मध्य प्रदेश में दिवाली की रौनक भले ही बरकरार रही हो, लेकिन पटाखों की चमक ने हवा को जहरीला बना दिया है। राज्य के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक स्तर खतरनाक सीमा को छू गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो चला है। भोपाल और इंदौर जैसे महानगरों में प्रदूषण का कहर जारी है, जबकि अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

पटाखों की चमक ने हवा को जहरीला बना दिया है।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश में दिवाली की रौनक भले ही बरकरार रही हो, लेकिन पटाखों की चमक ने हवा को जहरीला बना दिया है। राज्य के प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक स्तर खतरनाक सीमा को छू गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो चला है। भोपाल और इंदौर जैसे महानगरों में प्रदूषण का कहर जारी है, जबकि अन्य जिलों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तर अस्वस्थ और खराब श्रेणी में पहुंच चुका है, जो स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। दरअसल, मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण का स्तर एक बार फिर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। एमपीपीसीबी के ताजा आंकड़ों के अनुसार, ग्वालियर, सागर और मंडीदीप जैसे शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक बेहद खराब स्थिति में है। विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में गिरावट, त्योहारों के बाद का धुआं, और हवा की कम गति इस प्रदूषण के पीछे मुख्य कारण है। मध्य प्रदेश के शहरों में हवा का यह हाल आने वाले दिनों में और बिगड़ सकता है। यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए।
ग्वालियर: इस समय मप्र का सबसे प्रदूषित शहर। यहां हवा बहुत खराब स्थिति में है। हृदय/सांस के रोगियों के लिए ये स्थिति खतरनाक हो सकती है।
सागर-मंडीदीप: तेजी से बढ़ते औद्योगिक क्षेत्रों में लगातार वायु गुणवत्ता बिगड़ती जा रही है। प्रशासन से कड़े कदमों की मांग उठ रही है।
भोपाल-इंदौर: आमतौर पर अपेक्षाकृत साफ रहने वाले शहर अब खराब एक्यूआई श्रेणी में पहुंच चुके हैं। कलेक्टरेट और अन्य व्यस्त इलाकों में प्रदूषण ज्यादा है।
दमोह: एकमात्र जिला है जहां एक्यूआाई 90 पर स्थिर है, जो मध्यम स्तर का संकेत देता है। ये आंकड़े दिवाली के ठीक बाद के हैं।
ग्वालियर 302 बहुत खराब
सागर 231 बहुत खराब
मंडीदीप 220 बहुत खराब
जबलपुर 206 खराब
पीथमपुर 180 खराब
बैतूल 167 खराब
इंदौर 161 खराब
भोपाल 156 खराब
देवास 137 मध्यम
कटनी 110 मध्यम


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