भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से खास बातचीत

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से खास बातचीत
मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा कर लिया है। बैतूल से विधायक और कुशल रणनीतिकार माने जाने वाले खंडेलवाल ने सत्ता और संगठन के बीच समन्वय, आगामी चुनौतियों और पार्टी की कार्यप्रणाली पर स्टार समाचार से खुलकर चर्चा की। साक्षात्कार के मुख्य अंश:
सवाल: सत्ता और संगठन को एक साथ चलाना एक बड़ी चुनौती है। इस एक साल में आपने इसे कैसे संभाला?
जवाब: यह निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण है। कई बार सरकार को लगता है कि कोई बात संगठन तक पहुंचानी चाहिए, तो संगठन को लगता है कि कुछ बातें सरकार को बतानी हैं। हमने आपसी संवाद और समन्वय से इसे साधा है। हमारा प्रयास रहा है कि सरकार और संगठन के बीच एक उचित दूरी भी बनी रहे और समन्वय भी, जिसमें हम काफी हद तक सफल रहे हैं।
सवाल: मंत्रियों और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद की कमी और काम न होने की शिकायतें अक्सर सामने आती हैं। क्या कोई रिपोर्ट कार्ड सिस्टम है?
जवाब: मंत्री लगातार कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं और उनकी बात सुन रहे हैं। इसका एक सुव्यवस्थित फीडबैक सिस्टम काम कर रहा है। हम निरंतर सुधार कर रहे हैं। जो काम नियमों के दायरे में हैं, उन्हें करने का पूरा प्रयास होता है। यदि हम इस दिशा में शून्य से 80 प्रतिशत तक पहुंचे हैं, तो यह एक बड़ी उपलब्धि है। भविष्य में हम इस प्रणाली को और बेहतर बनाएंगे।
सवाल: पार्टी में अनुशासन पर सख्ती की बात तो होती है, लेकिन बड़े नेताओं के बड़बोलेपन पर पार्टी अक्सर नरमी बरतती है। क्या नियम छोटे और बड़े नेताओं के लिए अलग हैं?
जवाब: सभी के लिए एक समान फार्मूला है। छोटी गलती पर समझाने का कार्य होता है और बड़ी गलती पर निष्कासन तक की कार्रवाई की जाती है। इसमें पद का अंतर नहीं देखा जाता। यदि कोई जिला अध्यक्ष या विधायक भी गलती करता है, तो हम उस पर संज्ञान लेते हैं और उचित कार्रवाई करते हैं।
सवाल: आपने 2023 के चुनाव में शानदार वापसी की थी, 2018 की हार से आपने क्या सीखा?
जवाब: राजनीति में हार-जीत परिस्थितियां तय करती हैं। किसी और को दोष देने के बजाय अपनी कमियों को सुधारना ही मेरा आचरण है। मैंने कार्यकर्ताओं और जनता के विश्वास को प्राथमिकता दी, जिसका परिणाम सकारात्मक रहा।
सवाल: कुछ विधायक कार्यकर्ताओं को अपना "पेड वर्कर' बना लेते हैं, क्या पार्टी के सामने यह एक चुनौती है?
जवाब: भाजपा में, चाहे नेता हो या कार्यकर्ता, सभी के लिए पार्टी फर्स्ट है। कार्यकर्ता को समझना चाहिए कि सबसे पहले राष्ट्र है, फिर पार्टी है और उसके बाद हम हैं। किसी भी नेता का सम्मान हो सकता है, लेकिन वह पार्टी से ऊपर नहीं हो सकता। हमारे हर कार्यकर्ता के लिए पार्टी और उसका संगठन सर्वोपरि है और वह वही धर्म निभाता है।
सवाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ आपकी ट्यूनिंग की काफी चर्चा है। सरकार को योजनाओं में आप क्या सुझाव दे रहे हैं?
जवाब: मेरा काम मुख्यमंत्री तक सही फीडबैक और सुझाव पहुंचाना है। सांची ब्रांड को मजबूत करने और डेयरी उत्पादों में मध्य प्रदेश को आगे ले जाने के लिए जो एनडीडीबी के साथ टाइ-अप हुआ, उसके लिए मैंने स्वयं गुजरात जाकर अध्ययन किया था। मेरी कोशिश है कि सरकार को जमीनी हकीकत पर आधारित विजन मिलता रहे।
सवाल: कार्यकर्ताओं की नियुक्ति और निगम-मंडलों के पेच कब सुलझेंगे?
जवाब: हमने एक साल से भी कम समय में 60 से अधिक निगम-मंडलों में नियुक्तियां की हैं, जो एक बड़ा आंकड़ा है। शेष नियुक्तियां भी समय आने पर पार्टी की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएंगी। कार्यकर्ताओं के हित में हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
सवाल: राज्यसभा चुनाव के दौरान अचानक तीसरे प्रत्याशी को उतारने का फैसला कैसे लिया गया?
जवाब: हमारे मुख्यमंत्री और संगठन ने जब यह आकलन किया कि हम तीसरे प्रत्याशी को न केवल मैदान में उतार सकते हैं, बल्कि जिता भी सकते हैं, तभी हमने यह फैसला लिया। हमारी पूरी रणनीति जीत सुनिश्चित करने की थी, और यदि मतदान होता, तो भी हमारा तीसरा प्रत्याशी विजय होता। वोटों का गणित हमारे पक्ष में था।
सवाल : कांग्रेस यह भी आरोप लगाती है कि निर्मला सप्रे को भाजपा इसलिए शामिल नहीं कर रही है क्योंकि आप उपचुनाव से डरते हैं?
जवाब: मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि कांग्रेस के विधायक उनकी पार्टी के साथ हैं या नहीं, इसका जवाब मैं क्यों दूँ? यह जवाब कांग्रेस को देना चाहिए कि उनके विधायक की उनकी पार्टी में क्या स्थिति है।
सवाल: एक साल के आत्म-मूल्यांकन में आपको क्या कमी नजर आती है?
जवाब: संख्या बल अधिक होने के कारण मैं हर कार्यकर्ता या जनप्रतिनिधि से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिल पाया, यह एक कमी रही। अगले वर्षों में मेरा प्रयास होगा कि ज्यादा से ज्यादा संवाद स्थापित करूँ और फीडबैक के आधार पर संगठन और सरकार दोनों को और बेहतर बना सकूँ।
नेता पर राय
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जिस तरह से सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में फैसले लिए जा रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि भाजपा पुराने स्थापित राजनीतिक घरानों से हटकर नए और युवा चेहरों को मौका दे रही है। स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
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