आज कानून की किताबों में "संजय नगाइच बनाम एमपी स्टेट' के नाम से लैंडमार्क जजमेंट है।

साक्षात्कार : मप्र वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन संजय नगाइच से सीधी बात
राजनीतिक उथल-पुथल, बाहुबल से सीधी टक्कर और करोड़ों के गबन के आरोपों से लेकर सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट तक के सफर पर मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन संजय नगाइच ने स्टार समाचार से विशेष बातचीत की। पद संभालते ही ताबड़तोड़ एक्शन और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के वेयरहाउस पर कार्रवाई को लेकर वे सुर्खियों में हैं... प्रस्तुत हैं बातचीत के अंश...
सवाल: छात्र राजनीति के बाद मुख्यधारा में आते ही गुटबाजी और निष्कासन के बीच आप कैसे टिके रहे?
जवाब: मैं मूल रूप से संघ का स्वयंसेवक और जमीनी कार्यकर्ता हूं। छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक संगठन मंत्री रहा। संघर्ष, लाठियां और जेल ने मुझे वैचारिक रूप से मजबूत और निडर बनाया। राजनीति में उतार-चढ़ाव आते हैं, लेकिन निष्ठा और सिद्धांतों पर टिके रहने से संगठन आपका मूल्यांकन करता है। आज जो हूं, वह इसी वैचारिक प्रतिबद्धता और पार्टी के भरोसे का परिणाम है।
सवाल: 2006 में पन्ना जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बनने पर बाहुबली भैया राजा अशोक वीर विक्रम सिंह के खौफ के बीच आपने काम कैसे किया?
जवाब: वह बेहद कठिन दौर था। पन्ना में भैया राजा का ऐसा खौफ था कि बिना उनके कुछ नहीं होता था। जेल में रहकर भी वे चुनाव जीतते थे और बड़े नेता भी उनके सामने झुकते थे। मैं एक साधारण कार्यकर्ता था, लेकिन संघ की विचारधारा और संगठन का साथ था। हमने डरने के बजाय जमीनी लड़ाई लड़ी, नतीजा यह रहा कि 90 की 90 सोसाइटियों में भाजपा समर्थित कार्यकर्ता जीते और मैं अध्यक्ष बना। इस जीत ने जिले में सामंतशाही खत्म कर कार्यकर्ताओं को स्थापित किया।
सवाल: इसी कार्यकाल के दौरान आप पर करोड़ों रुपये के गबन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। आपका बोर्ड तक भंग कर दिया गया। इसकी असल सच्चाई क्या है?
जवाब: जब मैंने बैंक की कमान संभाली, तब वह करोड़ों के घाटे में था और डिपॉजिट सिर्फ 48 करोड़ रुपये था। जब मैंने बैंक छोड़ा, तो डिपॉजिट 500 करोड़ रुपये पहुंच चुका था और सदस्य संख्या चार गुना बढ़ चुकी थी। दिक्कत यह हुई कि भैया राजा के आभा मंडल से मुक्त हुए कुछ स्थानीय प्रभावशाली राजनेता हमसे प्रतिद्वंदिता रखने लगे। तत्कालीन सहकारिता मंत्री गौरीशंकर बिसेन और स्थानीय मंत्रियों के प्रभाव में आकर मेरे खिलाफ 19 मनगढ़ंत और फर्जी आरोप लगाए गए और हमारा बोर्ड भंग कर दिया गया।
सवाल: सार्वजनिक मंच से आपके खिलाफ टिप्पणी हुई, सरकार आपकी ही थी, फिर भी आपके साथ ऐसा न्याय क्यों हुआ और कोर्ट में क्या हुआ?
जवाब: उस समय सरकार में बैठे मंत्रियों की पैरवी का स्तर अलग था और मैं एक जिले का अध्यक्ष था। लेकिन मैं झुका नहीं, क्योंकि मैं सही था। हाई कोर्ट ने पहली ही नजर में उन आरोपों को खारिज कर दिया। इसके बाद अपने अहंकार की तुष्टि के लिए वे लोग सुप्रीम कोर्ट गए। सरकार ने मेरे खिलाफ देश के सबसे महंगे वकील खड़े किए, करोड़ों रुपये खर्च किए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जब आरबीआई से जांच कराई, तो साफ हुआ कि मेरे कार्यकाल में बैंक स्वर्णिम युग में था और ₹1 का भी भ्रष्टाचार नहीं हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने मुझे पूरी तरह क्लीन चिट दी और मंत्रियों पर सख्त टिप्पणी करते हुए ₹1 लाख का जुर्माना लगाया। यह फैसला आज कानून की किताबों में "संजय नगाइच बनाम एमपी स्टेट' के नाम से लैंडमार्क जजमेंट है। कोर्ट के आदेश पर मैं दोबारा अध्यक्ष बहाल हुआ और मध्य प्रदेश में सबसे लंबे समय तक कोऑपरेटिव बैंक का अध्यक्ष रहने का रिकॉर्ड बनाया।
सवाल: संगठन में आपकी छवि एक बागी या कड़क नेता की रही है। मंत्रियों से लेकर कई प्रदेश अध्यक्षों के कार्यकाल में आपकी अदावत की खबरें क्यों आईं?
जवाब: यह पूरी तरह से भ्रम फैलाया गया है। बुंदेलखंड के जो रेत माफिया और अवैध काम करने वाले तत्व हैं, जिनकी दुकानें मेरे रहते बंद हो जाती हैं, वे इस तरह के षड्यंत्र रचते हैं। मेरा सिर्फ एक बार निष्कासन हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट से बहाल होने के बाद पवई की जनता ने स्थानीय मंत्री का विरोध किया था और उसका ठीकरा मुझ पर फोड़ दिया गया। मेरे संबंध प्रभात झा, सत्यनारायण जटिया, राकेश सिंह से लेकर वर्तमान नेतृत्व तक, सबसे बेहद शानदार रहे हैं। मतभेद होना अलग बात है, लेकिन मनभेद नहीं है। हम सब एक ही परिवार के अंग हैं।
सवाल: आपको मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन का चेयरमैन बने दो महीने भी नहीं हुए और आपने ताबड़तोड़ निरीक्षण और कड़े एक्शन शुरू कर दिए। क्या आप बहुत जल्दी में हैं?
जवाब: मैं जल्दी में नहीं हूं, यह मेरी कार्यपद्धति है। मैं जहां भी रहता हूं, काम को गहराई से समझकर व्यवस्था को दुरुस्त करना मेरी प्राथमिकता होती है। हम यहां किसी से बदला लेने के लिए नहीं, बल्कि कॉरपोरेशन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आए हैं। मुझे वहां पहुंचने तक बिल्कुल नहीं पता था कि वह जीतू पटवारी का वेयरहाउस है। हमारी कार्रवाई बुधनी विधानसभा से शुरू हुई थी, जहाँ प्रक्रिया के दौरान खामियां मिलने पर सभी ने सहयोग किया। हालाँकि, जीतू पटवारी के वेयरहाउस पर वहां के मैनेजर ने रसूख दिखाने की कोशिश की। नियमों के तहत जाँच करने पर हमने गंभीर सुरक्षा खामियां, बंद नालियां और वर्ष 2024 में 50 लाख रुपये के खाद्यान्न की शॉर्टेज पाई। इसके चलते उनका 21 लाख रुपये का किराया रोक दिया गया है। साथ ही, यह वेयरहाउस बैंक से 8 करोड़ रुपये के कर्ज में डूबा है और कुर्की की प्रक्रिया से गुजर रहा है। कानून सबके लिए बराबर है, चाहे कोई भी हो।
सवाल: इस कार्रवाई के बाद जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर आपकी काफी मिमिक्री की और तंज कसे। आप इस पर क्या कहेंगे?
जवाब: जीतू पटवारी की पूरी राजनीति गूगल और चैटजीपीटी से चलती है। अहंकार और दंभ में उनकी रस्सी जल गई, पर बल नहीं गया। उन्होंने एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम और सरनेम को बिगाड़कर अभद्र टिप्पणी की, जिसका मैंने करारा जवाब दिया। हालांकि, अब उनका पत्र आ गया है कि उन्होंने सारी कमियां दुरुस्त कर ली हैं और हम दोबारा निरीक्षण करा सकते हैं।
नेताओं पर राय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: दुनिया के सबसे अद्भुत और लोकप्रिय नेता।
गृह मंत्री अमित शाह: शानदार नेता और कुशल संगठक।
राहुल गांधी: वो तो 'पप्पू' हैं।
प्रियंका गांधी: राहुल और प्रियंका की जोड़ी फिल्मों की 'बंटी और बबली' जैसी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव: शानदार, जानदार और स्ट्रेट-फॉरवर्ड नेता।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम): देश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण के अग्रदूत।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ: असफल मुख्यमंत्री, जिनकी सरकार आपसी अंतर्कलह के कारण गिर गई।
संजय नगाइच: एक साधारण कार्यकर्ता।
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हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से
जिस समाज में भगवान के घर में चोरी करने वाला हाथ नहीं कांपता, वहां चिंता चोरी की राशि से अधिक उस संस्कार की होनी चाहिए, जिसकी मृत्यु चुपचाप हमारे सामने हो रही है।
जी हाँ, मेरी प्राथमिकता है कि योग बच्चों के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बने। मुझे खुशी है कि एनसीईआरटी ने इसे स्वीकार किया है।
हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से
सत्ता के शिखर पर दिखाई देने वाला चेहरा भले एक हो, पर उसकी सफलता के पीछे कई लोग होते हैं। किसी भी मुख्यमंत्री की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी कोर टीम कितनी मजबूत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शुरुआती दौर में एक चौंकाने वाला चेहरा ‘सरप्राइज चॉइस’ के रूप में देखा गया, लेकिन बीते ढाई सालों में उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि भाजपा संगठन के साथ भी बेहतरीन तालमेल बिठाया है।