भाजपा के राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल के साथ हमारी यह खास बातचीत।

राज्यसभा सांसद रजनीश अग्रवाल से
मध्य प्रदेश भाजपा की बैक-ऑफिस राजनीति के रणनीतिकार और संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित कार्यकर्ता रजनीश अग्रवाल को पार्टी ने राज्यसभा भेजकर उनकी निष्ठा का सम्मान किया है। उनके राजनीतिक सफर, सांगठनिक और तकनीकी बदलावों पर स्टार समाचार से हुई विशेष बातचीत के मुख्य अंश-
सवाल: मंडी बामोरा जैसे छोटे से गांव से राजनीति का यह सफर कैसे शुरू हुआ? क्या कोई राजनीतिक बैकग्राउंड था?
जवाब: परिवार में दूर-दूर तक कोई राजनीति में नहीं था। मेरा अग्रवाल बिजनेस बैकग्राउंड है। पिताजी की पीढ़ी सरकारी नौकरियों में थी और मेरी पीढ़ी प्राइवेट कामों में है। मैं विद्यार्थी परिषद में काम करता था, वहां काम करते-करते कब अनायास राजनीति में आ गया, मुझे खुद पता नहीं चला।
सवाल: विद्यार्थी परिषद और फिर संघ की तरफ खिंचाव कैसे हुआ?
जवाब: 1988-89 का वो दौर था जब राम जन्मभूमि आंदोलन चल रहा था। मैं मंडी बामोरा में संघ की शाखा में जाता था, जिससे स्वाभाविक रूप से वैचारिक जुड़ाव गहरा होता गया। फिर स्कूल और नगर में विद्यार्थी परिषद की इकाइयां गठित कराईं और बाद में परिषद का प्रदेश मंत्री भी निर्वाचित हुआ।
सवाल: आप भाजपा के दिवंगत दिग्गज नेता अनिल दवे जी की पारखी नजरों में कब और कैसे आए?
जवाब: अनिल दवे जी जब भोपाल के विभाग प्रचारक थे, तब मैं विद्यार्थी परिषद में था। जब वे भाजपा में आए और संगठन की पत्रिका 'चरेवेती' के संपादक बने, तो वे मुझे सह-संपादक का दायित्व सौंपकर अपने साथ ले आए। मैंने तीन-चार साल तक 'चरेवेती' का काम देखा। इसके बाद 2007 से मैं उनके साथ चुनाव प्रबंधन के काम में जुट गया।
सवाल: आपकी पढ़ाई इंजीनियरिंग की थी, फिर पत्रकारिता और राजनीति की तरफ कैसे मुड़ गए?
जवाब: हां, मैंने इंजीनियरिंग की थी, लेकिन बाद में मेरा झुकाव पत्रकारिता की तरफ हो गया। मैंने इसमें पीजी किया और नौकरियां भी तलाशीं। लेकिन शायद नियति को कुछ और मंजूर था। लिखने-पढ़ने के शौक के कारण 'चरेवेती' से जुड़ा और फिर धर्मेंद्र प्रधान जी की युवा मोर्चा की राष्ट्रीय टीम में आ गया। इस तरह राजनीति के अंदर आता चला गया।
सवाल: कहा जाता है कि आपके जैसा बैक-ऑफिस का मजबूत कार्यकर्ता कोई दूसरा नहीं है?
जवाब: पार्टी जब जैसा काम देती है, हम करते हैं। संगठन ने मंच की भूमिका (प्रदेश मंत्री) भी दी और चुनाव प्रबंधन जैसा बैक-ऑफिस का काम भी दिया। इसके बाद पार्टी ने 5 साल प्रवक्ता भी बनाया, जिसमें मैंने चैनलों पर डिबेट्स में पार्टी का चेहरा बनकर बात रखी। मैंने हमेशा हर जिम्मेदारी प्रतिबद्धता के साथ निभाई है।
सवाल: कभी मन में यह भाव नहीं आया कि चुनावी राजनीति में उतरा जाए?
जवाब: राजनीति में इच्छा होना स्वाभाविक है, क्योंकि स्वयंवर में आए हैं तो ब्रह्मचारी तो नहीं हैं। लेकिन टिकट का निर्णय करने का अधिकार संगठन के बड़ों का है। मैं उस वैचारिक कुल-खानदान से हूं जहां खुद के बारे में खुद विचार नहीं करना होता, संगठन आपके बारे में सोचता है।
सवाल: कई अध्यक्ष और संगठन महामंत्री आए और गए, लेकिन आप हमेशा उतने ही उपयोगी बने रहे। इसका क्या राज है?
जवाब: यह ईश्वर की कृपा और संगठन का बड़प्पन है। कैलाश जोशी जी से लेकर वी.डी. शर्मा जी तक—सभी के कार्यकाल में मुझे जिम्मेदारियां मिलीं। अगर संगठन की अपेक्षा 100% की थी, तो मैंने हमेशा 105% देने का प्रयास किया।
सवाल: आपको भाजपा में डेटा और टेक्नोलॉजी का मास्टर माना जाता है। इस तकनीकी बदलाव की शुरुआत कैसे हुई?
जवाब: शुरुआत में लोग मध्य प्रदेश में तकनीक के इस्तेमाल पर संदेह जताते थे। लेकिन डिजिटल क्रांति के दौर में वी.डी. शर्मा जी की अध्यक्षता और सुहास भगत जी के संगठन मंत्रित्व में हमने बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं का डिजिटलाइजेशन करने का फैसला किया। हमने 'संगठन ऐप' के माध्यम से 40 लाख कार्यकर्ताओं का पूरा विवरण ओटीपी से वेरीफाई करके रजिस्टर किया। इसी डेटा और जमीनी पन्ना प्रमुखों की मेहनत का नतीजा है कि 2023 के चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 8-9% बढ़कर करीब 49% तक पहुंच गया।
सवाल: जब राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा हुई, तो आपको सबसे पहले किसने बताया?
जवाब: सबसे पहले एक पत्रकार मित्र ने फोन पर बताया। तकनीकी जानकार होने के नाते मुझे लगा कि फर्जी लिस्ट भी हो सकती है। इसके तुरंत बाद जब प्रदेश अध्यक्ष वी.डी. शर्मा जी का बधाई के लिए फोन आया, तब मुझे इसकी सत्यता पर भरोसा हुआ।
सवाल: जीवन का सबसे सुखद और सबसे दुखद क्षण कौन सा रहा?
जवाब: मैं राजनीति को एक आध्यात्मिक भाव से करता हूँ, निवेश मानकर नहीं। इसलिए सुखद क्षण तो आते रहते हैं। दुखद क्षणों की बात करें तो अपने मार्गदर्शक अनिल दवे जी, वरिष्ठ नेता प्रभात झा जी और साथी विजेश ननावटी जी को असमय खोना मेरे लिए सबसे दुखद क्षण थे।
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बीमा पॉलिसी बेचने के लिए कंपनियां एजेंटों, बैंकों, ब्रोकरों और दूसरे डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों को कमीशन देती हैं। इस व्यवस्था में कमीशन कितना हो, किस उत्पाद पर कितना भुगतान उचित है और क्या ज्यादा कमीशन पाने की होड़ में ग्राहक को उसकी जरूरत से अलग पॉलिसी बेची जा सकती है—इन सवालों पर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने नए सिरे से विचार शुरू किया है।
स्टार समाचार से खास मुलाकात.. हर सवाल का सीधा जवाब
इबोला वायरस अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहा है। इसके दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का मौजूदा प्रकोप गंभीर है। डीआर कांगो में हजारों पुष्ट मामले और मौतें दर्ज हुई हैं, वहीं नाइजीरिया, युगांडा और केन्या में सामने आए मामलों ने सीमा पार प्रसार की चिंता बढ़ाई है। फिलहाल इसकी वैक्सीन नहीं होना भी एक बड़ी चुनौती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित किया है।
मध्य प्रदेश में राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी शिवनारायण सिंह चौहान ने पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी और सदस्य सचिव हर्षल पंचोली पर संस्था के कामकाज में बाधा डालने तथा 237 ‘डीम्ड ईसी’ जारी करने में अनियमितताओं के दोषी तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी एवं सदस्य सचिव उमा महेश्वरी पर कार्रवाई की मांग की है।
मैदान पर पसीना बहाता हुआ एक युवा खिलाड़ी, जिसकी आंखों में देश के लिए मेडल जीतने का सपना है, और दूसरी तरफ जिन्हें खेल का ‘क, ख, ग’ भी नहीं मालूम, वे नेता और उनके ‘राजदुलारे’ खेल संघों के सर्वेसर्वा बने बैठे हैं। पढ़िए स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ा सवाल तैर रहा है-क्या सूबे की अफसरशाही साहस के संकट से जूझ रही है। नियमों का इकबाल बुलंद करना तो दूर, व्यवस्था में कोई ऐसा दबंग चेहरा नजर नहीं आता जो मनमानी करने वालों पर सीधे नकेल कस सके।
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किशोर कल्पीवार, साक्षात्कार, स्टार विशेष
मध्यप्रदेश में भले ही अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना तय है, लेकिन राज्य का राजनीतिक पारा अभी से उफान पर आ गया है। दोनों प्रमुख सियासी दल भाजपा और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व समय से दो साल पहले ही मैदान में उतर चुका है। इंदौर, उज्जैन, बालाघाट से लेकर भोपाल तक दिग्गजों की आवाजाही और बैठकों के दौर ने साफ कर दिया है कि सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए घेराबंदी शुरू हो चुकी है।
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