स्टार समाचार, स्टार स्ट्रेट, सुशील शर्मा, साप्ताहिक कॉलम

इनका कद बड़ा उनकी मुश्किलें
भाजपा संगठन में मध्यप्रदेश का कद एक बार फिर बढ़ा है। अध्यक्ष के बाद संगठन महामंत्री और उनकी टीम को सबसे अहम माना जाता है। ऐसे में सौदान सिंह की सह संगठन मंत्री की भूमिका में वापसी को संगठन में मध्यप्रदेश के बढ़ते प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। दिलचस्प यह कि सियासी गलियारों में सौदान सिंह को इसी क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री के गुरु-विरोधी के तौर पर भी देखा जाता रहा है। देखना यह है कि संगठन में साहब की एंट्री से केंद्रीय मंत्री के संसदीय क्षेत्र में सियासी हवा अब किस तरफ बहेगी।
साहब से सारे ग्रह नाराज!
साहब के नवग्रह ऐसे बिगड़े हैं कि हालात सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे। माननीय के लिए आखिरी मौका आया और निकल गया! पहले उपचुनाव में टिकट नहीं मिला... तकलीफ हुई.. दिल को तसल्ली थी चलो, संगठन में तो जगह मिल ही जाएगी। लेकिन अब नितिन नवीन ने भी अपनी टीम में साहब को जगह नहीं दी। अब सियासी गलियारों में फुसफुसाहट स्वाभाविक है आखिर साहब से ऐसी कौन-सी नाराजगी है कि टिकट भी दूर और संगठन भी दूर? लगता है इस बार सिर्फ एक-दो ग्रह नहीं, पूरे नवग्रह ही साहब से रूठे बैठे हैं!
खाकी में महिला सशक्तिकरण
मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर अब कुछ ज्यादा ही अलग रंग दिखाने लगी है। खासकर खाकी वर्दी में! पहले सिवनी में महिला पुलिस अधिकारी रिश्वत के मामले में फंसीं और अब कटनी में एक आला महिला पुलिस अधिकारी पर भी घूस लेने के आरोप में कार्रवाई हुई। यानी खाकी में पद की ऊंचाई और कुर्सी की ताकत के साथ ‘लेन-देन’ का हुनर भी बराबरी पर! कभी कहा जाता था कि नारी अबला नहीं, सबला है। अब इन घटनाओं पर कोई कह दे तो गलत नहीं होगा कि-मैडम लोग सिर्फ अधिकार लेने में ही नहीं, घूस लेने में भी आत्मनिर्भर हो रही हैं! लेकिन असली सवाल यही है कि ऐसे मामलों में सिर्फ महिला अधिकारी शामिल हैं या उनके पीछे पूरा एक खाकी गिरोह..
टैलेंट पर टकराव!
कांग्रेस का टैलेंट हंट हुआ, टैलेंट चुना गया और दिल्ली से करीब 35 नामों की सूची पर मुहर भी लग गई, लेकिन मध्यप्रदेश आते ही मामला अटक गया। वजह, टैलेंट से ज्यादा नेताओं का अपना-अपना टैलेंट! हर नेता चाहता है कि उसके समर्थक का नाम टीम में एडजस्ट हो जाए। लिहाजा सूची बढ़ाने को लेकर प्रदेश कांग्रेस में जमकर नूरा-कुश्ती चल रही है। नतीजा यह कि करीब चार महीने से कांग्रेस बिना मीडिया टीम के ही काम चला रही है। वैसे टीम कब बनेगी, यह तय नहीं, क्योंकि सबके नाम शामिल कर देना भी इतना आसान नहीं है!
राहुल ने जिताया दतिया!
चौंकिए मत ये वो राहुल नहीं हैं! लेकिन मजेदार कनेक्शन जरूर है। दतिया उपचुनाव के दौरान राहुल गांधी की सोशल मीडिया टीम के कभी सदस्य रहे इस राहुल की अपनी सर्वे एजेंसी है। चुनाव के वक्त उन्हें बूथ लेवल पर मार्किंग और सर्वे के लिए लगाया गया। बताते हैं कि इन्हीं सर्वे रिपोर्ट्स के आधार पर रणनीति तैयार हुई और मैदानी गणित साधा गया। तो भैया, अब दो राहुल हैं, तो कुछ तो परिणाम बदलेगा...
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मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल ने अपने छात्र जीवन (एबीवीपी) से लेकर राजनीति के सफर, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ पुराने संघर्षों और वक्फ बोर्ड की नई रणनीतियों पर खुलकर बात की।
मप्र में जेन जी और जेन अल्फा का टाइम आ गया है या नहीं और राजनीतिक दल इस नई चुनौती से निपटने के लिए क्या कर रहे हैं, इसी पर स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट—
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में संगठन ने जिन नेताओं पर सबसे अधिक भरोसा किया गया, वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। पढ़िए विश्लेषण
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कम मतदान भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के लिए चुनौती बनेगा या कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम के लिए अवसर? यदि पिछले तीन उपचुनावों का रिकॉर्ड देखा जाए तो तस्वीर काफी दिलचस्प दिखाई देती है।
जानिए कैसे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिर्फ तीन दिनों में समान नागरिक संहिता (UCC) पर ऐतिहासिक कदम उठाकर अपनी तेज और प्रभावी कार्यशैली का परिचय दिया है।
आज कानून की किताबों में "संजय नगाइच बनाम एमपी स्टेट' के नाम से लैंडमार्क जजमेंट है।
क्या अनुराग जैन की तरह दिल्ली में पदस्थ मप्र कैडर के अधिकारी यहां आएंगे या यहां पदस्थ अधिकारियों में से ही किसी की किस्मत चमकेगी। इसी पर स्टार समाचार की खास रिपोर्ट....
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से खास बातचीत
सरकारी दफ्तरों के अंदर की हलचल, तबादलों में पारदर्शिता, और प्रशासनिक गलियारों के दिलचस्प किस्से। जानिए कैसे बदल रही है काम करने की संस्कृति और क्या है अधिकारियों के 'जुगाड़' का सच।

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