चीतों को वन विभाग की प्रशिक्षित टीम ने तय प्रोटोकॉल के तहत शिफ्ट किया।
वयस्क चीतों में बदला समीकरण
कूनो में 12 महीने से अधिक उम्र के चीतों का गणित अब साफ तौर पर बदल गया है। पहले यहां 26 वयस्क चीते थे 14 नर और 12 मादा। अब 9 नए चीतों के जुड़ने से वयस्कों की संख्या 35 हो गई है। यानी अब मादाओं का पलड़ा थोड़ा आगे है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि मादाओं की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय टकराव कम होगा और शावकों के जन्म की संभावना बढ़ेगी।
एक माह तक रहेंगे क्वारंटीन
बोत्सवाना से लाए गए सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रहेगी। इसके बाद चीता स्टीयरिंग समिति तय करेगी कि किन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाए और किन्हें निगरानी में रखा जाए। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर चीते को जंगल में उतारने से पहले उसके मूवमेंट, शिकार प्रवृत्ति और इंसानी दखल से दूरी जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की जाती है।
मजबूत हुई जेनेटिक ताकत
अब कूनो एक पार्क नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक प्रयोगशाला बन चुका है। यहां नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के चीते मौजूद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अलग-अलग मूल के चीतों के मेल से इनब्रीडिंग का खतरा घटता है और शावकों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है। यही वजह है कि भारत में चीता पुनर्वास को लंबे समय तक टिकाऊ माना जा रहा है।
एक नजर में चीतों की संख्या


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