हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से

माननीय की कुंडली में 'शत्रु संपत्ति' ग्रहण!
सत्तारूढ़ दल के एक माननीय की जमीन-जायदाद की कुंडली इन दिनों परत-दर-परत खुलती जा रही है। अब तक उनके चर्चे स्थानीय सरकार के मुखिया से खटपट, फिर अचानक हुए शांति समझौते तक ही सीमित थे, लेकिन अब कहानी में 'शत्रु संपत्ति' की एंट्री ने सियासी गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। चर्चा है कि राजनीति के मामा के बेहद करीबी माने जाने वाले इस माननीय ने प्रशासनिक जुगाड़ के सहारे शत्रु संपत्ति का ऐसा खेल रचा कि अब विरोधियों को बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। अंदरखाने खबर है कि पूरी फाइल और दस्तावेजों का पुलिंदा जल्द ही सार्वजनिक करने की तैयारी चल रही है। अगर ऐसा हुआ, तो आने वाले दिनों में माननीय को सिर्फ विपक्ष ही नहीं, अपने ही सियासी कुनबे के तीखे सवालों का भी सामना करना पड़ सकता है।
बड़े साहब के तेवर अफसरों की बढ़ी धड़कनें
वैसे तो बड़े साहब संतुलित मिजाज के लिए जाने जाते थे, लेकिन इन दिनों उनका बदला-बदला अंदाज पूरे महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो या समीक्षा बैठक, साहब की तल्ख टिप्पणियां सुनकर फील्ड के अधिकारियों के चेहरे का रंग उड़ जाता है। हालात ऐसे हैं कि मीटिंग शुरू होने से पहले ही कई अफसर अपनी फाइलों से ज्यादा अपनी धड़कनों को संभालते नजर आते हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि साहब की नजर इतनी पैनी है कि वीडियो स्क्रीन के उस पार बैठे अधिकारी के हाव-भाव देखकर ही उनकी दिलचस्पी, अनिच्छा और तैयारी का अंदाजा लगा लेते हैं। उनकी तिरछी नजर का शिकार बन चुके अफसरों की फेहरिस्त भी धीरे-धीरे लंबी होती जा रही है। अब सियासी और प्रशासनिक गलियारों में एक नई चर्चा भी तैर रही है। लोग तेवरों का अपना-अपना गणित लगा रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर साहब की विदाई नजदीक होती, तो मिजाज कुछ नरम पड़ जाता। लेकिन जिस अंदाज में वे लगातार सख्ती दिखा रहे हैं, उससे कई जानकार उनके कार्यकाल में एक और विस्तार की संभावना के कयास लगाने लगे हैं। फिलहाल, बड़े साहब के तेवर महकमे में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं।
भू-अभिलेख खंगालने में जुटे 'जासूस'
इन दिनों सरकारी दफ्तरों से ज्यादा हलचल भू-अभिलेखों को लेकर दिखाई दे रही है। वैसे तो जमीन से जुड़ी लगभग सारी जानकारी सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, लेकिन अब उन रिकॉर्ड्स को खंगालने के लिए बाकायदा 'जासूसों' की फौज मैदान में उतर चुकी है। पोर्टल की परत-दर-परत छानबीन कर जमीनों की पूरी कुंडली निकाली जा रही है। अय्यारों की मानें तो मध्यभारत, महाकौशल और विंध्य के कई सियासी और रसूखदार चेहरों के भू-अभिलेखों पर इन दिनों माइक्रोस्कोप लगाया जा रहा है। कुछ खोजी दस्तों के हाथ ऐसी जमीनी कुंडलियां भी लग चुकी हैं, जिन्हें सही समय पर 'राजनीतिक अस्त्र' के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी बताई जा रही है। चर्चा है कि आने वाला महीना 'जमीन के जादूगरों' के लिए आसान नहीं रहने वाला। कई फाइलें अलमारियों से निकलकर सुर्खियों तक पहुंच सकती हैं। आखिर, बरैया के छत्ते में हाथ डालने का फैसला किया है, तो डंक झेलने के लिए भी तैयार रहना होगा।
सरकार का आईना और बड़े नेता की लताड़
आरोप-प्रत्यारोप राजनीति का स्थायी अध्याय है, लेकिन आरोपों की नींव तथ्यों पर टिकी हो, तो बात दूर तक जाती है। वरना जल्दबाजी में छोड़ा गया तीर कई बार घूमकर अपने ही तरकश में आ लगता है। कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों विपक्षी दल के संगठन के मुखिया का बताया जा रहा है। दिल्ली में आयोजित एक प्रेस वार्ता में पूरे आत्मविश्वास के साथ 500 करोड़ रुपये की जमीन एक निजी ट्रस्ट को आवंटित किए जाने का आरोप दाग दिया गया। बयान इतना बड़ा था कि राजधानी से लेकर प्रदेश तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई। लेकिन जब फाइलों की धूल झाड़ी गई, तो कहानी कुछ और ही निकली। जिस ट्रस्ट को निजी बताया जा रहा था, वह तो सरकारी निकला। दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि विपक्ष की ही सरकार के दौर में उनके मुख्यमंत्री उस ट्रस्ट के अध्यक्ष रह चुके थे। मामला यहीं तक रहता, तो शायद सियासी नुकसान सीमित रहता। लेकिन असली झटका तब लगा, जब उसी शहर में, जहां की जमीन को लेकर पूरा विवाद खड़ा किया गया था, विपक्ष के ही एक बड़े नेताजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ-साफ कह दिया कि जमीन तो सरकारी ट्रस्ट को ही आवंटित हुई है। बस, फिर क्या था सरकार ने पहले दस्तावेजों से आईना दिखाया और अब अपनी ही पार्टी के बड़े नेता ने न केवल सार्वजनिक मंच से पूरा होमवर्क खोल दिया, बल्कि इस तरह के आरोपों को दलाल मंडली का बताकर उन पर दलालों के घिरे होने की तरफ भी ईशारा कर दिया।
हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से
जिस समाज में भगवान के घर में चोरी करने वाला हाथ नहीं कांपता, वहां चिंता चोरी की राशि से अधिक उस संस्कार की होनी चाहिए, जिसकी मृत्यु चुपचाप हमारे सामने हो रही है।
जी हाँ, मेरी प्राथमिकता है कि योग बच्चों के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बने। मुझे खुशी है कि एनसीईआरटी ने इसे स्वीकार किया है।
हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से
सत्ता के शिखर पर दिखाई देने वाला चेहरा भले एक हो, पर उसकी सफलता के पीछे कई लोग होते हैं। किसी भी मुख्यमंत्री की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी कोर टीम कितनी मजबूत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शुरुआती दौर में एक चौंकाने वाला चेहरा ‘सरप्राइज चॉइस’ के रूप में देखा गया, लेकिन बीते ढाई सालों में उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि भाजपा संगठन के साथ भी बेहतरीन तालमेल बिठाया है।
जिस तरह से सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में फैसले लिए जा रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि भाजपा पुराने स्थापित राजनीतिक घरानों से हटकर नए और युवा चेहरों को मौका दे रही है। स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
भाजपा के राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल के साथ हमारी यह खास बातचीत।
मप्र से राज्यसभा उम्मीदवारी निरस्त होने पर मीनाक्षी नटराजन की जगह 'बली का बकरा' कौन? 'युवराज' की नाराजगी, हरीश के तेवर और शीर्ष अधिकारियों के बीच 'पेन' वाले संवाद की दिलचस्प इनसाइड स्टोरी। पूरी राजनीतिक हलचल यहाँ पढ़ें। - सुशील शर्मा की कलम से
कांग्रेस के रणनीतिकार यह मानकर चल रहे थे कि विधायकों की बाड़ा बंदी कर संख्या बल उनके पक्ष में है और भाजपा की तीसरी सीट की संभावना समाप्त है, लेकिन राजनीति में आत्मविश्वास और अति-आत्मविश्वास के बीच की दूरी बहुत कम होती है..
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कड़े अनुशासन से तपे और राजनीति में शुचिता, सत्यता और समन्वय को अपना आदर्श मानने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा ने स्टार समाचार से बातचीत की। अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन के अनुभवों को साझा किया।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह