हर रविवार साप्ताहिक कॉलम। सुुशील शर्मा की कलम से

सेवानिवृत्तों की फौज

प्रदेश के एक कद्दावर और पद में मंत्रियों से थोड़ा ऊंचे ओहदे पर विराजमान महोदय के यहां सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों का मजमा है। एक-दो हों तो समझ में आता है, लेकिन साहब के यहां तो कतार लगी है। हालात यह है कि मंत्रालय में रोशनी वाले विभाग से रिटायर अधिकारी महोदय ने ओएसडी के कक्ष में कब्जा जमा लिया है, वह भी बिना नेमप्लेट लगवाए, ताकि अंदर बैठकर कुर्सी तोड़ सके। यह तो समझ में आता है कि साहब के अच्छे दिनों के चलते सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी तो साहब को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है, परंतु साहब की क्या मजबूरी यह समझ से परे हैं। रिटायरों की फौज से उनके निवास और दफ्तर के नियमित अधिकारी कर्मचारी परेशान हैं, क्योंकि हर काम में रिटायर अपना पेंच फंसाते हैं, जिससे कारण समय से काम करने को लेकर ख्यात साहब के काम लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।
छह महीने भी नहीं हुए

मप्र के मुखिया की दरबार में प्रवेश करना और लगातार बने रहना आसान नहीं है। साहब की पैनी नजरों से कोई बच नहीं सकता है। थोड़ी सी भी लापरवाही कोप का भोजन बना देती है। इसी कारण उनकी कोटरी में अधिकारी ज्यादा समय टिक ही नहीं पाते है। ऐसे ही एक अधिकारी को कम समय में ही साहब के दरबार से विदा होना पड़ा। कयास लगाए जा रहे हैं कि दरबार में जाने के बाद जिस तरह से उनका कद बढ़ रहा था, अचानक ऐसा क्या हुआ कि साहब की विदाई कर दी गई। विषय ऐच्छिक है या कुछ और जवाब तलाशा जा रहा है।
साहब के कृषि कल्याण संस्थान का कुठाराघात

प्रदेश की सरकार कृषि कल्याण वर्ष मना रही है। सरकार के मुखिया ने कई सौगातें दी, ताकि किसानों को फील गुड कराया जा सके, किंतु उनके इस अरमान पर कृषि से जुड़ा एक संस्थान पलीता लगा रहा है। तरक्की से उच्चाधिकारी बने साहब के संस्थान के मुखिया बनने के बाद किसानों पर लगातार गाज गिर रही है। संस्थान से जुड़े प्रदेश के कई स्थानों पर किसानों की परेशानी तो बनी हुई है, इस पर न तो सुविधा और बेवजह की वसूली ने किसान और सरकार के संबंधों में खटास डलने लगी है। सरकार को सोचना होगा कि ऐसे उच्चाधिकारी संस्थान में बने रहना कृषि कल्याण वर्ष में सरकार की छवि को बनाए की जगह बिगाड़ने वाला न हो जाए।
मंत्रियों के रिश्तेदार ही रह गए

प्रदेश में तबादलों में दो कद्दावर मंत्रियों के लिए उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उनके नाते रिश्तेदार ही तबादलों की सूची में नदारद दिखे। मंत्रियों ने जब इस बावत अपने स्टाफ से सवालात किए तो पता चला कि रिश्तेदारों के नाम तो सूची में थे ही नहीं, लेकिन कुछ ऐसे नाम जरूर सूची में थे, जो इस बात की गवाही देने के लिए पर्याप्त है कि मंत्री महोदय के स्टाफ के लिए साहब के रिश्तेदारों से ज्यादा लक्ष्मी वाले तबादले जरूरी थे, देखना यह है कि दोनों मंत्री रिश्तेदारों के तबादला न हो पाने का गुस्सा स्टाफ पर निकालते हुए एक्शन लेते हैं या लक्ष्मी भेंट से उनका भी मन पिघलने वाला है। दोनों ही मंत्री पढाई लिखाई से संबंधित विभाग से ताल्लुक रखते हैं।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
मध्य प्रदेश में राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) के अध्यक्ष एवं पूर्व आईएएस अधिकारी शिवनारायण सिंह चौहान ने पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी और सदस्य सचिव हर्षल पंचोली पर संस्था के कामकाज में बाधा डालने तथा 237 ‘डीम्ड ईसी’ जारी करने में अनियमितताओं के दोषी तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी एवं सदस्य सचिव उमा महेश्वरी पर कार्रवाई की मांग की है।
मैदान पर पसीना बहाता हुआ एक युवा खिलाड़ी, जिसकी आंखों में देश के लिए मेडल जीतने का सपना है, और दूसरी तरफ जिन्हें खेल का ‘क, ख, ग’ भी नहीं मालूम, वे नेता और उनके ‘राजदुलारे’ खेल संघों के सर्वेसर्वा बने बैठे हैं। पढ़िए स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़ा सवाल तैर रहा है-क्या सूबे की अफसरशाही साहस के संकट से जूझ रही है। नियमों का इकबाल बुलंद करना तो दूर, व्यवस्था में कोई ऐसा दबंग चेहरा नजर नहीं आता जो मनमानी करने वालों पर सीधे नकेल कस सके।
जानिए मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों की अंदरूनी खबरें। हर रविवार को सुशील शर्मा की कलम से
किशोर कल्पीवार, साक्षात्कार, स्टार विशेष
मध्यप्रदेश में भले ही अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना तय है, लेकिन राज्य का राजनीतिक पारा अभी से उफान पर आ गया है। दोनों प्रमुख सियासी दल भाजपा और कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व समय से दो साल पहले ही मैदान में उतर चुका है। इंदौर, उज्जैन, बालाघाट से लेकर भोपाल तक दिग्गजों की आवाजाही और बैठकों के दौर ने साफ कर दिया है कि सत्ता की चाबी हासिल करने के लिए घेराबंदी शुरू हो चुकी है।
जानिए मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों की अंदरूनी खबरें। निर्माण विभाग की वेबसाइट से संपत्ति का ब्योरा गायब, दो संभागों में अफसरों की तनातनी और अन्य चर्चित मामले विस्तार से पढ़ें।
ग्वालियर की चंबल माटी से छात्र राजनीति के शिखर तक पहुंचे और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पूर्णकालिक कार्यकर्ता से मध्य प्रदेश युवा आयोग के अध्यक्ष बने प्रवीण शर्मा के साथ स्टार समाचार की खास बातचीत।
मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री का पद केवल एक राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सत्ता और संगठन के बीच वैचारिक संतुलन, सख्त अनुशासन और कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने वाली मुख्य धुरी माना जाता है। नौ महीनों से इस शीर्ष पद का खाली होना पार्टी के भीतर एक बड़ी ‘कमी’ को बयां कर रहा है।
पॉलिसी बेचते समय मुस्कुराते चेहरों के साथ कैशलेस इलाज और झटपट दावों का प्रलोभन देने वाली बीमा कंपनियों की असलियत क्लेम के वक्त सामने आ रही हैं। नियम-शर्तों की बारीक लाइनों का जाल बुनकर आम जनता की गाढ़ी कमाई हड़पने और उनके दावों को खारिज करने की मनमानी का यह खेल अब बड़ी समस्या बन चुका है।